नई दिल्ली ,
पंजाब एवं हरियाणा के किसानों के दिल्ली कूच के बीच राष्ट्रीय राजधानी में कई जगहों पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो गई है. कई जगहों पर भारी जाम के कारण लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसी भीड़ और ट्रैफिक की धीमी रफ्तार के शिकार उत्तराखंड के अरुण सिंह भी हुए जो अपने बीमार पिता से मिलने अस्पताल जा रहे थे. लेकिन, गाजीपुर सीमा पर भारी जाम में घंटों फंसे रहने के कारण वो असहाय महसूस करने लगे.अरुण सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वो अपने 78 वर्षीय पिता से मिलने के लिए उत्तराखंड से आए, जो लोक नायक अस्पताल में भर्ती हैं और वो अपने परिवार के साथ सुबह 11 बजे से बॉर्डर पर फंसे रहे.
अरुण की तरह सैकड़ों यात्री आज गाजीपुर सीमा पर फंसे रहे, जिसे प्रदर्शनकारी किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए कंटीले तारों, लोहे की कीलों, और रेत से भरे डंपरों से बंद कर दिया है. सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को हो रही है क्योंकि उनके बच्चे भोजन और पानी के बगैर बेचैन रहे. इसके अलावा महिलाओं को ट्रैफिक के बीच सार्वजनिक शौचालय न मिलने या ढूंढने में कठिनाई के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा बॉर्डर पर कई ऐसे यात्री भी मिले जो अपनी उड़ान छूटने की चिंता के कारण काफी तनाव में नजर आए.
गाजीपुर बॉर्डर पर जाम के कारण करीब दो किलोमीटर तक गाड़ियों की कतार लग गई थी. सर्विस लेन को कंटीले तारों और बड़े वाहनों द्वारा रोक दिए जाने के कारण वो आगे नहीं बढ़ पा रहे थे. गाजीपुर बॉर्डर उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली गाड़ियों के लिए एक रास्ता है जिसके जरिए आसानी से राज्य में दाखिल हुआ जा सकता है. ये सड़क दिल्ली को बरेली, मेरठ, मुज़फ्फरनगर, ऋषिकेश, देहरादून, मसूरी, मुरादाबाद और नैनीताल से जोड़ती हैं.
कई मांगों को लेकर केंद्रीय मंत्रियों की एक टीम के साथ हुई बैठक में कोई समाधान नहीं निकलने के बाद किसानों ने दिल्ली की ओर बढ़ने का फैसला किया ताकि केंद्र पर दबाव बनाया जा सके.
