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G-20 समिट की सबसे बड़ी चुनौती! भारत के लिए बाधा बन रहा है रूस-चीन का रवैया

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नई दिल्ली,

जी20 शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले तक यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नेताओं के घोषणा पत्र में यूक्रेन संकट का जिक्र होगा या नही. चीन इस विवादास्पद मुद्दे के साथ- साथ जलवायु परिवर्तन सहित कुछ अन्य प्रस्तावों पर आम सहमति तक पहुंचने में मुख्य बाधा बनकर उभरता दिख रहा है.

आम सहमति बनाने के प्रयास जारी
कई सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि विवादास्पद मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है और जी20 शेरपा इसका सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के लिए गहन बातचीत कर रहे हैं.उन्होंने कहा कि सभी पेचीदा मुद्दों पर बातचीत जारी है और सकारात्मक नतीजे आने की उम्मीद है.दो सूत्रों ने बताया कि जी-7 देश यूक्रेन युद्ध के संदर्भ के बिना किसी भी नेता की घोषणा से सहमत नहीं हैं, साथ ही अन्य पेचीदा मुद्दे भी इसमें शामिल हैं.

पीछे हटे रूस और चीन
जी20 आम सहमति के सिद्धांत के तहत काम करता है और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि आम राय के अभाव के कारण शिखर सम्मेलन संयुक्त नेताओं की घोषणा के बिना ही समाप्त हो सकता है. रूस और चीन दोनों पिछले साल बाली घोषणा में यूक्रेन संघर्ष पर दो पैराग्राफ जारी करने पर सहमत हुए थे, लेकिन इस साल वे इससे पीछे हट गए, जिससे भारत के लिए मुश्किलें पैदा हो गईं हैं.

वित्त और विदेश मंत्रियों सहित भारत की जी20 की अध्यक्षता में आयोजित लगभग सभी प्रमुख बैठकें, यूक्रेन संघर्ष से संबंधित किसी भी विषय पर रूस और चीन के विरोध के कारण आम सहमति वाले दस्तावेज जारी नहीं सका था.

भारत को है संयुक्त बयान जारी होने की उम्मीद
भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा कि नई दिल्ली के नेताओं की घोषणा वैश्विक दक्षिण और विकासशील देशों की आवाज को प्रतिबिंबित करेगी. उन्होंने कहा, ‘हमारे नई दिल्ली के नेताओं की घोषणा लगभग तैयार है, मैं इस पर ध्यान नहीं देना चाहूंगा क्योंकि शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं को इस घोषणा की सिफारिश की जाएगी और नेता इसे स्वीकार करेंगे. नेताओं द्वारा इसे स्वीकार किए जाने के बाद ही हम वास्तविक उपलब्धियों के बारे में बता सकेंगे.

विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने नई दिल्ली में यूक्रेन संघर्ष की संभावना पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘भारत की उम्मीद है कि सभी जी20 सदस्य आम सहमति की ओर बढ़ेंगे और हमें बयान की घोषणा पर आम सहमति की उम्मीद है.’

ईयू ने किया भारत का समर्थन
इस बीच, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) आम सहमति से घोषणापत्र को अंतिम रूप देने के भारत के प्रयासों का समर्थन करता है, लेकिन यूरोपीय संघ रूस की आक्रामकता के सामने यूक्रेन का समर्थन करने के लिए दृढ़ और एकजुट है.

यूक्रेन संकट के कारण नेताओं के घोषणापत्र में रुकावट आने की आशंका के बारे में पूछे जाने पर मिशेल ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि यह संभव है या नहीं, अंतिम विज्ञप्ति पर सहमति बनेगी, हम देखेंगे. लेकिन हम अपने सिद्धांतों की रक्षा करेंगे और भारत द्वारा किए गए प्रयासों का भी समर्थन करेंगे.’

जी 20 में शामिल हैं ये देश
G20 सदस्य देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 85 प्रतिशत, वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत से अधिक और विश्व जनसंख्या का लगभग दो-तिहाई प्रतिनिधित्व करते हैं. समूह में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूके, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं.

जी 20 का गठन 1999 में हुआ था. तब G-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों का संगठन हुआ करता था. दरअसल, 1997-98 में गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हुआ था. पूर्वी एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाएं ढह गई थीं. इसलिए इसका गठन किया गया. 2007-2008 में आई मंदी के बाद इसे शीर्ष नेताओं के संगठन में तब्दील कर दिया गया. 2009 और 2010 में साल में दो बार G-20 समिट का आयोजन होता था. 2011 के बाद से ये साल में एक बार होता है.

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