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कार मालिकों के लिए रिश्वतखोरी की राजधानी बन चुका है दिल्ली-एनसीआर? इस सर्वे रिपोर्ट को तो पढ़ लीजिए

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नई दिल्ली

आपको यदि कोई मोटर वाहन होगा तो आप भी इस समस्या से जरूर दो-चार हुए होंगे। जबसे मोटर वाहन कानून के तहत लाल बत्ती जंप करने या दोपहिया वाहन में हेलमेट नहीं लगाने या फिर कार में सीट बेल्ट नहीं लगाने का तगड़ा जुर्माना हो गया है, तब से रिश्वत का बाजार गर्म हो गया है। जिन्हें ट्रेफिक हवलदार पकड़ते हैं, वे कुछ ले-देकर जान छुड़ाने के चक्कर में रहते हैं। एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) देश में रिश्वत की राजधानी के रूप में उभरता दिख रहा है।

चालान से बचने के लिए रिश्वत
डिजिटल-फर्स्ट सर्वे प्रोवाइडर पार्क+ रिसर्च लैब्स ने मंगलवार को एक सर्वे रिपोर्ट प्रकाशित किया। इसमें बताया गया है कि दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर रिश्वतखोरी की घटना बढ़ रही है। इस सर्वे के मुताबिक 64% दोषियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने ट्रैफिक चालान से बचने के लिए रिश्वत दी। इनमें से 42% लोगों ने लंबी कानूनी प्रक्रिया को मुख्य कारण बताया, जबकि 20% ने डर के कारण रिश्वत देने की बात कबूल की। ये चौंकाने वाले आंकड़े एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है कि क्या दिल्ली-एनसीआर भारत की रिश्वत राजधानी बन चुकी है?

दिल्ली-एनसीआर की हालत सबसे खराब
सर्वे में बताया गया है कि दिल्ली-एनसीआर में 30 लाख से अधिक मोटर वाहन पंजीकृत हैं। इस बीच ट्रैफिक जाम, नियमों के उल्लंघन और सड़क पर झगड़ों की घटनाएं आम हो गई हैं। दिल्ली पुलिस को रोजाना वाहन से जुड़े झगड़ों (पार्किंग विवाद, दुर्घटनाएं आदि) की शिकायतों के लिए 200 से अधिक कॉल मिलती हैं। ट्रैफिक नियमों को लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। नए साल 2025 की पूर्व संध्या पर यहां 4,500 से अधिक चालान जारी किए गए (पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार)। अक्टूबर-नवंबर 2024 में दिल्ली पुलिस ने 164 करोड़ रुपये के चालान जारी किए (पीटीआई रिपोर्ट) उन वाहन मालिकों के लिए जिनके पास वैध पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं था।

क्या है कार मालिकों का अनुभव
इसमें बताया गया है कि दिल्ली-एनसीआर में कार मालिकों के लिए ड्राइविंग का अनुभव मध्यम दर्जे का बना हुआ है। इस इलाके में जहां बुनियादी ढांचा सीमित है, वहीं पुलिसिंग असंगत (Sporadic Policing) है और ड्राइविंग शिष्टाचार तो ना के बराबर है। देखा जाए तो यह सर्वे दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक प्रबंधन की गंभीर चुनौतियों को उजागर करता है, जहां ट्रैफिक उल्लंघन, जाम और विवाद कानून व्यवस्था को और जटिल बना देते हैं।

सर्वे की मुख्य बातें
64% ट्रैफिक नियम उल्लंघन करने वालों ने चालान से बचने के लिए रिश्वत देने की बात मानी।
30.84% मामलों में रेड लाइट जंप करना
19.16% मामलों में सीटबेल्ट न पहनना मुख्य अपराध

रिश्वत में कितनी रकम दी जाती है?
इस सर्वे के मुताबिक अधिकतर लोग 500 रुपये या इससे कम रकम पुलिसवालों को रिश्वत के रूप में देते हैं। तभी तो ₹500 से कम की छोटी रिश्वतें कुल मामलों के 69.6% हिस्से में रही। लोग वक्त पड़ने पर ₹1,000 का भी जुर्माना देते हैं। इस रकम के 27.4% मामले दर्ज किए गए, जो बढ़ती रिश्वतखोरी की ओर इशारा करता है। इनमें से 20% लोगों ने डर के कारण रिश्वत देने की बात स्वीकार की।

एक सकारात्मक पहलू यह भी
सर्वे में 31.17% कार मालिकों ने यह भी बताया कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने रिश्वत लेने से इनकार कर दिया और चालान काट दिया। यह सर्वे 600 कार मालिकों पर किया गया था।

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