विशाखापत्तनम/रायपुर। राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) द्वारा संचालित विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र में सोमवार को एक दिल दहला देने वाली भीषण औद्योगिक दुर्घटना घटित हो गई। संयंत्र परिसर के भीतर पिघले हुए इस्पात (स्टील) के रिसाव के बाद लगी भीषण आग की चपेट में आने से आठ श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस घातक हादसे ने भारी इंजीनियरिंग और इस्पात निर्माण संयंत्रों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर चिंताओं को फिर से हवा दे दी है, साथ ही इस्पात मंत्रालय और संयंत्र प्रबंधन के भीतर जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब संयंत्र के भीतर अत्यधिक उच्च तापमान वाले पिघले हुए स्टील को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा था। माना जा रहा है कि परिवहन के दौरान पिघले हुए इस्पात को सहारा देने वाले करछुल (लैडल) के तार अचानक टूट गए, जिससे करछुल एक तरफ झुक गया और उसमें भरा खौलता हुआ तरल धातु जमीन पर फैल गया। खौलते स्टील की तीव्र गर्मी और फैलाव के कारण देखते ही देखते मौके पर भीषण आग लग गई, जिसने आसपास के पूरे हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। इस दौरान वहां काम कर रहे और आसपास फंसे श्रमिक आग और मलबे की जद में आ गए। घटना के तुरंत बाद आपातकालीन बचाव और अग्निशमन दल मौके पर पहुंचे और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू कर घायलों को मलबे से बाहर निकाला। सभी घायल श्रमिकों को तत्काल उपचार के लिए पास के विशेषज्ञ अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस भीषण औद्योगिक त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए मृतक श्रमिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और संयंत्र अधिकारियों को प्रभावित श्रमिकों व उनके परिजनों को हर संभव आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं, साथ ही अस्पताल प्रबंधन को घायलों का सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने को कहा है। मुख्यमंत्री नायडू ने घटना की गंभीरता को देखते हुए इस पर एक विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। संयंत्र प्रबंधन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम द्वारा दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल और उपकरणों के रखरखाव में किसी स्तर पर बड़ी चूक हुई थी।
