नई दिल्ली:
रात के तकरीबन 9 बजे का वक्त रहा होगा, जब बृजेश सिंह (काल्पनिक नाम) को कुछ कैश की जरूरत पड़ी। बृजेश ने अपना एटीएम कार्ड लिया और पास के एटीएम बूथ पर रुपये निकालने के लिए पहुंच गए। रुपये निकालने के बाद जैसे ही उन्होंने मशीन से अपना कार्ड निकालना चाहा, तो देखा कि कार्ड फंस गया है। काफी कोशिश करने के बाद भी जब कार्ड नहीं निकला तो बृजेश ने एटीएम बूथ में लिखे कस्टमर केयर नंबर पर फोन किया और अपनी समस्या बताते हुए मदद मांगी।
कस्टमर केयर पर बृजेश को बताया गया कि वह अपना कार्ड मशीन में ही छोड़ दें। बैंक की तरफ से उन्हें जल्दी ही नया कार्ड उनके घर के पते पर भेज दिया जाएगा। बृजेश ने ऐसा ही किया और अपने घर की तरफ निकल पड़े। अभी वह थोड़ी दूर ही पहुंचे होंगे कि उनके मोबाइल पर एटीएम से रुपये निकाले जाने का एक मेसेज आया। बृजेश चौंक गए और दौड़कर उसी एटीएम पर पहुंचे।
एटीएम बूथ पहुंचते ही बृजेश के पैरों तले से जमीन खिसक गई, क्योंकि उनका जो कार्ड मशीन में फंसा हुआ था, वो अब वहां था ही नहीं। दरअसल, बृजेश एटीएम धोखाधड़ी करने वाले फेवीक्विक गैंग का शिकार हो चुके थे। वो गैंग, जो पिछले काफी समय से दिल्ली और फरीदाबाद जैसे एनसीआर के शहरों में लोगों को अपना शिकार बना रहा था।
22 अक्टूबर को पुलिस ने इस गैंग का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, पुलिस को 21 अक्टूबर को इस गैंग के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने एक टीम बनाई और इन्हें पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया। मंगलवार को डीएनडी गोल चक्कर के पास पुलिस ने घेराबंदी कर इस गैंग के तीन लोगों को दबोच लिया। इनके पास से 35 हजार रुपये कैश, एक स्क्रूड्राइवर, एक प्लास, एक चाकू, ब्लैक मार्कर और फेवीक्विक ट्यूब बरामद हुई
कैसे काम करता था फेवीक्विक गैंग
इस गैंग के गुर्गे उन एटीएम बूथ को तलाशते थे, जो रात में खुले रहते और जहां कोई चौकीदार नहीं होता था। गैंग का एक मेंबर अंदर जाता और एटीएम मशीन में कार्ड डालने वाली जगह पर फेविक्विक लगा देता था। इसके बाद वह रुपये निकालने के बहाने से बूथ के अंदर ही रुका रहता। इस दौरान जब कोई एटीएम इस्तेमाल करने वहां आता, तो उसका कार्ड मशीन के स्लॉट में फंस जाता था। इसी बीच गैंग का वही मेंबर चुपके से उसका एटीएम पिन भी देख लेता था।
दीवार पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर
कार्ड फंसने के बाद गैंग का मेंबर पीड़ित शख्स को दीवार पर लिखे कस्टमर केयर नंबर पर फोन करने की सलाह देता। इस नंबर को यही गैंग ब्लैक मार्कर से एटीएम की दीवार पर लिखता था और कॉल करने पर गैंग का एक सदस्य फोन उठाता। इसके बाद पीड़ित से कहा जाता था कि वो अपना एटीएम कार्ड वहीं छोड़ जाए, सुबह बैंक की टीम इसे निकालेगी और जल्द ही उसके पते पर नया एटीएम कार्ड भेज दिया जाएगा।
क्यों पड़ा फेवीक्विक गैंग नाम?
अब पीड़ित जैसे ही एटीएम बूथ से निकलता, गैंग से जुड़े लोग तुरंत उसके एटीएम कार्ड से रुपये निकालकर मौके से फरार हो जाते। फेवीक्विक के जरिए लोगों को लूटने की वजह से ही इस गैंग का नाम ‘फेवीक्विक गैंग’ पड़ा। पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया, उनके नाम राहुल कुमार सिंह, गौरव कुमार और दीपक पटेल हैं। तीनों की उम्र 30 साल से 31 साल के बीच है।
100 से ज्यादा वारदातों को अंजाम
पुलिस के मुताबिक, इस गैंग का सरगना राहुल कुमार सिंह है और वह 2011 से ही ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहा था। इससे पहले उसे पूर्वी दिल्ली के जगतपुरी में गिरफ्तार किया जा चुका है। दिल्ली के अलावा उसने गुजरात, दमन और यूपी में भी ठगी की ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपी दिल्ली एनसीआर में अभी तक ऐसी 100 से ज्यादा वारदात कर चुके हैं।
