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‘मेडल देश का होता है, कोई भी लाए…’, 50KG कैटेगरी में विनेश के लड़ने पर बोलीं शिवानी पवार

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नई दिल्ली,

पेरिस ओलंपिक में भारतीय रेसलर विनेश फोगाट को 100 ग्राम वजन ज्यादा होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था. ये मामला अभी भी सुर्खियों में है. विनेश फोगाट के डिस्क्वालिफाई होने पर मध्य प्रदेश की रेसलर शिवानी पवार ने कहा कि वह भी पेरिस ओलंपिक में कुश्ती के लिए महिला कैटेगरी में दावेदार थीं लेकिन ओलंपिक में विनेश फोगाट को भेजा गया. हालांकि उन्होंने कहा कि वह विनेश के सपोर्ट में हैं और उन्हें सिल्वर मेडल मिलना चाहिए.

शिवानी अंडर-23 कुश्ती वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारत की पहली रेसलर बनी थीं. विनेश फोगाट के अयोग्य घोषित होने पर शिवानी पवार ने कहा, ‘पेरिस ओलंपिक में 50 किग्रा की परफॉर्मेंस शानदार थी. विनेश ने एक ओलंपिक चैंपियन को हराया. 53 से 50 किग्रा में आकर लड़ना, खुद में ही एक बहुत बड़ा संघर्ष है. हमारी रेसलिंग में वजन कम करना कुश्ती लड़ने से ज्यादा मुश्किल है.’

‘बहुत मायने रखता है 100 ग्राम वजन’
उन्होंने कहा, ‘जब वजन लास्ट रेंज में आकर 100-200 ग्राम रुक जाता है, ये नर्क से भी बदतर टाइम होता है. 100 ग्राम वजन बहुत मायने रखता है बल्कि 50 ग्राम वजन भी बहुत मायने रखता है. हम सब विनेश के सपोर्ट में हैं. उसकी परफॉर्मेंस से हमारा कॉन्फिडेंस बहुत बढ़ा है. लास्ट टाइम मेरा और विनेश का बहुत क्लोज बाउट हुआ था. उसकी इतनी अच्छी परफॉर्मेंस का मतलब हमारा लेवल बहुत अप है.’

शिवानी ने कहा, ‘ओलंपिक जैसे गेम में जाकर इतना अच्छा परफॉर्म करना और दिखा देना कि भारत अब बराबरी में आने के लिए तैयार है… ये दुख की बात है कि उसका वजन नहीं आ पाया. विनेश बहुत अनुभवी खिलाड़ी है. उसके पास बहुत सी उपलब्धियां हैं. ओलंपिक उनका ड्रीम है. हो सकता है उन्हें ये मिल भी सकता है, मैं इसके लिए दुआ करूंगी. वो इसकी हकदार हैं.’

‘नियमों को तोड़ा गया’
शिवानी से पूछा गया, कुश्ती के अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार आर्टिकल 7 कहता है कि ट्रायल में जो जिस वजन कैटेगरी का होता है, उसी में ट्रायल होता है. विनेश ने दो कैटेगरी में ट्रायल दिया, 50 किग्रा और 53 किग्रा. 50 किग्रा में आप भी लड़ रही थीं. उस वक्त क्या हुआ था?

जवाब में उन्होंने कहा, ‘अब देश की बात है, ओलंपिक में मैं जाऊं या विनेश, मेडल कोई भी लेकर आए, विनेश लाए या शिवानी, मेडल देश का होता है. ठीक है, मेरा भी सपना था जाने का. मैं तीन साल से उसकी तैयारी कर रही हूं. एक लंबे अरसे तक मैंने उसका इंतजार किया. मैंने कभी सोचा नहीं था कि विनेश 53 का वेट छोड़कर 50 में आएगी. वहां पर भी नियम थोड़े टूटे थे. सब IOC के हाथ में था, फेडरेशन शामिल नहीं थी. उस चीज का काफी विवाद हुआ.’

‘पहले कहा मौका देंगे लेकिन बाद में वो भी नहीं दिया’
शिवानी ने कहा, ‘हमने फेडरेशन और UWW में इस मुद्दे को उठाया था. लेकिन उस टाइम सब नहीं देखा गया. बाद में फेडरेशन ने कहा भी कि कोई बात नहीं, क्वालिफाई कोई भी करे, आपको एक मौका दिया जाएगा लेकिन बाद में वो मौका भी नहीं दिया गया. हमारा सपना तो है ही लेकिन फिर भी देश के लिए मेडल आना जरूरी है. मेडल आना जरूरी था, चाहें वो कोई भी लेकर आए, विनेश या शिवानी मेडल आना जरूरी था. रेसलिंग में अगर मेरे वेट कैटेगरी से सिल्वर मेडल आ रहा है तो मैं बहुत खुश हूं.

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