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Thursday, May 7, 2026
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तुम गोल्ड थी, गोल्ड रहोगी, मंजिलें अभी और हैं.. एक बाधा से तुम नहीं टूट सकती विनेश!

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आज भारत की सुबह बेहद खास थी। गांव के गली-कूचे से मेट्रो सिटी के ऑफिस की मीटिंग तक शायद ही कोई ऐसा रहा होगा, जिसने विनेश फोगाट का नाम नहीं लिया होगा। हर कोई खुश था। हो भी क्यों नहीं, भारत की बेटी ने रात को इतिहास जो रचा था। पेरिस ओलंपिक में महिलाओं की कुश्ती प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचने वाली पहली पहलवान बनी थीं। हर किसी को आज गोल्ड की उम्मीद थी। ऐसा इसलिए नहीं कि विनेश फाइनल में पहुंची थीं, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने सभी मुकाबले दमदार अंदाज में जीते थे। उन्हें हर कोई फाइटर बता रहा था। सोशल मीडिया पर वह छाई हुई थीं, लेकिन अचानक एक खबर आई और एक झटके में वक्त और जज्बात बदल गए।

एक ओर हर कोई पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट की ऐतिहासिक दांवों से हर कोई खुश था और उनसे गोल्ड की आस लगाए बैठा था, लेकिन किसको पता था कि विरोधी पहलवानों को पटकनी देने वाली विनेश को वक्त के आगे झुकना पड़ेगा। गोल्ड से मात्र एक कदम दूर विनेश ओलंपिक फाइनल से डिसक्वालीफाई हो चुकी हैं और इसका कारण मात्र उनका अधिक 150 ग्राम वजन है। शायद इसी को वक्त कहते हैं और यह वक्त की खासियत है। यह कभी भी पलट सकता है…। जिसे गोल्ड मेडल इवेंट में उतरना था उसे हॉस्पिटल जाना पड़ा।

विनेश ने ओलंपिक के लिए तैयारी की थी। वह नाम की पहलवान नहीं हैं, बल्कि निजी जिंदगी में भी वह पहलवान हैं। छोटी उम्र में पिता को खोने वाली विनेश ने रेसलिंग फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। कुश्ती में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घुटनों पर ला दिया। हर बात मानने को मजबूर किया। बृजभूषण शरण सिंह जैसे कद्दावर नेता और लंबे समय तक भारतीय कुश्ती पर राज करने वाले प्रशासक को एक झटके में उखाड़ फेंका। यही वजह है कि जब वह फाइनल में पहुंचीं तो उनके सपोर्ट में करोड़ों हाथ खड़े हो गए। सोशल मीडिया पर हर कोई तारीफ कर रहा था।

इस बीच इस खबर ने हर किसी को तोड़ दिया। भारत में बैठा हर शख्स जब इतना निराश है तो इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती कि विनेश फोगाट किस दौर से गुजर रही होंगी। रातभर वजन कम करने की कोशिश में उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। उनकी निराशा को शब्दों नहीं बया किया जा सकता है। यह वो वक्त है जब उन्हें सबसे अधिक सपोर्ट की जरूरत है। यही वजह है कि पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी तक हर किसी ने बेटी को भावनात्मक सपोर्ट किया है। हर किसी ने दिलासा दी है कि टूट न जाना।

देखा जाए तो ओलंपिक में फाइनल तक का सफर तय करना भारत की इस बेटी के लिए आसान नहीं था। उसे प्री-क्वार्टर में ही 4 बार की विश्व चैंपियन और पिछले ओलंपिक की गोल्ड मेडलिस्ट का सामना करना था। विनेश के चाचा और बचपन के कोच महावीर फोगाट का मानना था कि ये मैच गोल्ड की लड़ाई है। एक चुनौतीपूर्ण मुकाबले में विनेश ने सुसाकी को 3-2 से हराया। सुसाकी ने अपने करियर के सभी 95 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीते थे। लेकिन, विनेश ने सुसाकी को उन्हीं के पैंतरे से मात दी। क्वार्टर फाइनल में विनेश ने कड़ी टक्कर में यूक्रेन की लिवाच को 7-5 से हराया और सीधे सेमीफाइनल में एंट्री मारी।

सेमीफाइनल मुकाबले में विनेश के खिलाफ क्यूबा की रेसलर गुजमन लोपेज थी। सिर्फ 6 मिनट तक चलने वाले रेसलिंग मैच में विनेश ने 5-0 से जीत दर्ज करते हुए फाइनल में जगह बनाई। विनेश की फॉर्म देखकर ये साफ था कि वो गोल्ड की प्रबल दावेदार हैं लेकिन भाग्य का साथ नहीं मिलने के कारण वो इस ऐतिहासिक जीत से चूक गईं। विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक में डिस्क्वालीफाई घोषित किया गया है। वह 50 किलोग्राम रेसलिंग के फाइनल में पहुंची थी। उनका इवेंट के दूसरे दिन 50 किलोग्राम वर्ग में अधिक वजन पाया गया। कहा जाता है वक्त हर दर्द को भर देता है। विनेश फोगाट फाइटर हैं। हम सभी की शुभकामनाएं हैं कि वह पिछले मौकों की तरह इसे भी पीछे छोड़कर फाइटर की तरह वापसी करें। अगले ओलंपिक की तैयारी करें और इस अधूरे सपने को पूरा करें।

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