नई दिल्ली
करीब 27 साल बाद बीजेपी ने दिल्ली की सत्ता पर वापसी की है। जब से राष्ट्रीय राजधानी में बीजेपी सरकार बनी कई जगहों और सड़कों के नाम बदलने की मांग तेज हो गई है। इसी कड़ी में फरीदाबाद से सांसद कृष्णपाल गुर्जर, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा और वाइस एडमिरल किरण देशमुख ने अपने आवास के बाहर लगे नेम प्लेट पर तुगलक लेन की जगह स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखवा दिया है। वैसे, नेम प्लेट में अभी भी छोटे अक्षरों में तुगलक लेन लिखा है। हालांकि, नाम बदलने का कोई आधिकारिक आदेश सरकार या प्रशासन की तरफ से नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठ रहे कि बीजेपी सांसद अपनी मर्जी से आवास के बाहर लगे नेम प्लेट पर तुगलक लेन की जगह स्वामी विवेकानंद मार्ग क्यों लिखवा रहे हैं। क्या है नाम बदलने की प्रक्रिया।
कैसे बदलता है शहर या जिले का नाम
किसी भी शहर या जिले का नाम बदलने की एक तय प्रक्रिया होती है। सबसे पहले किसी विधायक या एमएलसी को सरकार से नाम बदलने की मांग करनी होती है। बिना किसी जनप्रतिनिधि की मांग के सरकार खुद से नाम नहीं बदलती। मांग मिलने पर सरकार जनता की राय जानती है। यह देखती है कि क्या वाकई नाम बदलने की जरूरत है या नहीं। फिर नाम बदलने का प्रस्ताव कैबिनेट में जाता है।
करोड़ों का आता है खर्च
कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर ही नाम बदलने का फैसला आधिकारिक होता है। इसके बाद नए नाम का गजट नोटिफिकेशन जारी होता है। गजट नोटिफिकेशन के बाद ही नया नाम लागू माना जाता है। जब भी किसी शहर या जगह का नाम बदला जाता है तो उसमें करोड़ों रुपयों का खर्चा आ जाता है। इसकी वजह है कि बदले गए नाम को हर जगह चेंज पड़ता है। जैसे जब किसी शहर का नाम बदला जाता है तो सभी दस्तावेजों में ये नया नाम दर्ज करना पड़ता है। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन आदि जगहों पर भी नया नाम लिखा जाता है।
दिल्ली में कैसे बदलता है जगह का नाम
दिल्ली में किसी जगह का नाम बदलने के लिए नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) को एक प्रस्ताव भेजा जाता है। NDMC की 13 सदस्यीय कमेटी इस प्रस्ताव पर विचार करती है। कमेटी यह देखती है कि नए नाम का उस जगह से क्या औचित्य है। ऐसे मौके पर उस जगह के इतिहास को भी ध्यान में रखा जाता है। इसके बाद प्रस्ताव NDMC काउंसिल के सामने रखा जाता है। काउंसिल की मंजूरी के बाद ही नाम बदलने का अंतिम फैसला होता है।
ऐसे उठा नाम बदलने का मुद्दा
दिल्ली में कई जगहों के नाम बदलने की मांग बीते विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद से ही शुरू हो गया था। जब मुस्तफाबाद से बीजेपी विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने इस इलाके का नाम बदलने की मांग की थी। उन्होंने इसकी जगह ‘शिवपुरी’ या ‘शिव विहार’ नाम सुझाया था। इसके बाद 27 फरवरी को बीजेपी विधायक नीलम पहलवान ने दिल्ली विधानसभा में नजफगढ़ का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था।
बीजेपी नेता कर रहे डिमांड
नजफगढ़ से बीजेपी विधायक नीलम पहलवान ने विधानसभा सत्र के दौरान कहा कि नजफगढ़ का नाम बदलकर नाहरगढ़ किया जाना चाहिए। नीलम पहलवान के बाद दक्षिणी दिल्ली के आरके पुरम से बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने भी कुछ ही मांग कर दी। उन्होंने अपनी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले गांव मोहम्मदपुर का नाम बदलने की मांग की थी।
तुगलक लेन की जगह स्वामी विवेकानंद मार्ग?
इसी बीच बीजेपी कोटे से राज्यसभा सांसद बने दिनेश शर्मा को तुगलक लेन पर सरकारी आवास आवंटित हुआ। यहां उन्होंने अपने परिवार के साथ गृह प्रवेश किया। इसकी तस्वीरें भी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कीं। इन तस्वीरों में वे अपने सरकारी आवास के बाहर खड़े दिख रहे हैं। उनके आवास पर नेम प्लेट दिख रहा है, जिसमें तुगलक लेन की जगह स्वामी विवेकानंद मार्ग लिखा हुआ है। जिसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि क्या तुगलक लेन का नाम अब बदलने जा रहा? ये तो आने वाले समय में पता चलेगा।
