अहमदाबाद
आईसीसी वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला लाल मिट्टी वाली पिच पर खेल जाएगा। नरेंद्र मोदी स्टेडियम की इस पिच को नवसारी जिले के गणदेवी तहसील में पाई जाने वाली लाल मिट्टी के इस्तेमाल से बनाया गया है। पिच के निर्माण में जिस खेत की मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। वह बीजेपी के नेता हैं। वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले से पहले अशोक भाई धोरजिया ने टीम इंडिया को जीत की शुभेच्छा व्यक्त की है। धोरजिया का कहना है कि उनके खेत की लाल मिट्टी से अभी तक जहां-जहां पिच बनाई गई हैं। वहां टीम इंडिया की जीत का रिजल्ट अच्छा है। ऐसे में उन्हें पूरी उम्मीद है कि टीम इंडिया कमाल करेगी और कल रात 11 बजे रोहित शर्मा के हाथों में वर्ल्ड कप की ट्रॉफी होगी।
क्या है इस मिट्टी की खूबी
गुजरात के दक्षिण में नवसारी जिला पड़ता है। इस जिले में एक गढ़देवी नाम की तहसील है। यहां रहने वाले अशोक धोरजिया के खेत से निकलने वाली मिट्टी से वडोदरा, मुंबई, अफ्रीका और अहमदाबाद समेत जगह के स्टेडियम की पिचें बनाई गई हैं। इस मिट्टी की खासियत है कि पिच में जल्दी से दरारें नहीं आती हैं। अशोक धाेरजिया ने नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बातचीत में कहा कि देश में लाल मिट्टी काफी जगह पर मिलती है लेकिन उनके खेत में पाई जाने वाली मिट्टी में कुछ कुदरती कमाल है कि इससे बनने वाली पिच काफी स्ट्रांग रहती है। यही वजह है कि अब तक काफी जगहों ने पिच निर्माण के मिट्टी ले जाई जा चुकी है।
टीम इंडिया को मिलेगी जीत
गणदेवी के पथरी गांव की मिट्टी से बनी पिच पर विश्वकप का फाइनल मुकाबला खेले जाने नवसारी के लोगों में जोश है। खेत के मालिक अशोक धोरजिया बीजेपी के नेता भी हैं। वे कहते हैं कि इस मिट्टी से पहले खपरैल का निर्माण होता है, लेकिन पिछले काफी समय से इस मिट्टी का इस्तेमाल पिच के निर्माण में हो रहा है। धोरजिया कहते हैं कि पिच क्यूरेटरों के लिए अभी यह मिट्टी हॉट फेवरेट है, क्योंकि इससे पिच मजबूत बनती है। अक्सर कुछ ओवरों के बाद पिच में दरार पड़ने लगती है, लेकिन इस लाल मिट्टी से बनी पिचों में कम दरारें आती हैं। इस मिट्टी से बनी पिच पर 90 ओवर आसानी से फेंके जा सकते हैं। इस मिट्टी की पिच से बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों को मदद मिलती है। सामान्य पिच में कई बार गेंद के गिरने के जिस तरह से वह उछलती है तब बल्लेबाज को दिक्कत आती है, लेकिन लाल मिट्टी से बनी पिच में बॉल को देखने में समस्या नहीं आती है।
