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1954 से लेकर 2025… जानें कुंभ में कब-कब भगदड़ में कितने श्रद्धालुओं ने गंवाई जान

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नई दिल्ली:

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस के अनुसार अखाड़ा मार्ग भीड़ बढ़ने का कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने बताया कि भीड़ की वजह से बैरिकेड टूट गया। इससे वहां आसपास नीचे सोए श्रद्धालुओं पर अन्य लोग चढ़ गए। हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि महाकुंभ में इस तरह की भगदड़ में लोगों की मौत हुई हो। जानते हैं 1954 से लेकर 2025 में कुंभ मेले में कब-कब भगदड़ में श्रद्धालुओं को जान गंवानी पड़ी।

1954 के कुंभ मेले में 800 लोगों की मौत
आज़ादी के बाद पहली बार कुंभ मेला आयोजित किया गया था। भारत के लिए एक ऐतिहासिक घटना थी, लेकिन इसे एक त्रासदी के रूप में भी याद किया जाता है। 3 फरवरी 1954 को, इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में कुंभ मेले में मौनी अमावस्या के शुभ अवसर पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। उसी समय भगदड़ मच गई। लगभग 800 लोग नदी में डूबकर मर गए।

1986 : हरिद्वार कुंभ में मची भगदड़
1986 में हरिद्वार में कुंभ मेले में एक दुखद भगदड़ मची। इसमें कम से कम 200 लोगों की जान चली गई। यह अराजकता तब फैली जब तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सांसदों के साथ हरिद्वार पहुंचे। जब सुरक्षाकर्मियों ने आम लोगों को नदी के किनारे जाने से रोक दिया, तो भीड़ बेचैन हो गई और बेकाबू हो गई। इससे एक जानलेवा भगदड़ मच गई।

2003: नासिक कुंभ
2003 में महाराष्ट्र के नासिक में भगदड़ मच गई थी। इसमें दर्जनों लोग मारे गए थे। उस समय हजारों तीर्थयात्री कुंभ मेले के दौरान पवित्र स्नान के लिए गोदावरी नदी पर एकत्र हुए थे। भगदड़ में महिलाओं सहित कम से कम 39 लोग मारे गए थे। हादसे में 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।

2013: इलाहाबाद स्टेशन पर भगदड़
10 फरवरी 2013 को कुंभ मेले के दौरान इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर एक फुटब्रिज के ढह जाने से भगदड़ मच गई थी। इससे बड़े पैमाने पर अफरातफरी मच गई थी। इस त्रासदी में 42 लोगों की जान चली गई थी और 45 अन्य घायल हो गए थे।

2025 : महाकुंभ में भीड़ में भगदड़
प्रयागराज में ब्रह्म मुहूर्त से पूर्व प्रातः एक बजे से 2 बजे के बीच मेला क्षेत्र में अखाड़ा मार्ग पर भारी भीड़ का दबाव बना। भीड़ के दबाव के कारण दूसरी ओर के बैरीकेड्स टूट गए। लोग बैरीकेड्स लांघकर दूसरी तरफ आ गए और ब्रह्म मुहूर्त पर स्नान का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं को कुचलना शुरू कर दिया। हादसे में 30 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 90 लोग घायल हो गए।

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