20.5 C
London
Thursday, June 18, 2026
Homeराष्ट्रीयराष्ट्रपति कोविंद का विदाई भाषण, बोले- बस पूर्वजों के पदचिह्नों पर चलना...

राष्ट्रपति कोविंद का विदाई भाषण, बोले- बस पूर्वजों के पदचिह्नों पर चलना है

Published on

नई दिल्ली,

निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कार्यकाल का आज आखिरी दिन है. इस मौके पर वे देश को संबोधित कर रहे हैं. कोविंद ने कहा कि आज से पांच साल पहले आप सबने मुझ पर अपार भरोसा जताया था और अपने निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से मुझे भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना था. मैं आप सभी देशवासियों के प्रति तथा आपके जन-प्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं.

उन्होंने आगे कहा कि कानपुर देहात जिले के परौंख गांव के अति साधारण परिवार में पला-बढ़ा राम नाथ कोविंद आज आप सभी देशवासियों को संबोधित कर रहा है, इसके लिए मैं अपने देश की जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था की शक्ति को शत-शत नमन करता हूं. राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान अपने पैतृक गांव का दौरा करना और अपने कानपुर के विद्यालय में वयोवृद्ध शिक्षकों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेना मेरे जीवन के सबसे यादगार पलों में हमेशा शामिल रहेंगे.उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना भारतीय संस्कृति की विशेषता है. मैं युवा पीढ़ी से यह अनुरोध करूंगा कि अपने गांव या नगर तथा अपने विद्यालयों तथा शिक्षकों से जुड़े रहने की इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहें.

आजादी के नायकों को किया जा रहा है याद
19वीं शताब्दी के दौरान पूरे देश में पराधीनता के विरुद्ध अनेक विद्रोह हुए. देशवासियों में नयी आशा का संचार करने वाले ऐसे विद्रोहों के अधिकांश नायकों के नाम भुला दिए गए थे. अब उनकी वीर-गाथाओं को आदर सहित याद किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि तिलक और गोखले से लेकर भगत सिंह और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस तक, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर सरोजिनी नायडू और कमलादेवी चट्टोपाध्याय तक – ऐसी अनेक विभूतियों का केवल एक ही लक्ष्य के लिए तत्पर होना, मानवता के इतिहास में अन्यत्र नहीं देखा गया है.

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए हमारा देश सक्षम हो रहा है, यह मेरा दृढ़ विश्वास है. हमारे पूर्वजों और हमारे आधुनिक राष्ट्र-निर्माताओं ने अपने कठिन परिश्रम और सेवा भावना के द्वारा न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्शों को चरितार्थ किया था. हमें केवल उनके पदचिह्नों पर चलना है और आगे बढ़ते रहना है. संविधान सभा में पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने वाले अनेक महानुभावों में हंसाबेन मेहता, दुर्गाबाई देशमुख, राजकुमारी अमृत कौर तथा सुचेता कृपलानी सहित 15 महिलाएं भी शामिल थीं. संविधान सभा के सदस्यों के अमूल्य योगदान से निर्मित भारत का संविधान, हमारा प्रकाश-स्तम्भ रहा है.

मैं कार्यकाल में बेहद सचेत रहा हूं
उन्होंने आगे कहा कि अपने कार्यकाल के पांच वर्षों के दौरान मैंने अपनी पूरी योग्यता से अपने दायित्वों का निर्वहन किया है. मैं डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, डॉक्टर एस. राधाकृष्णन और डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जैसी महान विभूतियों का उत्तराधिकारी होने के नाते बहुत सचेत रहा हूं. जलवायु परिवर्तन का संकट हमारी धरती के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है. हमें अपने बच्चों की खातिर अपने पर्यावरण, अपनी जमीन, हवा और पानी का संरक्षण करना है. मैं सभी देशवासियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं. भारत माता को सादर नमन करते हुए मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करता हूं.

Latest articles

मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: छह आईएएस अधिकारियों के तबादले, कई अफसरों को मिली नई जिम्मेदारी

भोपाल। मप्र शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से भारतीय प्रशासनिक...

राजस्थान में सुशासन की नई मिसाल: भजनलाल सरकार के ‘ग्रामीण सेवा शिविरों’ से 5.76 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा 'प्रशासन को गांव-गांव और...

पंजाब में सीएम भगवंत मान ने 523 युवाओं को बांटे नियुक्ति पत्र, NEET परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना

पंजाब। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को मोहाली के विकास भवन...

More like this

उद्धव की पार्टी टूटी, 9 में से 6 सांसद बागी; 4 साल पहले शिंदे 39 विधायकों के साथ अलग हुए थे

नई दिल्ली/मुंबई1 महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6...

नीट री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, टेलीग्राम पर लगाई अस्थायी रोक, 22 जून तक पाबंदियां

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी रूप से रोक लगाने...