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Friday, May 1, 2026
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किसानों ने भारत बंद को बताया सफल, जानिए अलग-अलग शहरों में कैसा रहा असर

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नई दिल्ली ,

न्यूनतम सर्मथन मूल्य पर कानून बनाने सहित अपनी कई मांगों को लेकर आज किसान संगठनों ने भारत बंद बुलाया था. किसान संगठनों द्वारा देर शाम जारी किए गए प्रेस रिलीज में किसानों ने शुक्रवार को बुलाए गए भारत बंद को सफल बताया है. किसानों ने ग्रामीण भारत में बंद को व्यापक और सफल बताते हुए कहा है कि उनका यह संघर्ष पूरे भारत में किसानों, श्रमिकों और ग्रामीणों के गुस्से को दर्शाता है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने क्या कहा
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यह बंद लोगों की आजीविका के मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे में वापस लाने में सफल रहा है. साथ ही इससे मजदूर-किसान एकता और मजबूत हुई है. किसान संगठन एसकेएम ने एमएसपी, ऋण माफी, सहित कई मुद्दे पर नीतियों में बदलाव तक आंदोलन तेज करने की बात कही है. अब 18 फरवरी को एसकेएम की पंजाब इकाई की बैठक, और उसके बाद राजधानी दिल्ली में एनसीसी और जीबी की बैठक होगी. आइये जानते हैं कैसा रहा किसानों द्वारा बुलाया गया भारत बंद का देश भर में असर –

ग्रेटर नोएडा के किसानों ने किया पैदल मार्च
भारत बंद को लेकर ग्रेटर नोएडा में किसानों ने पैदल मार्च निकाला. किसानों में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ गुस्सा दिखाई दिया. भारत बंद का समर्थन करते हुए प्रदर्शन में महिलाएं और किसान शामिल रहे. किसानों ने अल्फा वन गोल चक्कर से परी चौक तक पैदल मार्च निकाला था. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बाहरी पुलिस बल मौके पर तैनात रही.

फतेहाबाद में दिखा असर
फतेहाबाद जिले के जाखल और टोहाना क्षेत्र में भारत बंद का असर दिखा. जाखल में जहां एक तरफ पूरा बाजार बंद रहा वहीं दूसरी ओर रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा छाया रहा. किसानों और मजदूरों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले टाउन पार्क चौक के पास धरना दिया.

कानपुर में नहीं दिखा खास असर
कानपुर में भारत बंद का कोई खास असर नहीं दिखा. यूनियन के किसानों ने कुछ इलाकों में नारेबाजी करके आंदोलन का समर्थन किया. भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह के नेतृत्व में किसानों ने नारेबाजी करते हुए किसान आंदोलन का सपोर्ट किया. इसके अलावा शहर में कहीं और किसानों का कोई विरोध प्रदर्शन नजर नहीं आया.

दादरी-दिल्ली रोड पर लगा जाम
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा बुलाए गए भारत बंद में विभिन्न किसान व ट्रेड यूनियनों के अलावा खाप पंचायतों ने बंद के दौरान दादरी-दिल्ली रोड पर मोरवाला टोल को बंद कर जाम लगा दिया. जाम के दौरान जहां वाहनों की लाइनें लग गई. किसानों ने खापों के साथ मिलकर सरकार से किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रोकने व उनकी मांगों को मानने की बात कही. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वो किसानों के पक्ष में बॉर्डर पर भी पहुंचेंगे.

पंजाब के फरीदकोट में NH 54 रहा बंद
पंजाब के फरीदकोट में भारत बंद का मिला जुला असर देखने को मिला. बंद के समर्थन में फरीदकोट में किसान NH 54 रोड जम कर के बैठे रहे. किसानों का यह रोड जाम शाम 4 बजे तक रहा. आपात सेवाओं को छोड़कर बाकी वाहनों के लिए रास्ता बंद रहा.

अंबाला में भी दिखा असर
भारत बंद की दी गयी कॉल अंबाला में काफी असर देखने को मिला. सरकारी कर्मचारियों ने बंद का समर्थन करते हुए प्रदर्शन किया लेकिन बंद में वयापारी संगठन शामिल नही हुए. रोड़वेज के चक्का जाम के चलते यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना पड़ना. इसके अलावा यहां बंद को मिड डे मील व आशा वर्कर्स, PWD कर्मचारी, रोड़वेज यूनियन, पब्लिक हेल्थ, नगर निगम कर्मचारियों सहित कई विभागों का समर्थन मिला. कर्मचारियों ने कहा कि किसानों को उनका हक मिलना चाहिए.

लाल चौक पर भी थी प्रर्दशन की योजना
आंदोलनकारी किसानों की मांगों के समर्थन में किसान ट्रेड यूनियन के नेता और कार्यकर्ता जम्मू कश्मीर के लाल चौक पर प्रर्दशन की योजना बना रहे थे. लेकिन जम्मू कश्मीर पुलिस ने इससे पहले ही 50 ट्रेड यूनियन नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. हिरासत में लिए गए लोग आंदोलनकारी किसानों की मांगों के समर्थन में लाल चौक पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे थे. पुलिस ने किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को रेजीडेंसी रोड पर प्रताप पार्क के पास से उस समय हिरासत में ले लिया, जब वे विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हो रहे थे. हिरासत में लेने के बाद पुलिस उन्हें कोठीबाग पुलिस स्टेशन ले गई.

आपको बता दें कि पंजाब के किसानों ने मंगलवार को ‘दिल्ली चलो’ मार्च शुरू किया था, लेकिन पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बार्डर पर पुलिस ने उन्हें रोका हुआ है. यहीं पर किसानों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति भी बनी हुई है. प्रदर्शनकारी किसानों ने फिलहाल यहीं पर डेरा डाला हुआ है. किसान आंदोलन 2.0 शुक्रवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया है.

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