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Friday, May 1, 2026
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MSP की कानूनी गारंटी पर अध्यादेश की मांग, सरकार से बातचीत की नई तारीख, किसान आंदोलन पर 5 बड़े अपडेट

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नई दिल्ली

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन पांचवे दिन भी जारी है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कानून बनाने समेत अन्य मांगों को लेकर पंजाब और हरियाणा की सीमा पर शंभू तथा खनौरी में डटे हुए हैं। पुलिस की तरफ से प्रदर्शनकारी किसानों के बैरिकेड्स की तरफ बढ़ने की कोशिश के दौरान उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस की तरफ से आंसू गैस के दागे जा रहे हैं। पंजाब के किसानों ने 13 फरवरी को दिल्ली ओर कूच शुरू किया था। हालांकि, हरियाणा-पंजाब की शंभू और खनौरी सीमाओं पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। तब से प्रदर्शनकारी दोनों सीमाओं पर डटे हुए हैं।

MSP को कानूनी गारंटी देने के लिए अध्यादेश की मांग
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने केन्द्र सरकार से शनिवार को मांग की कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने के लिए अध्यादेश लाए। पंधेर ने शंभू बॉर्डर पर कहा कि अगर केन्द्र सरकार चाहे तो वह रातों रात अध्यादेश ला सकती है। अगर सरकार किसानों के आंदोलन का कोई समाधान चाहती है तो उसे यह अध्यादेश लाना चाहिए कि वह एमएसपी पर कानून लागू करेगी, तब बातचीत आगे बढ़ सकती है। पंधेर ने कहा कि जहां तक तौर तरीकों की बात है तो कोई भी अध्यादेश छह माह तक वैध होता है। कृषि ऋण माफी के मुद्दे पर पंधेर ने कहा कि सरकार कह रही है कि ऋण राशि का आकलन करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में बैंकों से आंकड़े एकत्र कर सकती है। यह इच्छाशक्ति की बात है।

18 तारीख को होगी चौथे दौर की वार्ता
केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा का कहना है कि सरकार का जोर बातचीत पर है। केंद्रीय मंत्री मुंडा का कहना है कि सभी मुद्दों पर बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत रविवार को भी जारी रहेगी। इससे पहले 15 फरवरी बृहस्पतिवार को तीसरे दौर की बातचीत शुरू हुई थी। बातचीत में दोनों पक्षों के बीच बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला। किसान नेताओं और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच बृहस्पतिवार रात करीब 8:45 बजे बैठक शुरू हुई। यह बातचीत पांच घंटे तक जारी रही लेकिन इसमें दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बनी। किसानों की तरफ से एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के साथ ही किसान कृषकों के कल्याण के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन और कर्ज माफी, लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘न्याय’, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है।

दुश्मनों की तरह व्यवहार…मोर्टार से हमला
किसानों का कहना है कि सरकार उनके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है। किसानों का कहना है कि हमारे ऊपर ड्रोन से मोर्टार बरसाए जा रहे हैं। इसके अलावा हमारे साथ आंदोलन में शामिल युवाओं को उकसाने की कोशिश भी की जा रही है। किसानों ने पुलिस के एक वीडियो का भी जवाब दिया। किसानों का कहना है कि पुलिस पता नहीं कहां से वीडियो लेकर आई है। इसमें हमारी तरफ से जानबूझ कर पुलिक को उकसाने का आरोप लगाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि हम लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं जबकि पुलिस हमपर बल प्रयोग कर रही है। इससे पहले हरियाणा पुलिस ने शुक्रवार को कई किसानों का वीडियो जारी किया था। वीडियो अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पर पथराव करते प्रदर्शनकारी दिखाए गए थे। इसके साथ ही सुरक्षा कर्मियों को उकसाने का प्रयास करते देखा गया है। हरियाणा पुलिस की तरफ से ‘एक्स’ पर एक वीडियो शेयर किया गया। वीडियो में चेहरे ढके हुए कई युवा प्रदर्शनकारियों को शंभू सीमा पर सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंकते देखा जा सकता है।

उत्तरी राज्यों को रोजाना 500 करोड़ रुपये का नुकसान
उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) का कहना है कि किसान आंदोलन के लंबा चलने से उत्तरी राज्यों में व्यापार और उद्योग को ‘गंभीर नुकसान’ पहुंच सकता है। उद्योग मंडल का कहना है कि किसान आंदोलन से रोजगार को भारी नुकसान होने की आशंका है। इससे प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होगा। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन से प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा। इससे उत्तरी राज्यों मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के चौथी तिमाही के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उद्योग मंडल देश में सभी के कल्याण के लिए आम सहमति के साथ सरकार और किसानों दोनों से मुद्दों के शीघ्र समाधान की आशा करता है।

पंचायत में होगा आंदोलन पर निर्णय
किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पंचायत के बाद किसान आंदोलन में शामिल होने पर फैसला करेंगे। टिकैत ने दिल्ली जाने की योजना पर कहा कि सिसौली (मुजफ्फरनगर) में एक मासिक पंचायत है। पंचायत में शामिल होने के बाद आगे की रणनीति तय होगी। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का कहना है कि वह आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करेगा। एसकेएम ने कहा उनकी पंजाब इकाई 18 फरवरी को जालंधर में एक बैठक करेगी और इसके बाद घटनाक्रम की समीक्षा करने और भविष्य की रणनीति के लिए सुझाव देने के खातिर नयी दिल्ली में एनसीसी और आम सभा की बैठकें होंगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान में कहा कि एसकेएम ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। श्रमिकों और अन्य सभी वर्गों के समन्वय के साथ बड़े पैमाने पर आह्वान करके आंदोलन को तेज किया जाएगा।

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