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Sunday, May 3, 2026
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ये आंकड़े बताते हैं कि क्यों दुनिया में कोई और चुनाव भारत की बराबरी नहीं कर सकता

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नई दिल्‍ली:

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए इलेक्‍शन कमीशन (ECI) ने कमर कस ली है। उसने अपनी तैयारियों का जायजा दिया है। जो आंकड़े ECI ने दिए हैं उससे पता चलता है कि क्‍यों दुनिया में कोई और चुनाव भारत की बराबरी नहीं कर सकता है। भारतीय चुनाव आयोग ने बताया है कि आने वाले चुनाव में लगभग 96 करोड़ वोटर मतदान के लिए एलिजिबल होंगे। इसके लिए 12 लाख मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। ढेड़ करोड़ कर्मी इन सभी केंद्रों पर चुनाव कराने के लिए तैनात होंगे। ईसीआई ने कहा कि 96 करोड़ पात्र मतदाताओं में से 47 करोड़ महिलाएं हैं। वहीं, पुरुषों की संख्‍या 48.99 करोड़ है। 48 हजार को थर्ड जेंडर के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 2019 के मुकाबले वोटरों की संख्‍या में 5.3 फीसदी की बढ़ातरी हुई है। पिछले लोकसभा चुनाव में कुल पात्र मतदाताओं की संख्‍या 91.2 करोड़ थी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

कहीं नहीं होता इतना बड़ा चुनाव
ECI के मुताबिक, कुल पात्र मतदाताओं में लगभग 1 करोड़ 73 लाख 18 से 19 साल के हैं। 81 लाख दिव्‍यांग मतदाता हैं। 1 करोड़ 75 लाख वोटर 80 साल या उससे अधिक आयु के हैं। 80 साल से अधिक आयु के 1 करोड़ 75 लाख मतदाताओं में से लगभग 2 लाख वोटर 100 साल से अधिक आयु के हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने भरोसा दिया है कि 2024 और उसके बाद मतदान में सुखद अनुभव देने के लिए ECI प्रतिबद्ध है। चुनाव प्रचार के दौरान वह एक समान अवसर प्रदान करने के लिए भी कमिटेड है। दुनिया में किसी अन्य जगह पर इतने बड़े पैमाने पर वोटरों और लॉजिस्टिक्‍स का दूसरा उदाहरण नहीं मिलता है। यह ब्‍योरा ईसीआई की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिए 14वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर द‍िया गया।

शुरू से मह‍िलाओं की भागीदारी की गई सुनिश्चित
कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीआर आंबेडकर को इस बात का श्रेय दिया कि उन्होंने शुरू से ही मतदान में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा, ‘आंबेडकर ने 1928 में ही महिलाओं के वोट देने के अधिकार का मुद्दा उठाया था।’ ईसीआई ने मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी का भी जिक्र किया।

चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे ने कहा कि पिछले कुछ सालों में काफी कुछ किया गया है। 1952 में 17.32 करोड़ मतदाता थे। आज यह आंकड़ा 96 करोड़ पर पहुंच चुका है। इनमें 47 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। मतदान प्रतिशत पहले आम चुनाव में 45% से बढ़कर पिछले आम चुनाव में 67% हो गया है। इन सभी के बावजूद 30 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जो मतदान नहीं करते हैं। जहां तक मतदान प्रतिशत बढ़ाने की बात है तो शहरी लोगों की दिलचस्‍पी में कमी, युवा उदासीनता और प्रवासी श्रमिक बड़ी चुनौतियां हैं। इन तीनों मोर्चों पर ईसीआई टारगेट कर रहा है।

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