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दिल थाम के बैठिए, 6,048 की स्पीड.. चांद पर उतरने से पहले ऐसे होंगे विक्रम के वे 20 मिनट

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नई दिल्ली

चंद्रयान की लैंडिंग का वक्त करीब आ चुका है। इसरो अपने मिशन के लिए अंतिम तैयारियों में जुटा हुआ है। लैंडर विक्रम के चांद की सतह पर लैंडिंग का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। 23 तारीख को घड़ी जैसे ही 6 बजकर 4 मिनट बजाएगी, अपना विक्रम चांद की सतह को चूम लेगा। लेकिन इससे पहले आखिरी 20 मिनट का वक्त काफी जोखिम भरा और सांसें थामने वाला होता है। ISRO चीफ एस सोमनाथ ने कहा कि उनके वैज्ञानिकों का जोश हाई और हम सभी उत्साह में हैं। आइए आपको बताते हैं कि अंतिम 20 मिनट में लैंडिंग से पहले क्या-क्या होगा।

कमांड डिसेंट
बेंगलुरु में मिशन ऑपरेशन सेंटर (MOX) में बैठे वैज्ञानिकों का कमांड मिलते ही विक्रम लैंडर चांद की सतह की तरफ बढ़ना शुरू करेगा। लैंडर चांद की सतह से 25 किलोमीटर दूर से नीचे आना शुरू होगा।

पावर्ड डिसेंट वेलोसिटी
जैसे ही लैंडर विक्रम को आदेश मिलेगा वह 1.68 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चांद की सतह पर बढ़ना शुरू करेगा। अगर इस रफ्तार को प्रतिघंटे की रफ्तार में बदलते हैं तो यह 6,048 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति होगी। जो विमान की गति से 10 गुना ज्यादा होगी।

रफ ब्रेकिंग फेज
इस दौरान ही लैंडर विक्रम के सारे इंजन स्टार्ट रहेंगे और उसकी गति को धीमा करेंगे। चांद की सतह पर विक्रम हॉरिजांटल उतरेगा। इस चरण को रफ ब्रेकिंग फेज कहते हैं , जो करीब 11 मिनट तक चलता है।

ट्रांजिशन टू फाइन ब्रेकिंग
ये सबसे कठिन चरण होता है। इस दौरान लैंडर विक्रम अपने तकनीकी यंत्रों के जरिए हर आदेश का पालन करते हुए सीधे चांद की सतह की तरफ बढ़ेगा। इस दौरान वह हॉरिजांटल से लंबवत होगा, ये काफी नाजुक चरण होता है। चंद्रयान-2 मिशन के दौरान भी इसी फेज के दौरान विक्रम लैंडर क्रैश कर गया था।

सतह के ऊपर चक्कर
चांद की सतह से 800 मीटर की ऊंचाई पर होरिजोंटल और वर्टिकल विलोसिटीज जोरी पर पहुंच जाएगी। इससे विक्रम लैंडर ऊपर चक्कर लगाते हुए सतह पर अपने लिए सुरक्षित ठिकाना खोजेगा।

चांद की सतह से कुछ दूर लेगा तस्वीरें
लैंडर विक्रम उतरते हुए चांद की सतह के करीब पहुंचेगा और यह चांद की सतह से 150 मीटर ऊपर आकर थोड़ा रुकेगा। इस दौरान वह चांद की सतह का तस्वीरें लेगा ताकि किसी प्रकार के खतरे से बचा जा सके और चांद पर उतरने के लिए सही जगह की तलाश पूरी हो जाए।

फाइनल टचडाउन
सबकुछ जांचने के बाद लैंडर विक्रम चांद पर उतरने के लिए फाइनल टचडाउन की तैयारी शुरू करेगा। चंद्रयान मिशन का पूरा क्लाइमेक्स इन्हीं कुछ मिनटों पर टिका होगा। लैंडिंग के लिए अपने दो इंजनों के जरिए लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा। लैंडर के बेहद मजबूत पैर 3 मीटर प्रति सेकेंड (करीब 10.8 किलोमीटर प्रतिघंटे) के प्रभाव को सहने लायक बना होता है। यानी जो दबाव चांद के सतह पर उतरने के दौरान पड़ेगा, लैंडर के पैर उसे बड़े आराम से बर्दाश्त कर लेगा।

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