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दिल्ली में आप और कांग्रेस साथ तो थे, लेकिन क्या वाकई दोनों का वोट एक दूसरे को ट्रांसफर हो पाया?

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नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर शनिवार को मतदान पूरा हो गया। इस बार बीजेपी का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा। सात में चार सीटों पर आम के उम्मीदवार तो तीन सीटों पर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार उतारा। दिल्ली में वोटों के बंटने से बचने और बीजेपी को जीतने से रोकने के लिए AAP-कांग्रेस का गठबंधन शनिवार को वोटिंग के दौरान दिलचस्प स्थिति में बदल गया। मतदान के दिन से पहले, दोनों पार्टियों ने दावा किया था कि उनके सीनियर नेता और जमीनी कार्यकर्ता पूरी तरह से मिलजुल कर काम कर रहे हैं और वोटों के ट्रांसफर में कोई समस्या नहीं होगी। लेकिन शनिवार को कई मतदान केंद्रों पर, दोनों पार्टियों के समर्थक या तो झाड़ू (AAP का प्रतीक) या हाथ (कांग्रेस का प्रतीक) ढूंढ रहे थे और भ्रमित दिख रहे थे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी अपनी रैलियों में घोषणा कर रहे थे कि गठबंधन के कारण उनके समर्थकों को सीट बंटवारे के आधार पर जहां भी निर्वाचन क्षेत्र आवंटित किया गया है, वहां उन्हें दूसरी पार्टी को वोट देना होगा।

कई लोगों को हुई दिक्कत
यह संदेश बहुत से लोगों तक नहीं पहुंच पाया, जिससे काफी भ्रम हुआ। शकर बस्ती के एक मतदान केंद्र पर, कुछ मतदाता EVM पर झाड़ू के निशान की गैर-मौजूदगी के बारे में पूछताछ कर रहे थे। चुनावी ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के एक कर्मी ने कहा, ‘मुझे कम से कम पांच लोगों को समझाना पड़ा कि बैलेट यूनिट पर झाड़ू का निशान नहीं है और उन्हें कांग्रेस के हाथ के निशान पर बटन दबाना होगा। लेकिन वे आश्वस्त नहीं दिखे। मुझे नहीं पता कि उन्होंने वोट दिया या नहीं।’ मतदान अधिकारी भी मतदाताओं को गलतियों से बचने के लिए लगातार गाइड कर रहे थे।

बूथ एजेंट को बतानी पड़ी गठबंधन की बात
पश्चिमी दिल्ली के मादीपुर में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। बूथ लेवल एजेंट प्रवीण कुमार ने बताया कि कई लोग उनसे यह पूछने आए थे कि कांग्रेस का हाथ का निशान क्यों गायब है। कुमार ने बताया, ‘मुझे उन्हें समझाना पड़ा कि इस बार कांग्रेस और आप एक साथ हैं। मैंने उनसे कहा कि अगर वे कांग्रेस को वोट देना चाहते हैं तो उन्हें झाड़ू का बटन दबाना होगा।’ इससे दोनों पार्टियों के बीच वोटों के ट्रांसफर में बड़ी बाधा उत्पन्न हो सकती है और इससे समन्वय की कमी भी उजागर हुई है। उत्तर पश्चिमी दिल्ली में एमसीडी के सहायक सेनेटरी इंस्पेक्टर रजत कुमार (बदला हुआ नाम) ने कहा कि वह अपना वोट डालने के लिए इतनी दूर से आए हैं। उन्होंने कहा, ‘जब मैं अपने परिवार और दोस्तों को समझा रहा था कि उन्हें जो बटन दबाना है, उसे दोबारा जांचना होगा, तो मतदान केंद्र के बाहर मतदाता चाहते थे कि कर्मचारी उन्हें बताएं कि केवल कांग्रेस उम्मीदवार ही क्यों चुनाव लड़ रहा है।’

वोट ट्रांसफर में हो सकती है दिक्कत
कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने माना कि उन्हें लोगों से कई शिकायतें मिली हैं, जिन्हें पता ही नहीं था कि आप या कांग्रेस चुनाव मैदान में नहीं है और वे हैरान हैं। उन्होंने कहा, ‘जिन इलाकों में आप कार्यकर्ता हमारी मदद नहीं कर रहे थे, वहां हमें अपने उम्मीदवारों के लिए वोट पाने में मुश्किल हुई। आप को भी शायद यही समस्या झेलनी पड़ी होगी।’

AAP का दावा- सातों सीटों पर जीत रहे
इस बीच, आप ने एक बयान में दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी सभी सात सीटों पर हारेगी। पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘गर्मी के बावजूद, दिल्ली के लोग तानाशाही को विफल करने के लिए बड़ी संख्या में आए हैं।’ बयान में कहा गया, ‘उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वे ‘जुमलों’ की तुलना में अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य, 24×7 बिजली और पानी और मुफ्त बस यात्रा को महत्व देते हैं।’ आप ने आरोप लगाया कि भाजपा ने केजरीवाल को ‘फर्जी’ मामले में गिरफ्तार करके दिल्ली की जनता का अपमान किया है। पार्टी ने कहा कि दिल्ली की मेहनतकश जनता ने भाजपा की नकारात्मक राजनीति को बार-बार नकारा है। पार्टी ने कहा, ‘इस गिरफ्तारी से दिल्ली की जनता में गुस्सा है।’

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भी भीषण गर्मी के बीच ‘बड़ी संख्या में मतदान’ की सराहना की। यादव ने कहा, ‘यह स्पष्ट संकेत है कि भाजपा सांसदों के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर थी, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों में दिल्ली के लोगों को निराश किया और दिल्ली के विकास और लोगों के कल्याण के लिए कोई पहल नहीं की।’ उन्होंने कहा, ‘मतदान का रुझान दर्शाता है कि लोगों ने बदलाव के लिए मतदान किया है और कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक सातों सीटों पर कब्जा करने के लिए तैयार हैं, जिससे मोदी सरकार की तानाशाही के खिलाफ राहुल गांधी के अथक अभियान को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।’

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