18.5 C
London
Wednesday, March 18, 2026
Homeराष्ट्रीयलोगों की तड़प-तड़प कर गई थी जान.. आज भी कलेजा चीर देता...

लोगों की तड़प-तड़प कर गई थी जान.. आज भी कलेजा चीर देता है चेर्नोबल परमाणु हादसा

Published on

नई दिल्ली

भारत के साथ हालिया सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान में किसी भी परमाणु केंद्र से रेडिएशन रिसाव नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का यह बयान सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन दावों के बीच आया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के परमाणु अड्डों को निशाना बनाया था।

हालांकि परमाणु केंद्र से रेडिएशन रिसाव के झूठे दावे को पाकिस्तानी मीडिया के प्रोपगेंडा के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान इसके जरिए दुनिया की सहानुभूति लेने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान को अतीत के पन्नों को पलटकर देखना चाहिए कि परमाणु केंद्र से रेडिएशन का रिसाव कोई आम बात नहीं है, बल्कि विनाश की पहली सीढ़ी है। चेर्नोबल हादसा आज दुनिया के लिए एक बड़ा सबक है। यह हादसा दुनिया के ताकतवर देशों के भी रोंगटे खड़े कर देता है।

दिल दहलाने वाला चेर्नोबल हादसा
26 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत संघ के चेर्नोबल के न्यूक्लियर पावर प्लांट में विनाशकारी धमाका हुआ था। यह हादसा इतना भयानक था कि चंद घंटे में प्लांट में काम करने वाले 40 कर्मचारियों की मौत हो गई। इसके अलावा सैकड़ों कर्मचारी न्यूक्लियर रेडिएशन की वजह से बुरी तरह से जल गए। शुरू में तो सोवियत संघ ने इस हादसे को छिपाने की पूरी कोशिश की। मीडिया कवरेज से लेकर लोगों की आवाजाही को तुरंत रोक दिया गया था। लेकिन, स्वीडन की एक सरकारी रिपोर्ट के बाद तत्कालीन सोवियत संघ ने इस हादसे को स्वीकार कर लिया था। विभाजन के बाद चेरनोबिल शहर यूक्रेन के हिस्से में आ गया।

वैज्ञानिकों का ये प्रयोग पड़ गया भारी
26 अप्रैल को दुर्घटना वाले दिन न्यूक्लियर पावर प्लांट में एक टेस्ट किया जाना था। इस दौरान वैज्ञानिक यह जांच करना चाहते थे कि क्या बिजली सप्लाई बंद होने की स्थित में रिएक्टर के बाकी उपकरण काम करते हैं कि नहीं। वो यह भी पता लगाना चाहते थे कि इस स्थिति में न्यूक्लियर टरबाइन कितनी देर तक घूमते रहेंगे और बिजली सप्लाई को बनाए रखेंगे। इस बिजली की मदद से रिएक्टर को ठंडा रखने वाले कूलिंग पंपों की बिजली सप्लाई की वास्तविकता का भी अध्ययन किया जाना था।

वैज्ञानिकों से कहां हुई चूक?
25 अप्रैल की रात करीब 1.30 बजे टरबाइन को कंट्रोल करने वाले वॉल्ब को हटा दिया गया। उसके बाद रिऐक्टर को आपातकालीन स्थिति में ठंडा रखने वाले सिस्टम को भी बंद कर दिया गया।
रिऐक्टर में एक ऑटोमेटिक स्विच लगा होता है जो किसी तरह की आपातकालीन स्थिति में नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया को रोक देता है। वैज्ञानिकों ने उस स्विच को भी ऑफ कर दिया।
अचानक रिऐक्टर के अंदर नाभिकीय विखंडन की प्रक्रिया अनियंत्रित हो गई। तेजी से भाप बनने लगा जिससे रिऐक्टर के अंदर दबाव बढ़ गया।
थोड़े ही समय के अंदर दो शक्तिशाली विस्फोट हुआ जिससे चारों तरफ रेडियोएक्टिव पदार्थ फैल गया।

इतिहास की भयावह परमाणु दुर्घटना
चेर्नोबिल को लागत और हताहतों के मामले में आज तक का सबसे भयानक परमाणु दुर्घटना माना जाता है। यह उन मात्र दो दुर्घटनाओं में से एक है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय परमाणु घटना स्केल के सातवें स्थान पर रैंक दी गई है, जो सबसे ज्यादा है। वहीं, दूसरी दुर्घटना जापान के फुकुशीमा डाईची परमाणु दुर्घटना है। हादसे के बाद पर्यावरण को विकिरण से मुक्त करने और हादसे को बिगड़ने से रोकने के लिए कुल करीब 500 अरब रुपये खर्च हुए थे। इसी तरह की एक दुर्घटना भोपाल में हुई थी, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे।

परमाणु बम से 400 गुना ज्यादा असर
धमाके के बाद न्यूक्लियर प्लांट में अफरा-तफरी मच गई और रिएक्टर को बंद करने की कोशिशों के बीच ही रिएक्टर में जोरदार धमाका हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि रिएक्टर की छत उड़ गई। उस हादसे में वहां कार्यरत 40 लोगों की मौत हो गई। इस धमाके से निकला रेडियोएक्टिव रेडिएशन हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए परमाणु बम से भी 400 गुना ज्यादा था। अगले कई दिनों तक चेर्नोबिल पावर प्लांट से रेडिएशन निकलता रहा, जो हवा के साथ उत्तरी और पूर्वी यूरोप में फैल गया। रेडिएशन फैलने से रूस, यूक्रेन, बेलारूस के 50 लाख लोग इसकी चपेट में आ गए। रेडिएशन फैलने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से 4 हजार लोगों की मौत हो गई।

Latest articles

इंटक में  तौहीद सिद्दीकी को मिली अहम जिम्मेदारी

भोपाल मप्र नगरीय निकाय श्रमिक कर्मचारी संघ (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष अशोक गोस्वामी द्वारा संगठन...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी से की मुलाकात, राजस्थान में अक्षय ऊर्जा के विस्तार पर हुई चर्चा

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय...

भेल के निदेशक कृष्ण कुमार ठाकुर अब एनएमडीसी के बोर्ड में शामिल, भारत सरकार ने जारी किया आदेश,5 साल के लिए निदेशक (कार्मिक) के...

नई दिल्ली।भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड  के अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी और वर्तमान निदेशक (एचआर) कृष्ण...

महर्षि गौतम भवन में जुटेगा समाज, 19 मार्च को होगा भव्य समारोह

भोपाल राजधानी के महर्षि गौतम भवन में आगामी 19 मार्च 2026 को एक भव्य और...

More like this

भेल के निदेशक कृष्ण कुमार ठाकुर अब एनएमडीसी के बोर्ड में शामिल, भारत सरकार ने जारी किया आदेश,5 साल के लिए निदेशक (कार्मिक) के...

नई दिल्ली।भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड  के अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी और वर्तमान निदेशक (एचआर) कृष्ण...

पाकिस्तानी एयरफोर्स की काबुल में भीषण बमबारी, अस्पताल पर हमले में 400 की मौत; भारत ने बताया ‘जनसंहार’

नई दिल्ली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर चल रहा तनाव अब एक भीषण...

के. अशोक बनें बीएचईएल त्रिची के कार्यपालक निदेशक (ओएसडी)

नई दिल्ली। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड  कॉर्पोरेट कार्यालय द्वारा प्रशासनिक कसावट लाने के लिये बेंगलुरू...