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हे प्रभु, हे हरिनाथ… अब तो ‘दुनिया की छत’ पर भी लगा दिया जाम, देखें वीडियो

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नई दिल्ली

जहां भी चले जाइए वहां भीड़ ही भीड़…ऐसा कई बार आपने लोगों को कहते हुए सुना होगा या खुद भी महसूस किया होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा था कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भीड़ जमा हो जाएगी। यदि आप सोच रहे थे कि ऐसा नहीं होगा तो आप गलत थे। पिछले कुछ सालों में एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है जिसके चलते वहां भीड़भाड़ और जाम जैसी स्थिति पैदा हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो इस दावे की पुष्टि करते हैं। इन तस्वीरों में सैकड़ों पर्वतारोही एक-दूसरे के पीछे लाइन में खड़े दिख रहे हैं, मानो वे किसी व्यस्त शहर की सड़क पर हों। कुछ लोगों ने इन तस्वीरों को देखकर यह बात कही है कि लोगों ने तो दादर स्टेशन बना दिया। कुछ लोगों का कहना है कि इतनी ऊंचाई और मुश्किल रास्ते पर भी इतनी भारी भीड़ कैसे जमा हो सकती है।

हाल के दिनों में एवरेस्ट पर कई दुर्घटनाएं भी हुई हैं। जिनमें बर्फ के टुकड़े का गिरना और चढ़ाई करने वालों के बीच हाथापाई भी शामिल है। इन दुर्घटनाओं में एक ब्रिटिश पर्वतारोही, एक केन्याई और एक नेपाली पर्वतारोही की जान भी चली गई है। एक गाइड भी लापता है। ब्रिटिश पर्वतारोही डेनियल पैटरसन और उनके नेपाली गाइड पास तेन्जी शेरपा 21 मई को बर्फ गिरने के बाद से लापता हैं। कई वीडियो सामने आए हैं जो दिखाते हैं कि दुर्घटना से पहले ही रास्ते पर बहुत भीड़ थी।

भीड़भाड़ का नतीजा यह हुआ है कि यहां पर्वतारोहियों को डेथ जोन (8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाला क्षेत्र) में ज्यादा समय तक रुकना पड़ता है। कम ऑक्सीजन के कारण, ऊंचाई वाली बीमारी और हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। एवरेस्ट पर कुछ समय पहले हिंसक झड़प हुई थी। यह घटना भीड़भाड़ और बढ़ते तनाव का परिणाम थी। पर्वतारोहियों की बढ़ती संख्या से पहाड़ों को भी नुकसान पहुंच रहा है।

अब ऐसे में सवाल है कि क्या एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए परमिट की संख्या सीमित नहीं की जानी चाहिए। अनुभवहीन पर्वतारोहियों को रोकना नहीं चाहिए। पर्यटन कंपनियों को बेहतर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपायों का पालन नहीं करना चाहिए। साथ ही साथ इस बात को भी समझने की जरूरत है कि एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ना एक सम्मान की बात है, न कि दिखावे का।

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