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Sunday, June 7, 2026
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क्या दिल्ली की वोटर लिस्ट में काटे या जोड़े गए थे नाम? चुनाव आयोग ने जानें क्या जवाब दिया

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नई दिल्ली,

दिल्ली विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने इलेक्टोरल रोल (वो​टर लिस्ट) के संबंध में राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर जवाब दिया. उन्होंने वोटर लिस्ट में गलत तरीके से नाम जोड़ने और हटाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. सीईसी राजीव कुमार ने कहा, ‘कुछ पार्टियों ने दावा किया कि कुछ समूहों को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और मतदाता सूची से उनके नाम हटाए जा रहे हैं. मैं उनको बताना चाहता हूं कि किसी भी कीमत पर वोटर लिस्ट से किसी का नाम मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता.’

आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल और आतिशी ने निर्वाचन आयोग को निशाने पर लिया था. दोनों ने आरोप लगाया था कि नई दिल्ली विधानसभा सीट समेत कई विधानसभा क्षेत्रों मेंवोटर लिस्ट से नाम काटे गए हैं. खासतौर पर उन लोगों और इलाकों से वोट काटे गए हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि वे आम आदमी पार्टी के समर्थक हो सकते हैं. अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP नेताओं का एक डेलिगेशन इस संबंध में अपनी शिकायत को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात भी की थी.

चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा, ‘भारत में 2020 से 30 राज्यों में चुनाव हुए हैं और इनमें से 15 राज्यों में अलग-अलग पार्टियां जीतकर सत्ता में आई हैं. इससे स्पष्ट है कि चुनाव पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है. वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया भी बहुत पारदर्शी है. यहां तक कि हम सभी राजनीतिक दलों को अधिकार देते हैं कि वे अपने स्तर पर बीएलओ की नियुक्ति करें. हर साल अक्टूबर में ड्राफ्ट रोल तैयार किया जाता है और नए लोगों को जोड़ा जाता है. उन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाते हैं, जो दूसरी विधानसभा में शिफ्ट हो गए हैं या जिनकी मृत्यु हो गई हो.’

राजीव कुमार ने कहा कि बिना डेथ सर्टिफिकेट के मृत व्यक्ति का नाम भी वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जा सकता. सभी राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट की दो कॉपी दी जाती है. इसके अलावा हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई की जाती है. जिस भी वोटर का नाम डिलीट करने का आवेदन आता है, चुनाव अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उस व्यक्ति या उसके परिजनों से संपर्क करते हैं. मृत्यु की दशा में डेथ सर्टिफिकेट लगने पर ही लिस्ट से नाम हटता है. इसलिए राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर भ्रम फैलाने से बचना चाहिए.’

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