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ईडी ने अदालत में बढ़ाई सोनिया और राहुल गांधी की मुश्किलें, कोर्ट ने भी जारी किया निर्देश

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नई दिल्ली:

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में आज एक बार फिर से कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़े मामले की सुनवाई हो रही है। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय( ED) राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ाता नजर आया। ईडी ने सुनवाई के दौरान कई गंभीर आरोप लगाए

ईडी ने अदालत से क्या कहा?
ईडी ने दिल्ली की एक अदालत में कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ धन शोधन का मामला बनता है यह बात ईडी ने बुधवार को विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने के सामने कही। ईडी ने अदालत से मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया।

अदालत ने भी दिया निर्देश
राउज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को आरोपपत्र की एक कॉपी देने का निर्देश दिया। स्वामी की शिकायत पर ही ईडी ने यह मामला दर्ज किया था।

अन्य आरोपियों को जारी किया था नोटिस
वहीं, इससे पहले अदालत ने 2 मई को गांधी परिवार के साथ ही सुमन दुबे और यंग इंडियन, डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड और सुनील भंडारी को भी नोटिस जारी किया था।

क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
नेशनल हेराल्ड केस एक अखबार से जुड़ा मामला है। साल 1938 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस अखबार की शुरुआत की थी। अखबार का नाम नेशनल हेराल्ड था।

इसका मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) के पास था। AJL दो और अखबार छापती थी। ये अखबार हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘कौमी आवाज’ थे। कंपनी घाटे में चली गई और 2008 में इसे बंद करना पड़ा। कंपनी पर 90 करोड़ का कर्ज था। इसी के बाद विवाद शुरू हुआ।

दरअसल, 1956 में AJL को गैर-व्यावसायिक कंपनी बनाया गया था। इसे कंपनी एक्ट की धारा 25 से टैक्स में छूट मिली थी। लेकिन कंपनी को नुकसान होने लगा। धीरे-धीरे कंपनी पर कर्ज बढ़ता गया। आखिरकार वित्तीय संकट के चलते इसे बंद करना पड़ा।

विवाद कहां से शुरू हुआ?
साल 2010 में यंग इंडियन नाम से एक और कंपनी की स्थापना की गई । जिसमें 76 प्रतिशत शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी (38-38 फीसदी) के पास और बाकी का शेयर मोतीलाल बोरा और आस्कर फर्नांडिस के पास था।

इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने अपना 90 करोड़ का लोन नई कंपनी यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिया। लोन चुकाने में पूरी तरह असमर्थ द एसोसिएट जर्नल ने सारा शेयर यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिया।

इसके बदले में यंग इंडियन ने महज 50 लाख रुपये द एसोसिएट जर्नल को दिए। इसी को लेकर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि यंग इंडियन प्राइवेट ने केवल 50 लाख रुपये में 90 करोड़ वसूलने का उपाय निकाला जो नियमों के खिलाफ है।

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