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क्रिकेट प्रेमी, लेकिन वकीलों को गुगली नहीं डाली… सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रवि को ऐसे दी विदाई

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नई दिल्ली:

केरल के इडुक्की जिले के पीरमेड गांव के एक दलित परिवार में जन्मे सी टी रविकुमार ने जूलॉजी में ग्रेजुएशन करने के बाद कानून की पढ़ाई करने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने चार दशक लंबा करियर बनाया। अपनी कड़ी मेहनत और काबिलियत के दम पर अदालतों के अंदर और बाहर लोगों का दिल जीता। वो सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए। जस्टिस रवि 5 जनवरी को रिटायर हो पहे हैं। शुक्रवार को वो सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार के साथ एक औपचारिक विदाई बेंच में बैठे।

सीजेआई ने की जमकर तारीफ
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने उनके सम्मान में एक कविता पढ़ी। इस कविता के जरिए जस्टिस रवि के सरल व्यवहार और मजबूत विचार की तारीफ की। सीजेआई खन्ना ने कहा कि कविता ने जस्टिस रविकुमार के व्यक्तित्व को पूरी तरह से दर्शाया है। उन्होंने कहा, “वह ‘गॉड्स ओन कंट्री’ से हैं और सभी के प्रिय हैं, बार और बेंच दोनों के। वह एक नेक इंसान हैं जिन्होंने अपने मानवीय गुणों से सबका दिल जीत लिया है।’

सीजेआई ने कहा, ‘क्रिकेट और प्रकृति के प्रति उनका प्रेम जगजाहिर है। वह हममें से कई लोगों की तरह शहरों-कस्बों से नहीं, बल्कि एक ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, जहां बेहतर सुविधाओं तक पहुंच सीमित होती है। एक जज के रूप में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना अपने आप में एक उपलब्धि है।

‘वकीलों ने दूसरी पारी के लिए दी शुभकामनाएं’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जस्टिस रविकुमार सादगी की प्रतिमूर्ति हैं और उन्होंने कभी भी एक जज का रौब नहीं दिखाया। SCBA अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने कहा कि हालांकि जस्टिस रवि क्रिकेट प्रेमी थे, लेकिन उन्होंने वकीलों को कभी गुगली नहीं डाली। SCoARA अध्यक्ष विपिन नायर ने क्रिकेट के प्रति उनके प्रेम का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पहली पारी शानदार रही और उन्हें दूसरी पारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

‘मैंने वकील होने का अहसास नहीं छोड़ा’
जस्टिस रविकुमार ने कहा, ‘हाईकोर्ट के जज और फिर सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त होने के बाद भी, एक बात जो मुझे कभी नहीं छोड़ी, वह है एक वकील होने का एहसास। मैं वहीं का हूं और इसलिए मैं सभी वकीलों का सम्मान करता हूं।’ उन्होंने कहा, पारंपरिक रूप से, भारतीय दूसरी पारी में अच्छी बल्लेबाजी करते हैं, मैं चाहता हूं कि मैं अपनी दूसरी पारी (रिटायरमेंट के बाद के करियर) में अच्छी बल्लेबाजी करूं।

जस्टिस रवि ने 1986 में मावेलिकारा के जिला अदालतों में वकालत शुरू की। 1996 में उन्होंने केरल हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की और 5 जनवरी 2009 को हाई कोर्ट के जज नियुक्त हुए। उन्होंने 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली और उनका कार्यकाल तीन साल और चार महीने रहा।

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