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‘हर कोई चाहता है उसका नाम अखबारों में छपे’, वक्फ कानून पर SC का कड़ा रुख; नई याचिकाएं की खारिज

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर विचार करने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हर कोई अखबारों में अपना नाम देखना चाहता है। अदालत इस मामले पर 20 मई को सुनवाई करेगी। इस सुनवाई में अंतरिम राहत पर भी विचार किया जाएगा। केंद्र सरकार ने कहा है कि अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाएं हमेशा के लिए दायर नहीं की जा सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह टिप्पणी की। अदालत वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाएं हमेशा के लिए दायर नहीं की जा सकतीं। इसका मतलब है कि सरकार चाहती है कि इन याचिकाओं पर जल्द सुनवाई हो।

एक याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्होंने 8 अप्रैल को याचिका दायर की थी। 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा बताई गई कमियों को भी दूर कर दिया था। लेकिन उनकी याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हर कोई चाहता है कि उसका नाम अखबारों में आए।’’

सुप्रीम कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
वकील ने पीठ से आग्रह किया कि उनकी याचिका को लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए। पीठ ने कहा, ‘‘हम इस विषय पर फैसला करेंगे।’’ इसके बाद, पीठ ने इसे खारिज कर दिया। इसी तरह की एक अन्य याचिका सुनवाई के लिए आई, तो पीठ ने कहा, ‘‘खारिज की जाती है।’’ याचिकाकर्ता के वकील ने आग्रह किया कि उन्हें लंबित याचिकाओं में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी जाए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमारे पास पहले से ही बहुत सारे हस्तक्षेपकर्ता हैं।’’ अदालत पहले से ही कई लोगों को मामले में शामिल होने की अनुमति दे चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल को फैसला किया था कि वह कुल याचिकाओं में से केवल पांच की सुनवाई करेगी। अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाएं 15 मई को प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति मसीह की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई थीं। पीठ ने कहा कि वह 20 मई को तीन मुद्दों पर अंतरिम निर्देश पारित करने के लिए दलीलें सुनेगी। ये मुद्दे हैं:

  • अदालतों द्वारा वक्फ घोषित संपत्तियों को गैर अधिसूचित करना। यानी अगर अदालत ने किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया है, तो उसे वापस कैसे लिया जा सकता है।
  • राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषद की संरचना। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पदेन सदस्यों को छोड़कर केवल मुसलमानों को ही इसका कामकाज करना चाहिए।
  • वह प्रावधान जिसके अनुसार जब जिलाधिकारी यह पता लगाने के लिए जांच करेगा कि संपत्ति सरकारी है या नहीं, तो वक्फ संपत्ति को वक्फ नहीं माना जाएगा। अगर जिलाधिकारी को लगता है कि कोई संपत्ति सरकारी है, तो उसे वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा।

सरकार ने संशोधित वक्फ अधिनियम, 2025 का बचाव किया
वहीं केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने संशोधित वक्फ अधिनियम, 2025 का बचाव किया है। मंत्रालय ने 25 अप्रैल को 1,332 पृष्ठों का एक हलफनामा दाखिल किया है। मंत्रालय ने संसद द्वारा बनाए गए कानून पर अदालत द्वारा किसी भी रोक का विरोध किया है। सरकार चाहती है कि अदालत इस कानून पर रोक न लगाए।

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