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Monday, June 1, 2026
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद NDA के मुख्यमंत्रियों की बैठक, आगामी चुनावों से पहले क्यों खास है ये मीटिंग? समझिए

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नई दिल्ली:

राजधानी दिल्ली में रविवार को एनडीए के 20 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और 18 उपमुख्यमंत्रियों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक को न केवल सुशासन और राज्यों की कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी इसे एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद यह बैठक एनडीए की एकजुटता और सरकार की विकास नीतियों को और मजबूत करने का संदेश दे रही है।

बैठक की प्रमुख बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा सुशासन को बढ़ावा देना और विभिन्न राज्यों में लागू की गई योजनाओं का आदान-प्रदान करना था।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘हमने विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया। राज्यों ने जल संरक्षण, शिकायत निवारण, प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रदर्शन किया। मैंने डबल इंजन सरकार के लाभों को लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और विकास को गति देने की आवश्यकता पर जोर दिया।’

आगामी चुनावों की रणनीति
बैठक में आगामी विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, एनडीए के नेता गठबंधन की एकजुटता को और मजबूत करने, विपक्षी दलों के खिलाफ रणनीति तैयार करने और केंद्र व राज्यों की योजनाओं के प्रभावी प्रचार पर जोर दे रहे हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह बैठक एनडीए के लिए अपनी उपलब्धियों को जनता तक ले जाने और विपक्ष के खिलाफ एकजुट मोर्चा पेश करने का अवसर प्रदान करती है।

सुशासन और विकास पर फोकस
बैठक में जल संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, युवा सशक्तिकरण, कृषि और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में राज्यों के बीच तालमेल बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। राज्यों ने अपनी सफल योजनाओं और पहलों को साझा किया, जिन्हें अन्य राज्य भी अपनाकर अपने प्रशासन को और प्रभावी बना सकते हैं।

क्यों अहम है यह बैठक?
यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि यह एनडीए शासित राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ावा देती है और केंद्र सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति को मजबूत करती है। इसके साथ ही, यह गठबंधन की एकता और रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो आगामी चुनावों में विपक्ष को कड़ी चुनौती दे सकता है।

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