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Friday, June 5, 2026
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पहले कसम अब प्रतिज्ञा, दिल्ली चुनाव को लेकर अरविंद केजरीवाल की क्या है रणनीति

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नई दिल्ली

आज मैं अमित शाह को चैलेंज करने वाला हूं। अमित शाह जी ने 10 सालों में जितनी झुग्गीवालों को उजाड़ा है, उन सभी केस को कोर्ट से वापस ले लें। कोर्ट के अंदर एफिडेविट फाइल कर दो कि जितनी झुग्गियां तोड़ी हैं, उनको वापस बसाएंगे। आपने जिन-जिन लोगों को उजाड़ा था, उन्हें उसी जमीन पर वापस नहीं लाते, तो केजरीवाल चुनाव नहीं लड़ेगा। दिल्ली चुनाव की तारीख नजदीक आने से पहले अरविंद केजरीवाल की झुग्गी वालों के प्रति इस प्रतिज्ञा की खूब चर्चा हो रही है।

यह पहली बार नहीं है जब अरविंद केजरीवाल ने प्रतिज्ञा की हो। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना हो या नगर निगम चुनाव समय से कराने हो, कांग्रेस या बीजेपी से हाथ नहीं मिलाने की बात समेत विभिन्न मुद्दों पर केजरीवाल कसम खाने, प्रतिज्ञा करने के साथ ही विरोधियों को चुनौती दे चुके हैं। इतना ही नहीं राजनीति में आने से पहले वह कभी चुनाव नहीं लड़ने की बात भी कह चुके थे। अरविद केजरीवाल ने इसी साल लोकसभा चुनाव के समय भी 10 प्रतिज्ञा की थी। केजरीवाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण से जुड़े 10 वादे किए थे। इसे उन्होंने ‘केजरीवाल की गारंटी’ का नाम दिया था।

क्या है केजरीवाल की रणनीति?
हालांकि, लोकसभा चुनाव में आप-बीजेपी गठबंधन को दिल्ली की सभी सातों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग लड़ रहे हैं। ऐसे में केजरीवाल झुग्गीवासियों समेत अन्य लोगों को लुभाने के लिए एक के बाद एक कई घोषणाएं कर चुके हैं। चुनाव को लेकर केजरीवाल की रणनीति स्पष्ट है कि गरीब, ऑटोचालक, पुजारी-ग्रंथी, बुजुर्गों, झुग्गिवासियों के साथ ही दलित वर्ग को लुभाया जा सके। इसके अलावा महिलाओं को लेकर भी पार्टी की रणनीति की लगातार चर्चा हो रही है।

लोकसभा चुनाव में केजरीवाल के 10 गारंटी
  1. 24 घंटे बिजली; गरीबों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली
  2. सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से बेहतर शिक्षा दी जाएगी
  3. हर गांव, मोहल्ले में मोहल्ला क्लीनिक
  4. चीन द्वारा कब्जाई गई जमीन को मुक्त कराया जाएगा
  5. अग्निवीर योजना बंद की जाएगी
  6. किसानों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार एमएसपी दिया जाएगा
  7. दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा
  8. इंडिया गठबंधन सरकार सालाना 2 करोड़ नए रोजगार पैदा करेगी
  9. भ्रष्टाचार खत्म करना और भाजपा की ‘वाशिंग मशीन’ को तोड़ना
  10. जीएसटी को सरल बनाया जाएगा

जब केजरीवाल ने खाई थी बच्चों की कसम
इससे पहले साल 2013 में अरविंद केजरीवाल ने अपने बच्चों की कसम खाई थी। उन्होंने बच्चों की कसम खाकर कहा था कि वो कभी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाएंगे। हालांकि, बाद में केजरीवाल ने कांग्रेस से हाथ मिलाया। कांग्रेस के समर्थन से अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सीएम की कुर्सी पर बैठे थे। इसके लिए बीजेपी लगातार केजरीवाल पर निशाना साधती रहती है। बीजेपी कहती है कि कुर्सी के लालच में केजरीवाल ने अपने बच्चों की कसम तोड़ दी।

‘कुर्सी छोड़कर नहीं भागूंगा’
साल 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की पार्टी को 28 सीटें मिली थी। तब बीजेपी 32 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। कांग्रेस को 8 सीटों से संतोष करना पड़ा था। ऐसे में केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। हालांकि, यह गठबंधन महज 49 दिन ही चल पाया था।

इसके बाद हुए चुनाव से पहले एक रैली में केजरीवाल ने एक बार फिर ‘कसम’ खाई थी कि वह कभी कुर्सी छोड़कर नहीं भागेंगे। केजरीवाल ने कहा था, इस पूरे घटनाक्रम ने मुझे सीख दी है कि कुर्सी मिलने के बाद उसे छोड़कर नहीं भागना चाहिए। इस्तीफे के मुद्दे पर उन्होंने अफसोस जताया था। उनका कहना था कि यह उनकी भूल थी और इससे उन्हें बहुत बड़ी सीख मिली है।

पूर्ण राज्य के दर्जे की कसम
पिछले साल अक्टूबर में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की कसम खाई थी। जनता अदालत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा था, मैं आज कसम खाकर जा रहा हूं कि दिल्ली की जनता को उनके अधिकार दिलाकर रहूंगा। दिल्ली को पूर्ण राज्य बनवाकर रहूंगा। दिल्ली को एलजी से मुक्ति दिला कर रहूंगा।

चुनाव नहीं लड़ने की बात
इससे पहले साल 2011 में एक इंटरव्यू की क्लिप को लेकर अक्सर केजरीवाल पर निशाना साधा जाता है। उस इंटरव्यू में अरविंद केजरीवाल एक टीवी चैनल पर कहा था, मैं एक बार फिर पूरी तरह से साफ कर देना चाहता हूं कि मैं अपने जीवन में कभी चुनाव नहीं लड़ूंगा और मैं अपने जीवन में कोई पद नहीं लूंगा। मेरी कोई राजनीति महत्वाकांक्षा नहीं है।

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