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बजी खतरे की घंटी! अब गर्मी के कारण डेंजर जोन में दिल्ली के 55% जिले, जानें देश का हाल

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नई दिल्ली

दिल्ली में मई के मौसम में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। स्थिति यह कि राजधानी हीट रिस्क इंडेक्स बढ़ गया है। दिल्ली के 55% जिले बहुत हाई रिस्क वाली कैटेगरी में हैं। वहीं, बाकी हाई रिस्क वाली कैटेगरी हैं। ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर ने पिछले दशक में रात के समय तापमान में बढ़ोतरी और उच्च आर्द्रता का अनुभव किया है।

गर्मी कैसे बढ़ रही खतरा?
‘अत्यधिक गर्मी भारत को कैसे प्रभावित कर रही है: जिला-स्तरीय गर्मी के खतरे का आकलन’ वाली स्टडी में तीन प्रमुख ट्रेंड्स पर रोशनी डाली है। इसमें बहुत गर्म रातों में खतरनाक वृद्धि; उत्तर भारत में, विशेष रूप से सिंधु-गंगा के मैदान में सापेक्ष आर्द्रता में वृद्धि; और दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद, भोपाल और भुवनेश्वर जैसे घने, शहरी और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों में गर्मी का बढ़ता जोखिम शामिल है।

देश के 57 फीसदी जिलों में रिस्क
स्टडी के लिए, एक हीट रिस्क इंडेक्स (एचआरआई) डेवलप किया गया। इसे देश के 734 जिलों के संबंध में खतरों का आकलन करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। यह इंडेक्स जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) ढांचे पर आधारित है, जो ‘रिस्क को खतरे, जोखिम और भेद्यता के संयोजन के रूप में परिभाषित करता है। रिपोर्ट में रिस्क के लेवल के आधार पर 1 से 5 तक के स्कोर पर जिलों को बहुत कम, कम, मध्यम, अधिक और बहुत अधिक जोखिम वाली कैटेगरी में वर्गीकृत किया गया है।

दिल्ली भारत के शीर्ष 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुमार है, जिसके 55% जिले बहुत हाई रिस्क वाली कैटेगरी में आते हैं। अधिक जनसंख्या और भवन घनत्व, शहरी गर्मी आइलैंड प्रभाव और बुजुर्गों, बच्चों और अनौपचारिक बस्तियों के निवासियों जैसे कमजोर समूहों की उपस्थिति शहर के जोखिमों को बढ़ाती है।
विश्वास चितले, सीनियर प्रोग्राम लीड, CEEW

स्टडी में यह बताया गया है कि अत्यधिक गर्मी अब भारत के 57% जिलों के लिए जोखिम पैदा कर रही है। इन जिलों में देश की 76% आबादी रहती है। दिल्ली में, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, उत्तर, पश्चिम, उत्तर-पूर्व और शाहदरा जिले बहुत हाई रिस्क वाली कैटेगरी में आते हैं, जबकि शेष पांच जिलों को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा गया है।

रात में बढ़ रहा टेंपरेचर
रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में रात के टेंपरेचर में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। साल 1982-2011 बेसलाइन की तुलना में 2011-22 के दशक में हर गर्मियों में छह अतिरिक्त बहुत गर्म रातें दर्ज की गई हैं। जबकि बहुत गर्म दिनों में कोई बड़ी वृद्धि नहीं देखी गई है। पिछले दशक में गर्मियों के चरम महीनों के दौरान सापेक्ष आर्द्रता में भी लगभग 9% की वृद्धि हुई है। इससे गर्मी की टेंशन काफी बढ़ गया है।

स्टडी में कहा गया है कि यह दिन के तापमान में गिरावट से और भी जटिल हो गया है, जो दर्शाता है कि गर्म दिनों के बाद रातें पर्याप्त ठंडी नहीं हो रही हैं। दिल्ली का अत्यधिक रिस्क इसकी बहुत अधिक आबादी और इमारतों के घनत्व के कारण है। आबादी और इमारतें शहरी गर्मी प्रभाव को बढ़ाती हैं। साथ ही अत्यधिक गर्मी की घटनाएं इकोनॉमिक एक्टिविटी के तहत उत्पादकता और बुनियादी ढांचे के नुकसान की आशंका को बढ़ाती है।

किसको सबसे अधिक खतरा?
अधिक गर्मी के कारण बस्तियों में रहने वाले हाशिए पर रहने वाले लोगों के पास ठंडक और स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुंच के कारण खतरा अधिक रहता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अपेक्षाकृत अच्छी अनुकूलन क्षमता होने के बावजूद जैसे बिजली और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच – खतरे और जोखिम का पैमाना इन बाधाओं से कहीं अधिक है। दिल्ली की गर्मी को तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने और बढ़ा दिया है। इससे मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों की तरह गर्म रातों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

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