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Friday, May 1, 2026
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356 पर ही भरोसा क्यों नहीं किया, कश्मीर ने संप्रभुता खो दी.. 370 पर आज सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या दलील

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 पर आज याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने जोरदार दलीलें रखीं। जम्मू-कश्मीर से केंद्र सरकार के 370 हटाने के खिलाफ 20 से ज्यादा याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। शीर्ष अदालत ने वकीलों की दलीलों के बीच कई सारे सवाल पूछे। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने पूरे दिन सुनवाई कर रही है।

सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होते हुए कहा- सिर्फ भारत संघ में शामिल होने से कश्मीर ने सारी आंतरिक संप्रभुता नहीं खो दी।

CJI-सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा कि धारा 370 की ऐसी कौन सी विशेषताएं हैं जो दर्शाती हैं कि जम्मू-कश्मीर संविधान बनने के बाद इसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा?

राकेश द्विवेदी- इसपर द्विवेदी ने कहा 370 के संबंध में 238 लागू नहीं होगा। इसे बदला नहीं गया है क्योंकि इसे बदलने की शक्ति नहीं है।

CJI- सीजेआई ने कहा, अनुच्छेद 5 कहता है कि राज्य की विधायी और कार्यकारी शक्तियां उन मामलों को छोड़कर सभी मामलों तक विस्तारित होंगी जिनके संबंध में संसद के पास कानून बनाने की शक्ति है। यानी भारत के संविधान के प्रावधान। इससे पता चलता है कि भारतीय संविधान जम्मू-कश्मीर पर लागू होता है। जब तक हम यह स्वीकार नहीं करते कि धारा 370 2019 तक अस्तित्व में थी, संसद के अधिकार क्षेत्र पर कोई रोक नहीं होगी। अगर हम आपकी दलील मान लें तो संसद की शक्ति पर कोई रोक नहीं लगेगी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील सीयू सिंह
मेरा मानना है कि राज्य को केंद्रशासित प्रदेश में परिवर्तित करना, यदि किया जा सकता है, तो केवल अनुच्छेद 368 के तहत किया जा सकता है क्योंकि यह स्पष्ट रूप से कम से कम 6-7 प्रावधानों का उल्लंघन करता है। इसलिए इसके लिए विशेष बहुमत और 50% से अधिक के समर्थन, दोनों की आवश्यकता होगी। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर दोनों के लिए- जो किया गया है वह अनुच्छेद 3 के दायरे से बाहर है, भले ही यह सही तरीके से किया गया हो। यह अनुच्छेद 3 का दायरा नहीं है।

CJI-सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा, ‘क्या राज्य को केंद्रशासित प्रदेश में बदलना- क्या यह अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से अलग हो सकता है?

वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने जवाब में कहा, ‘हां, दोनों अलग हैं।’

सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह- ‘अनुच्छेद 1 में कहा गया है कि भारत राज्यों का एक संघ होगा। जब केंद्रशासित प्रदेशों का गठन हुआ तो इसे 7वें संशोधन द्वारा संशोधित किया गया। लेकिन अनुच्छेद 1(1) और 1(2) में संशोधन नहीं किया गया। यूटी को 1(3)(बी) में जोड़ा गया था। इंडिया की मूल अवधारणा, यानी भारत, राज्यों का एक संघ होगा- कायम रखी गई। धारा 2 को यथावत रखा गया। अनुच्छेद 3 में 18वें संशोधन तक संशोधन नहीं किया गया था जब उन दो स्पष्टीकरणों को शामिल किया गया था। अब स्पष्टीकरण वह पूंछ बन गए हैं जो कुत्ते को घसीट रहे हैं। अब कोई भी परम्‍युटेशन और कॉम्बिनेशन अनुच्छेद 3 के तहत संसद के लिए उपलब्ध है।’

सीनियर एडवोकेट संजय पारिख
संप्रभुता लोगों में निहित है और वे अपनी संप्रभुता को एक विशिष्ट तरीके से व्यक्त करते हैं। इस संप्रभुता को जम्मू-कश्मीर संविधान में शाम‍िल किया गया। जब लिखित संविधान होता है तो लिखित संविधान ही सर्वोच्च हो जाता है।

वरिष्ठ वकील पारिख
‘उन्होंने (केंद्र) 92 का सहारा क्यों लिया? केवल (अनुच्‍छेद) 356 पर ही भरोसा क्यों नहीं किया? इसका जवाब यह है कि क्योंकि उद्घोषणा के बाद, अगली तारीख पर, वह एस 53(2)(बी) का सहारा लेकर विधानसभा को भंग कर देते हैं, जो मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के बिना नहीं किया जा सकता था। उन्होंने परोक्ष रूप से 370 को ही बदल दिया। उन्होंने संविधान सभा की पूर्व अनुशंसा के बिना स्पष्टीकरण बदल दिया। संविधान सभा की सिफारिश को संसद की सिफारिश से बदल दिया गया। जो आप प्रत्यक्ष रूप से नहीं कर सकते, वह अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं कर सकते।’

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