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पहलगाम अटैक से जब देश पर संकट तो सुप्रीम कोर्ट उससे अलग नहीं, बोले अगले चीफ जस्टिस गवई

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नई दिल्ली

जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि वह पहले बौद्ध होंगे जो चीफ जस्टिस बनेंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यह भी संयोग की बात है कि बुद्ध पूर्णिमा के अगले दिन ही वह शपथ ले रहे हैं। भारत के भावी चीफ जस्टिस बी. आर. गवई ने पहलगाम आतंकी हमले पर कहा है कि जब देश संकट में हो, तो सुप्रीम कोर्ट उससे अलग नहीं रह सकता और हम भी इस देश का हिस्सा हैं। रविवार को मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही।

देश संकट में तो सुप्रीम कोर्ट अलग नहीं रह सकता
मीडिया कर्मियों से बातचीत में जस्टिस गवई ने कहा कि देश जब संकट में होता है, तब सुप्रीम कोर्ट अलग-थलग नहीं रह सकता, हम भी देश का हिस्सा हैं । यह बात भारत के भावी मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने रविवार को पहलगाम आतंकी हमले पर पूछे गए सवाल पर कही, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई।उन्होंने कहा कि जब हमें इस घटना के बारे में पता चला, तो हम स्तब्ध रह गए। चूँकि चीफ जस्टिस देश में नहीं थे, इसलिए उनकी अनुमति लेने के बाद मैंने पूर्ण न्यायालय (फुल कोर्ट) की बैठक बुलाई। बैठक के बाद, हमने तुरंत हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखने की घोषणा की। यह पहली बार था जब सुप्रीम कोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और पीड़ितों की याद में मौन रखा। परंपरागत रूप से सर्वोच्च न्यायालय हर वर्ष 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर दो मिनट का मौन रखता है।

सीजफायर पर बोले जस्टिस गवई
भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम पर न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि युद्ध से किसी को लाभ नहीं होता, संघर्षविराम अच्छा होता है। उन्होंने रूस और यूक्रेन तथा इज़राइल और गाज़ा के बीच चल रहे युद्धों का उदाहरण देते हुए कहा, “युद्ध के क्या विनाश होते हैं, हम देख ही चुके है। तीन साल से हम यूक्रेन युद्ध देख रहे हैं। पचास हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। गाज़ा के संघर्ष में इससे भी अधिक हताहत हुए हैं। एक देश का नागरिक होने के नाते सभी चिंतित होते हैं। जो भी होता है, वह सबके साथ होता है।

पहले बौद्ध हैं जो चीफ जस्टिस होंगे
जस्टिस गवई ने कहा कि वह पहले बौद्ध हैं जो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे। उन्होंने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर वे इंद्रप्रस्थ पार्क स्थित शांति स्तूप जाएंगे और प्रार्थना करेंगे।

रिटायरमेंट के बाद पद नहीं लेंगे
पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में न्यायमूर्ति गवई ने यह भी स्पष्ट किया कि वे सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद नहीं लेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अपने पिता की तरह राजनीति में जाएंगे, तो उन्होंने कहा, “कोई राजनीतिक आकांक्षा नहीं है। मैंने यह तय कर लिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद या कार्य नहीं लूंगा। कोई अन्य जिम्मेदारी भी मुख्य न्यायाधीश के पद से नीचे ही मानी जाएगी।

संविधान सर्वोच्च होता है
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और भाजपा नेता निशिकांत दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट पर की गई टिप्पणियों पर पूछे गए सवाल पर न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि क्या सर्वोच्च है, यह सबको पता है। सर्वोच्च तो संविधान है। सुप्रीम कोर्ट पहले के कई फैसलों में कह चुका है कि संविधान सर्वोच्च है।

साल में तीन बार गांव जाते हैं जस्टिस गवई
महाराष्ट्र के एक गांव में जन्मे न्यायमूर्ति गवई ने बताया कि वे अब भी साल में तीन बार अपने गांव जाना पसंद करते हैं। विशेष रूप से अपने दिवंगत पिता की जन्म और पुण्यतिथि पर, और गांव के वार्षिक मेले में वह गांव जरूर जाते हैं।

छह महीने का होगा कार्यकाल…14 मई को लेंगे शपथ
14 मई को जस्टिस गवई भारत के अगले चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ लेंगे और उनका कार्यकाल छह महीने का होगा और वह 23 दिसंबर 2025 को रिटायर हो जाएंगे। जस्टिस गवई ने 16 मार्च 1985 को वकालत शुरू की थी और नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए स्थायी वकील के रूप में कार्य किया। अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक वे बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त पब्लिक प्रोसिक्युटर रहे। 17 जनवरी 2000 को उन्हें नागपुर बेंच के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था।

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