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हरियाणा: अगर एग्जिट पोल सही निकले तो क्या केंद्र में बचेगी मनोहर लाल की कुर्सी? जानें

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चंडीगढ़:

हरियाणा विधानसभा चुनावों की वोटिंग के बाद आए सभी एग्जिट पोल ने बीजेपी के सत्ता से बाहर होने का अनुमान पेश किया है। अगर एग्जिट पोल के नतीजे परिणाम में तब्दील होते हैं तो निश्चित तौर बीजेपी के लिए महाराष्ट्र और झारखंड के चुनावों से पहले मुश्किल बढ़ेगी तो वहीं दूसरी तरफ इनका प्रभाव राज्य के साढ़े नौ साल सीएम रहे मनोहर लाल पर भी पड़ने की उम्मीद की जा रही है। हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल 2014 में सरप्राइज देते हुए पहली बार के विधायक होते हुए सीधे सीएम बने थे। 2019 के चुनावों में उन्होंने पूरे प्रदेश में जन आशीर्वाद यात्रा निकली थी। इसमें उन्हाेंने भेदभाव और जातिवाद की सभी बेड़ियां खोल रहा हूं, हरियाणा एक-हरियाणावी ये भेद में कब से खोल रहा हूं। मैं मनोहर लाल बोल रहा हूं… के जरिए किसी तरीके से सत्ता में वापसी कर ली थी।

दांव पर सियासी भविष्य
2024 के विधानसभा चुनावों बीचे के अधिकतम 30 सीटों तक पहुंचने का अनुमान है। पार्टी 20 से 25 सीटों तक भी सिमट सकती है अगर एग्जिट पोल के अनुमान नतीजों में परिवर्तित हुए। ऐसे में प्रदेश के नेताओं में किसी एक को नेता विपक्ष का पद मिल सकता है। नायब सैनी के लाडवा से जीतने से पर उनकी दावेदारी भी मानी जा रही है लेकिन वर्तमान में मोदी सरकार का हिस्सा और ऊर्जा मंत्री के साथ शहरी विकास मंत्री का दायित्व संभाल रहे मनोहर लाल के ऊपर भी इन नतीजों का असर पड़ने की चर्चा है। राजनीतिक हलकों में दावा किया जा रहा है कि यकीनन इन नतीजों से उनका कद ही नहीं बल्कि सियासी भविष्य तय होगा।

करनाल में हुआ खेला तो बढ़ेंगीं मुश्किलें
एग्जिट पोल और एजेंसियों के फीडबैक के बीच दावा किया जा रहा है कि करनाल की जिस सीट से सीएम मनोहर लाल दो बार जीते और फिर नायब सैनी जीते। वहां पर भी कांग्रेस को जीत मिल सकती है। कांग्रेस ने पूर्व विधायक सुमिता विर्क को उतारा है। बीजेपी से जगमोहन आनंद चुनाव मैदान में हैं। वे मनोहर लाल के खास माने जाते हैं। चर्चाएं यहां तक हैं कि कांग्रेस की इस सीट पर बड़ी जीत हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो मनोहर लाल का न सिर्फ सियासी तौर पर कद घटेगा, बल्कि इसके बाद वह कितने दिनों तक पीएम मोदी के प्रिय रहे पाएंगे। यह देखने वाली बात होगी। अभी तक पीएम मोदी ने पुरानी नजदीकी के चलते मनोहर लाल अपने विरोधियों पर भारी पड़ते आए हैं।

तंवर प्रकरण ने कराई किरकरी
विधानसभा चुनावों में मूमेंट ऑफ कैंपेंन बने अशोक तंवर के प्रकरण से मनोहर लाल को धक्का लगा है। मनोहर लाल की हरी झंडी और पहल पर अशोक तंवर को बीजेपी में एंट्री और सिरसा से लोकसभा का टिकट मिला था। अगर हरियाणा में बीजेपी की करारी शिकस्त होती है और करनाल में कांग्रेस जीत दर्ज करती है तो निश्चित तौर पर मनोहर लाल के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी। उनके विरोधी न सिर्फ हावी होंगे बल्कि हार का ठीकरा भी उनके सिर पर फोड़ने की कोशिश करेंगे। मनोहर लाल अभी केंद्र में मंत्री जरूर हैं लेकिन सरकार के पहले 100 दिनों में वह कोई बड़ी छाप नहीं छोड़ पाएं हैं।

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