नई दिल्ली
मॉब लिंचिंग का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को लताड़ लगाई है। दरअसल याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि मॉब लिंचिंग के शिकार हुए अल्पसंख्यकों के पीड़ितों की आर्थिक मदद की जाए और गोरक्षकों पर कार्रवाई की जाए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए आज अदालत ने याचिकाकर्ताओं को साल 2022 में उदयपुर के दर्जी कन्हैया कुमार की हत्या की याद दिलाई और कहा कि आप लोगों को इस तरह के मामले में सिलेक्टिव नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की पीठ यमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने सुनवाई के बीच में ही याचिकाकर्ता के वकीलों से पूछा कि कन्हैया लाल के मामले में आप लोगों को का क्या कहना है?
अदालत ने पूछा कि राजस्थान के उस दर्जी कन्हैया लाल के बारे में क्या, जिसकी पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी? कोर्ट के सवाल पर याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील निजाम पाशा ने स्वीकार किया कि इसका उल्लेख नहीं किया गया था। जिस पर अदालत ने कहा कि जब सभी राज्य मौजूद हों तो आप सिलेक्टिव नहीं हो सकते।
‘आखिर कोई इतना सिलेक्टिव कैसे हो सकता है?’
इस मामले पर वरिष्ठ वकील अर्चना पाठक ने कहा कि यह केवल मुस्लिमों की लिंचिंग के बारे में है आखिर कोई इतना सिलेक्टिव कैसे हो सकता है? एक राष्ट्र को सभी धर्मों के लोगों की रक्षा करनी चाहिए। जिस पर वकील पाशा ने कहा कि केवल मुस्लिमों की लिंचिंग हो रही हैं। जिसपर कोर्ट ने कहा कि आपको ये पहले सुनिश्चित करना चाहिए कि याचिका सेलेक्टिव न हो। इसके साथ ही वकील पाशा को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि आपको इस बात पर गंभीर रहना चाहिए कि आप कोर्ट के सामने क्या पेश कर रहे हैं। बता दें कि आज सुनवाई के बाद कोर्ट इस मामले को 7 जुलाई तक के लिए पोस्टपोन कर दिया है।
क्या था दर्जी कन्हैया लाल का मामला
उदयपुर के दर्जी कन्हैया ने साल 2022 में बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयान के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था। जिसके बाद कन्हैया कुमार की बड़ी बेरहमी से उनके ही दुकान में गला काटकर हत्या कर दी गई थी। हत्यारों ने हत्या का वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किया था।
