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भारत के हाथ से फिसले 2 मेडल… लक्ष्य सेन हारे, शूटिंग में भी मिली निराशा

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पेरिस:

भारत के हाथ से आज दो मेडल फिसले हैं. लक्ष्य सेन तो ब्रॉन्ज जीतने से चूके ही, शूटिंग में भी भारत को निराशा हाथ लगी. महेश्वरी चौहान और अनंतजीत सिंह स्कीट मिक्स्ड टीम इवेंट में कांस्य पदक नहीं जीत पाए. अनंतजीत-महेश्वरी को ब्रॉन्ज मेडल मैच में चीनी खिलाड़ियों ने हरा दिया. भारत ने पेरिस ओलंपिक में अब तक तीन ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं, जो निशानेबाजों ने दिलाए हैं.

22 साल के युवा भारतीय शटलर लक्ष्य सेन पेरिस ओलंपिक में इतिहास रचने से चूक गए। मेंस बैडमिंटन के ब्रॉन्ज मेडल मैच में मलेशिया के ली जी जिया के खिलाफ पहला गेम जीतने के बावजूद 13-21, 16-21 और 11-21 से मेडल मैच हार गए। अगर लक्ष्य सेन यह मुकाबला जीत जाते तो ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मेंस शटलर बन जाते। आजतक ओलंपिक में कोई भी भारतीय पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी मेडल नहीं जीत पाया है। लक्ष्य सेन की हार के साथ ही बैडमिंटन में भारतीय चुनौती समाप्त हो गई।

लड़कर हारे लक्ष्य सेन
पहला गेम एकतरफा अंदाज में 21-13 से जीतने के बाद दूसरे गेम में भी लक्ष्य सेन का दबदबा साफतौर पर देखा जा सकता था। पूरे मैच में मलेशिया के ली जी जिया पहली बार दूसरे गेम में ही लीड ले पाए, जब उन्होंने पीछे से आते हुए स्कोर 9-8 किया, ये लीड देखते ही देखते उनके पक्ष में 12-8 हो गई, लक्ष्य सेन ने लगातार चार पॉइंट लेते हुए वापसी की पूरी कोशिश की, लेकिन दूसरा गेम वह 16-21 से हार गए। तीसरे गेम में ली जी जिया ज्यादा अटैकिंग हो गए। 10-5 से बढ़त बनाने के बाद उन्होंने 21-11 से लक्ष्य को हरा दिया।

शूटिंग में ब्रॉन्ज से चूके भारतीय शूटर्स
महेश्वरी चौहान और अनंतजीत सिंह स्कीट मिक्स्ड टीम इवेंट में कांस्य पदक जीतने से चूक गए. अनंतजीत-महेश्वरी को ब्रॉन्ज मेडल मैच में चीन के जियांग यिटिंग और लियु जियानलिन ने 44-43 से हराया.

पिता और दादा भी बैडमिंटन खिलाड़ी
लक्ष्य सेन का जन्म 16 अगस्त 2001 को उत्तराखंड के अलमोड़ा में हुआ। बैडमिंटन उन्हें विरासत में मिली। डीके सेन अपने दौर के नामी खिलाड़ी थे। दादा चंद्र लाल सेन भी आजादी के दौर में दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी रहे। महज पांच साल की उम्र में लक्ष्य पहली बार अपने पिता का हाथ थामकर बैडमिंटन कोर्ट पहुंचे थे। उत्तराखंड में ज्यादा सुविधा न होने के चलते पिता ने सात साल की उम्र में लक्ष्य और उनके बड़े भाई को बेंगलुरु भेज दिया। जहां प्रकाश पादुकोण एकेडमी में लक्ष्य की बैडमिंटन स्किल्स और पॉलिश हुई।

बैडमिंटन में भारत ने जीते अबतक तीन मेडल
ओलंपिक इतिहास में बैडमिंटन को अबतक जो तीन मेडल मिले हैं, वो सभी महिला शटलर्स के गले में ही सजे हैं। लंदन ओलंपिक 2012 में साइना नेहवाल ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था जबकि पीवी सिंधु ने लगातार दो ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीते। 2016 रियो ओलंपिक में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया तो 2020 तोक्यो ओलंपिक के फाइनल में हारकर उन्हें रजत पदक मिला था।

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