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इंदिरा गांधी का बेलछी, प्रियंका का उन्नाव, हाथरस, संभल… लोकसभा में ‘आयरन लेडी’ दिखने की कोशिश

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हाथरस

केरल के वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संविधान पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष पर जोरदार हमला बोला। उत्तर प्रदेश के हाथरस, उन्नाव और संभल कांड का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार संविधान को कमजोर करने का कार्य किया। प्रियंका गांधी के भाषण को लेकर सोशल मीडिया पर खासी चर्चा हो रही है। प्रियंका गांधी के भाषण को लेकर आयरन लेडी के नाम से मशहूर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के भाषणों से तुलना की गई। बेलछी नरसंहार के बाद इंदिरा ने जिस प्रकार से तत्कालीन जनता पार्टी सरकार पर हमला बोला था, कुछ वही संसद से प्रियंका करती दिखाई दीं।

1977 में संपूर्ण क्रांति के बाद इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर हो गई थीं। जिस बिहार की धरती से उभरे छात्र आंदोलन ने इंदिरा सरकार को उखाड़ फेंका था, उसी बिहार ने इंदिरा गांधी को राजनीतिक नवजीवन भी दे दिया था। 27 मई 1977 को बेलछडी में दलित नरसंहार हुआ था। 1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को भारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद बेलछी की घटना को लेकर इंदिरा ने बेलछी की ऐतिहासिक यात्रा की। उस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। प्रियंका ने यूपी के हाथरस कांड में अपने दौरे का जिक्र कर भाजपा सरकार को घेरा। संविधान की महत्ता बताई।

लोकसभा में यूपी पर हमला
लोकसभा में प्रियंका गांधी वाड्रा अपनी दादी के बेलछी नरसंहार के बाद वाले तेवर में दिखने की कोशिश करती दिखी। हाथरस की घटना को उन्होंने जोरदार तरीके से उठाया। उन्नाव रेप कांड का जिक्र किया। संभल में शाही जामा मस्जिद सर्वे के बाद हिंसा के मुद्दे को उठाया। प्रियंका ने उन्नाव कांड का जिक्र करते हुए कहा कि मैं उन्नाव रेप कांड की पीड़िता के घर गई थी। उसे जलाकर मार डाला गया था। वह करीब 20-21 साल की होगी। हम सोच सकते हैं कि हमारी बच्ची के साथ बार-बार रेप हुआ। जब वह विरोध करने निकली तो उसे जलाकर मार दिया गया। ऐसी स्थिति में हम पर क्या गुजरेगी?

प्रियंका ने कहा कि मैं उस बच्ची के पिता से मिली थी। उसके खेत जलाए गए थे। उसके भाइयों को पीटा गया था। उसके पिता को घर के बाहर घसीटकर मारा गया था। उसके पिता ने कहा था, मुझे न्याय चाहिए। उसका जिले में केस दर्ज नहीं किया गया। उस लड़की को अपने ऊपर लगे आरोपों में न्याय के लिए जिले से बाहर जाना पड़ा। उसके पिता ने बताया था कि मैंने बेटी से कहा, अकेली नहीं जाएं। छोड़ दो ये लड़ाई। बेटी ने लड़ना चुना। उस लड़की और देश की करोड़ों महिलाओं को यह लड़ने की हिम्मत हमारा संविधान देता है।

प्रियंका ने कहा कि आगरा में मैं अरुण वाल्मीकि के घर गई। अरुण पुलिस स्टेशन में सफाई का काम करता था। उसका भी एक परिवार था। नई-नई शादी हुई थी। दो-तीन माह का बच्चा था। पुलिस स्टेशन में चोरी हुई। उस पर आरोप लगा। उसके पूरे परिवार को पुलिस स्टेशन उठाकर ले जाया गया। अरुण वाल्मीकि को पीट-पीटकर मार डाला गया। उसकी बीवी को पीटा। उसके पिता के नाखून को निकाला गया। मैं उस विधवा से मिली तो उसने न्याय की मांग की।

संभल घटना का जिक्र
प्रियंका गांधी वाड्रा ने संभल की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के कुछ लोग मिलने आए थे। उसमें दो बच्चे थे, अजनान और उजैर। एक बच्चा मेरे बच्चे की उम्र का है। दूसरा उससे छोटा 17 साल का है। उसके पिता दर्जी थे। उनका एक ही सपना था, बेटे पढ़े-लिखें। वह चाहते थे, एक बेटा डॉक्टर बने और दूसरा बेटा भी जीवन में सफल होगा। उनके पिता हर रोज उन्हें स्कूल छोड़ते थे। उस दिन भी वह बच्चे को स्कूल छोड़कर दुकान गए थे।

प्रियंका ने कहा कि हंगामा होता देख घर की तरफ चले। रास्ते में पुलिस की गोली से उनकी मौत हो गई। भावुक होते हुए प्रियंका ने कहा कि 17 का वह बच्चा कहता है कि मैं डॉक्टर बनकर दिखाउंगा। मैं अपने पिता का सपना साकार करूंगा। यह सपना और आशा उसके दिल में संविधान ने डाला है।

इंदिरा का वो दौरा
बिहार में सामूहिक संघर्ष व हत्याओं का दौर 1976 के आसपास शुरू हुआ था। यह 1980 के बाद से लगातार बढ़ता गया। इसी दौर में 27 मई 1977 में पटना जिले के बेलछी गांव में 14 दलितों की हत्‍या हुई थी। सामूहिक हत्याकांड के साथ नरसंहार शब्द की चर्चा हुई। पटना का बेलछी नालंदा के हरनौत के पास है। इलाके की दुर्गम स्थिति के कारण नरसंहार के महीनों बाद कोई राजनेता वहां नहीं पहुंचा था। इंदिरा ने इसमें मौका देख घटना के ढाई महीने बाद 13 अगस्त 1977 को हरनौत से बेलछी तक की यात्रा की।

इंदिरा गांधी ने 15 किलोमीटर के दुर्गम रास्ते को पार कर वहां पहुंच गई। तत्कालीन केंद्र और राज्य सरकार तब भौंचक रह गई थी। इंदिरा गांधी की वह यात्रा देश-विदेश में मीडिया की सुर्खियां बनी। इस नरसंहार का जिक्र कर इंदिरा ने कांग्रेस को 1980 में सत्ता में वापस ला दिया। प्रियंका भी इसी तर्ज पर हाथरस, उन्नाव, संभल के जरिए कांग्रेस की स्थिति यूपी में बेहतर बनाने की कोशिश करती दिखीं।

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