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देश में स्वीकृति के बाद भी IAS-IPS के 1800 से ज्यादा पद खाली: केंद्र सरकार

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नई दिल्ली,

भारत में सिविल सेवा कैडर में गंभीर कमी का सामना कर रहा है, जिसमें 1,000 से अधिक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और 500 से अधिक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के पद वर्तमान में रिक्त हैं. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बीते गुरुवार 1 जनवरी, 2024 तक के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह आंकड़ा जारी किया, जिसमें स्वीकृत संख्या और सेवारत अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण अंतर का पता चलता है.

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के राज्यसभा में लिखित जवाब के अनुसार, आईएएस अधिकारियों के लिए स्वीकृत संख्या 6,858 है, लेकिन वर्तमान में केवल 5,542 अधिकारी पद पर हैं. इसी प्रकार, आईपीएस के लिए, 5,055 की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 4,469 अधिकारी काम कर रहे हैं.

IAS-IPS के अलावा IFS की भी 1000 से ज्यादा रिक्तियां
रिक्तियों में आईएएस में 1,316 पद शामिल हैं, जिनमें से 794 पद सीधी भर्ती के लिए और 522 पद पदोन्नति के लिए आवंटित हैं. आईपीएस में 586 रिक्तियों में 209 सीधी भर्ती के पद और 377 पदोन्नति के पद शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, भारतीय वन सेवा (IFS) भी महत्वपूर्ण कमी का सामना कर रही है, जिसमें 3,193 की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 2,151 अधिकारी सेवारत हैं, जिससे 1,042 पद रिक्त हैं. इनमें सीधी भर्ती के लिए 503 पद और पदोन्नति के लिए 539 पद शामिल हैं.

कैटेगरी वाइज नियुक्त हुए अधिकारियों की संख्या
केंद्रीय मंत्री ने पिछले वर्षों में भर्ती ट्रेंड की डिटेल्स भी शेयर की, जिसमें कैटेगरी वाइज नियुक्तियां शामिल हैं. 2022 की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के लिए, 75 सामान्य, 45 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), 29 अनुसूचित जाति (SC) और 13 अनुसूचित जनजाति (ST) उम्मीदवारों को IAS में नियुक्त किया गया था. आईपीएस में, नियुक्तियों में 83 सामान्य, 53 ओबीसी, 31 एससी और 13 एसटी उम्मीदवार शामिल थे, जबकि आईएफएस ने सीएसई 2024 के माध्यम से 43 सामान्य, 51 ओबीसी, 22 एससी और 11 एसटी नियुक्तियां देखने को मिली हैं.

बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) आईएएस, आईपीएस और आईएफएस भूमिकाओं के लिए योग्य उम्मीदवारों की भर्ती के लिए वार्षिक सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है, जिसका उद्देश्य देश के एडमिनिस्ट्रेटिव और लॉ एनफोर्समेंट स्ट्रक्चर में गैप को दूर करना है.

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