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जब किसी को नहीं थी उम्मीद तब सामने आया था मनमोहन सिंह का नाम, दिलचस्प थी पीएम बनने की कहानी

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नई दिल्ली

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। गुरुवार शाम उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें भर्ती कराया गया था। 22 मई 2004 का दिन भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक दिन साबित हुआ, जब डॉ. मनमोहन सिंह ने देश के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इस सफर में कई उतार-चढ़ाव और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आइए, जानते हैं कि कैसे 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद उन्होंने सत्ता की बागडोर संभाली।

भाजपा ने समय से पहले चुनावों की घोषणा की
मई 2004 में लोकसभा चुनाव की घोषणा प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही कर दी थी। भाजपा ने चार राज्यों में बड़ी जीत हासिल की थी और ‘इंडिया शाइनिंग’ और ‘फील गुड’ जैसे नारे देकर देश में अपनी बढ़ती लोकप्रियता का विश्वास जताया।

कांग्रेस की खराब स्थिति और सोनिया गांधी का नेतृत्व
उस समय कांग्रेस पार्टी की स्थिति बेहद खराब थी। लगभग आठ वर्षों से सत्ता से बाहर रही पार्टी को अपनी वापसी की उम्मीद कम थी। सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में, इस बार सत्ता में वापसी का संकल्प ले चुकी थीं। पार्टी के पुराने फैसले को दरकिनार करते हुए उन्होंने कई विपक्षी दलों से गठबंधन करने का निर्णय लिया। यह गठबंधन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलायंस (UPA) के नाम से जाना गया।

गठबंधन के लिए सोनिया गांधी का प्रयास
सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों के नेताओं जैसे रामविलास पासवान, डीएमके के करुणानिधि, लालू प्रसाद यादव, एनसीपी के शरद पवार, और पीडीपी से मुलाकात कर उन्हें गठबंधन में शामिल किया। इस सहयोग से कांग्रेस को मजबूती मिली और भाजपा को चुनौती देने का मंच तैयार हुआ।

भाजपा का नारा ‘इंडिया शाइनिंग’ पड़ा कमजोर
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का नारा ‘इंडिया शाइनिंग’ केवल शहरी क्षेत्रों में प्रभावी रहा, जबकि कांग्रेस का नारा ‘कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ’ गांव-गांव तक पहुंच गया। यह नारा सीधे आम जनता से जुड़ता था और भाजपा के संदेश से ज्यादा प्रभावशाली साबित हुआ।

यूपीए की जीत और सोनिया गांधी की भूमिका
20 अप्रैल 2004 से चार चरणों में आयोजित चुनावों के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में गए। यूपीए को 218 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को केवल 181 सीटें मिलीं। हालांकि, प्रधानमंत्री पद के लिए सोनिया गांधी के नाम की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया।

मनमोहन सिंह बने प्रधानमंत्री
13 मई को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए डॉ. मनमोहन सिंह का नाम प्रस्तावित किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। 22 मई 2004 को, पांच दिनों की चर्चाओं और सहमति के बाद, डॉ. मनमोहन सिंह ने भारत के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

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