हरिद्वार ।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने रेल परिवहन क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बीएचईएल के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा निष्पादित की जा रही प्रतिष्ठित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना के लिए सेमी-हाई-स्पीड अंडरस्लंग ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मरों की आपूर्ति प्रारंभ कर दी गई है। इस अवसर पर बीएचईएल के झांसी प्लांट में एक फ्लैग-ऑफ समारोह आयोजित किया गया। बीएचईएल की निदेशक (औद्योगिक प्रणाली एवं उत्पाद) सुश्री बानी वर्मा तथा निदेशक (इंजीनियरिंग, अनुसंधान एवं विकास) एसएम रामनाथन ने वर्चुअल माध्यम से ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मरों के प्रथम सेट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे पूर्व इसी परियोजना के लिए ट्रैक्शन कन्वर्टरों की आपूर्ति बीएचईएल के बेंगलुरु प्लांट से की जा चुकी है।
यह उपलब्धि सेमी-हाई-स्पीड प्रोपल्शन सेगमेंट में बीएचईएल के रणनीतिक प्रवेश को दर्शाती है। इन प्रणालियों की परिचालन गति 160 किमी प्रति घंटा तक तथा डिजाइन गति 180 किमी प्रति घंटा तक है। ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मरों को वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की अंतिम असेंबली के लिए कोलकाता भेजा जा रहा है। वहीं, इस परियोजना के एक अन्य प्रमुख प्रोपल्शन उपकरण ट्रैक्शन मोटर का विकास और निर्माण बीएचईएल की भोपाल इकाई द्वारा किया गया है। इसी क्रम में बीएचईएल-झांसी ने रेलवे क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति को और सुदृढ़ करते हुए हाल ही में रेल बोर्न मेंटेनेंस व्हीकल्स (आरबीएमवी) के निर्माण का एक महत्वपूर्ण ऑर्डर भी प्राप्त किया है।
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यह परियोजना रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर डोमेन के विशेष रोलिंग स्टॉक सेगमेंट से संबंधित है, जो पारंपरिक रोलिंग स्टॉक से आगे बढ़ते हुए प्लांट की विस्तारित भूमिका को दर्शाती है। आरबीएमवी का डिजाइन और निर्माण बीएचईएल के झांसी प्लांट में किया जाएगा। ये विशेष वाहन रेलवे ट्रैक के निर्माण, निरीक्षण, मरम्मत और रखरखाव में उपयोग किए जाते हैं, जिससे मानव श्रम में कमी, कार्य की परिशुद्धता में वृद्धि तथा रेल यात्रा की सुरक्षा और आराम सुनिश्चित होता है। यह ऑर्डर ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी केंद्र सरकार की पहलों के अनुरूप है।
ऊर्जा एवं बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में देश का अग्रणी सार्वजनिक उपक्रम बीएचईएल, पावर, ट्रांसमिशन, परिवहन, रक्षा और उद्योग क्षेत्रों में अत्याधुनिक स्वदेशी समाधान प्रदान कर रहा है। लोकोमोटिव और डिस्ट्रिब्यूटेड पावर ट्रेनों के लिए जटिल तकनीकों के सफल स्वदेशीकरण के माध्यम से बीएचईएल, परिवहन और रोलिंग स्टॉक क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता को निरंतर सशक्त बना रहा है।
