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सोचिए कि आप अपनी… कर्नल सोफिया पर टिप्पणी करने वाले मंत्री की माफी को क्या कहकर SC ने नकारा

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नई दिल्ली:

कर्नल सोफिया कुरैशी पर बीजेपी नेता व मंत्री कुंवर विजय शाह की टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया कि वे मंगलवार सुबह 10 बजे तक SIT का गठन करें। इसकी अध्यक्षता एक आईजी स्तर के अधिकारी करेंगे और दोनों अन्य सदस्य भी एसपी या उससे ऊपर के रैंक के होंगे। सोमवार सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान विजय शाह की टिप्पणी को घटिया और शर्मनाक करार दिया और उनकी सार्वजनिक माफी को अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक विशेष जांच दल (SIT), जिसमें मध्य प्रदेश राज्य से बाहर के तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी होंगे, भाजपा मंत्री कुवंर विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई टिप्पणी के संबंध में दर्ज एफआईआर की जांच करेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इनमें से एक अधिकारी महिला होनी चाहिए। कोर्ट ने साथ ही विजय शाह की गिरफ्तारी पर रोक लगाई, जो कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई एफआईआर के तहत की गई थी। लेकिन इस रोक की शर्त यह रखी गई है कि शाह जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे और उपस्थित रहेंगे। हालांकि पीठ ने यह स्पष्ट किया कि वह जांच की निगरानी नहीं करना चाहती, लेकिन उसने SIT से मामले की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 28 मई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि आप (याची मंत्री) सोचिए कि आप अपनी साख कैसे बहाल करेंगे। पूरा देश आपकी टिप्पणी से शर्मिंदा है। यह एक ऐसा देश हैं जो कानून के शासन में विश्वास रखता है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ कर रही थी। यह सुनवाई दो याचिकाओं पर हो रही थी पहली याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश को चुनौती देने के लिए थी, जिसमें शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को कथित तौर पर आतंकवादियों की बहन कहा था। दूसरी याचिका 15 मई के आदेश के खिलाफ थी, जिसमें हाईकोर्ट ने एफआईआर की भाषा और गम्भीरता पर असंतोष व्यक्त करते हुए खुद जांच की निगरानी की बात कही थी।

शुरुआत में, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने कहा कि शाह ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह कैसी माफी है? कभी-कभी लोग माफी मांगकर कानूनी ज़िम्मेदारी से बचना चाहते हैं। कभी मगरमच्छ के आंसू होते हैं। आपकी माफी किस श्रेणी में आती है? उन्होंने आगे कहा कि आपने जो अपमानजनक टिप्पणी की, वह पूरी तरह से असंवेदनशील थी। आपको ईमानदारी से क्षमा मांगने से किसने रोका? हमें आपकी माफ़ी की कोई ज़रूरत नहीं है। हम जानते हैं कि क़ानून के अनुसार कैसे निपटना है।

अदालत ने आगे कहा कि आप एक पब्लिक फिगर हैं, अनुभवी राजनेता हैं। आपको बोलते समय अपने शब्दों को तौलना चाहिए। मीडिया ने आपकी पूरी वीडियो की गहराई में नहीं देखा। आप अपशब्द कहने की कगार पर थे पर किसी वजह से आपने खुद को रोका। यह सशस्त्र बलों से जुड़ा अहम मुद्दा है। हमें ज़िम्मेदारी से पेश आना चाहिए। इसके बाद पीठ ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाया और कहा कि जब हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा और आपकी एफआईआर को दोबारा लिखना पड़ा, तब आपने क्या किया? क्या यह जांचा गया कि कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं? लोगों को उम्मीद होती है कि राज्य निष्पक्ष कार्रवाई करेगा। बेंच ने आदेश दिया कि SIT मध्य प्रदेश के बाहर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की होनी चाहिए और यद्यपि कोर्ट इसकी निगरानी नहीं करेगा, लेकिन वह ‘करीबी नजर’ बनाए रखेगा।

क्या है पूरा मामला
कर्नल सोफिया कुरैशी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की मुख्य चेहरा बन गई थीं जब उन्होंने भारतीय वायुसेना की पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के बारे में प्रेस को जानकारी दी थी। लेकिन विजय शाह ने एक सार्वजनिक सभा में कहा था कि जिन्होंने हमारी बेटियों का सिंदूर उजाड़ा हमने उन्हीं की बहन को भेजकर उनकी ऐसी की तैसी करवा दी। 14 मई को हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शाह की इस टिप्पणी को अपमानजनक, खतरनाक और गटर की भाषा करार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह न केवल संबंधित अधिकारी, बल्कि पूरे सशस्त्र बल का अपमान है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि ये टिप्पणियां भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ हैं। कोर्ट ने कहा कि यह धारणा उत्पन्न करने की प्रवृत्ति है कि भारत के लिए निस्वार्थ सेवा करने के बावजूद, कोई व्यक्ति केवल अपने धर्म के कारण अपमानित किया जा सकता है।

मध्य प्रदेश के डीजीपी को उसी शाम तक एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया, और अनुपालन न होने पर अवमानना की चेतावनी दी गई। इसके बाद शाह पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 152, 196(1)(b), और 197(1)(c) के तहत मामला दर्ज किया गया। धारा 152: देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्यों पर आजीवन कारावास तक की सजा। धारा 196(1)(b): धार्मिक, नस्लीय या क्षेत्रीय समूहों के बीच सौहार्द बिगाड़ने वाले कार्य। धारा 197(1)(c): राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध कार्य। 14 मई की रात 9:34 बजे शाह ने अपने आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट कर सार्वजनिक माफी मांगी थी। उन्होंने कर्नल कुरैशी को राष्ट्र की बहन कहा था। मामले में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर शाह ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार लगाई गई।

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