नई दिल्ली
लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को टक्कर देने के लिए तैयार हुए विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन का वजूद लगातार संकट में पड़ता जा रहा है। दरअसल इस गठबंधन का सबसे बड़ा दल कांग्रेस ही अलग राह पर चल पड़ा है। दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा में करारी हार के बाद कांग्रेस कोई चांस नहीं लेना चाहती। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर अटकलें तेज हैं कि कांग्रेस बिहार विधानसभा चुनाव के जरिए अपने सहयोगी दलों को सख्त संदेश दे रही है। कांग्रेस ने बिहार चुनाव में कन्हैया कुमार की एंट्री करवाकर इस मुद्दे को और हवा दे दी है।
दरअसल बिहार में कांग्रेस ‘पलायन रोको नौकरी दो’ यात्रा शुरू करने वाली है। यह यात्रा कल से पश्चिमी चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम से शुरू होगी, जो पटना पहुंचेगी। कन्हैया कुमार इस यात्रा में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। राहुल गांधी के दो बार इस यात्रा में शामिल होने की संभावना है। कन्हैया कुमार की एंट्री से कांग्रेस की सहयोगी आरजेडी नाखुश है। कन्हैया कुमार और तेजस्वी यादव के बीच अच्छे रिश्ते नहीं है। मई 2023 में पटना में हुए प्रज्ञापति सम्मेलन में कन्हैया के शामिल होने पर मुख्य अतिथि तेजस्वी यादव ने कार्यक्रम से दूरी बना ली थी। हालांकि कांग्रेस कन्हैया के जरिए बिहार में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश में है।
असम और केरल पर भी फोकस
कांग्रेस को अगले साल होने वाले असेंबली चुनावों को लेकर जिन दो राज्यों पर उम्मीदें टिकी हुई है, उनमें असम और केरल प्रमुख है। इन दोनों ही राज्यों में सत्ता वापसी के लिए कांग्रेस आतुर है। असम चुनाव के मद्देनजर हाल ही में कांग्रेस के नए मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश नेताओं से लंबी बैठक की, जिसमें कई पहलुओं पर चर्चा हुई। असम के नेताओं के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल मौजूद थे। वहीं दूसरी ओर असम के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र बोरा, लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, सांसद रकीबुल हुसैन, सीएलपी लीडर देवब्रत सैकिया, प्रदेश के सीनियर लीडर प्रदीप बारदोलोई सहित तमाम लोग शामिल थे।
गठबंधन को लेकर राहुल का साफ संदेश
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने अपने प्रदेश नेतृत्व से असम में उन छोटे-छोटे क्षेत्रीय दलों से भी बात करने का संकेत भी दिया, जो चुनाव में बीजेपी के साथ खड़े नहीं होंगे। बताया जाता है कि राहुल गांधी ने कहा कि असम में क्षेत्रीय दलों से बात कीजिए और तालमेल को लेकर एक रूपरेखा केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखिए, ताकि हम मिलकर प्रदेश के हित में फैसला ले सकें।
बंगाल में भी अकेले चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
दिल्ली के बाद कांग्रेस ने अब पश्चिम बंगाल में भी अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। इंडिया गठबंधन सहयोगी से मुकाबला करने की योजना बनाई है। ऐसी अटकलें है कि बंगाल में कांग्रेस टीएमसी के खिलाफ चुनाव लड़ेगी। बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस ने राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ा ली है। कार्यकर्ताओं को जनाधार बढाने की सलाह दी गई है।
