11.8 C
London
Tuesday, February 24, 2026
Homeराज्यआखिर उन 9 लाशों का कौन जिम्मेदार? 32 साल बाद पनवारी कांड...

आखिर उन 9 लाशों का कौन जिम्मेदार? 32 साल बाद पनवारी कांड के 8 आरोपी बरी

Published on

आगरा

उत्तर प्रदेश आगरा के गांव पनवारी में हुए जातीय संघर्ष के बाद दलितों ने हिंदुओं के त्योहारों को नहीं मनाने का ऐलान कर दिया था। कांड के कुछ दिनों बाद पहला त्योहार हरियाली तीज था, जिसे न मनाने के लिए आगरा के दलित नेताओं में हिंदुओं के त्योहारों को बहिष्कार किया। दलित खासतौर पर जाटव समाज के किसी भी घर में तीज का त्योहार नहीं मनाया गया। बस्तियों में झूले नहीं पड़े और ही मेहंदी आदि की रस्मों की अदाएगी हुई। इसके बाद रक्षाबंधन का त्योहार आया। इसे भी नहीं मनाया गया। आलम यह रहा है कि दुकानों से राखियां भी नहीं खरीदी गईं और न ही बहनों ने अपने भाइयों के हाथों में राखी बांधी थीं। मिठाइयों की दुकानों पर बिक्री नहीं हुई। इस बहिष्कार का असर दीवाली तक देखा गया।

22 जून 1990 में हुए पनवारी कांड मामले में 32 साल बाद आए कोर्ट के फैसले ने दलितों के घावों को कुरेद कर रख दिया है। साक्ष्यों और गवाहों के अभाव में आठ लोगों को अदालत ने बरी कर दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता समाजसेवी सुरेश चंद सोनी का कहना है कि पनवारी कांड में विभिन्न दलों ने नेताओं ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेकी थीं। मायावती दलितों की बड़ी हिमायती बनती हैं। जिन्होंने संसद में चिल्ला-चिल्लाकर कहा था कि पनवारी में दलित महिलाओं के साथ अत्याचार हुआ है, लेकिन जब उनकी सरकार बनी तो इस कांड के मुख्य आरोपी चौधरी बाबूलाल को मंत्री पद दे दिया। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट तक जाएंगे।

दलित नेताओं पर हुआ था हमला
पनवारी गांव के रहने वाले चोखेलाल जाटव की बेटी मुंद्रा की बरात की चढ़ाई के विरोध में जाट समाज के लोगों ने विद्रोह कर दिया था। 21 जून की शादी थी। विरोध की जानकारी होने पर आगरा के दलित नेताओं ने जाट समुदाय के लोगों के साथ आपसी सामंजस्य बैठाने की बात की। दयाकिशन जरारी के भाई श्याम जरारी ने बताया कि बैठक में आगरा से उनके भाई दयाकिशन जरारी, श्रम कल्याण मंत्री रहे रामजीलाल सुमन, विधायक बदन सिंह, करतार सिंह भारतीय, सुभाष भिलावली, श्रीराम राम भाई सोनकर, हाजी इस्माइल कुरैशी आदि लोग पनवारी गांव पहुंचे थे। घटना 22 जनू की है, जब जाट समुदाय के लोगों की इसकी जानकारी हुई तो हथियारों से लैस होकर उन्होंने जाटव समुदाय के लोगों पर हमला बोल दिया। पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। इस घटनाक्रम में नौ लोगों की जान चली गई। श्रीराम भाई सोनकर की तो लाश का भी पता नहीं चला। इस्माइल कुरैशी ने जब अपने कपड़े उतारकर बताए कि वे मुस्लिम हैं, तब उन्हें छोड़ा गया।

कोर्ट के निर्णय से दलितों में असंतोष
नवभारतटाइम्स के पत्रकार रहे स्नेही किंथ का कहना है कि पनवारी कांड के दौरान रिपोर्टिंग पर थे। उन्होंने बताया कि यह कोई आपराधिक घटना नहीं थी। पुरातन व्यवस्था के खिलाफ जंग का ऐलान था। जिस तरह से आम लोगों ने बहन बेटियों की बरात चढ़ाई जाती है। उसी तरह से जाटव समाज भी अपनी बरात को चढ़ाने की कह रहे थे, लेकिन जाटों के साथ आसपास के सवर्ण समाज ने भी इसका विरोध किया था। यही वजह रही कि इस विद्रोह को हवा मिल गई और ये पनवारी कांड बन गया। कोर्ट ने जो निर्णय दिया है। इसमें दलित समाज को इंसाफ नहीं मिला है। वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी सुरेश चंद सोनी का कहना है कि मुख्य गवाहों ने दलित समाज को धोखा दिया है।

त्योहारों के बहिष्कार से हुआ था नुकसान
वरिष्ठ पत्रकार स्नेही किंथ और समाजसेवी अधिवक्ता सुरेशचंद सोनी का कहना है कि पनवारी कांड के दौरान सवर्णों की एकजुटता ने दलितों में भी एकजुटता पैदा कर दी थी। त्योहारों के बहिष्कार में लालाओं की दुकानदारी पर काफी फर्क पड़ गया था। ऐसा ही हाल आगरा कांड 1978 में हुआ था।

Latest articles

विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु समुदाय महासम्मेलन में बोले मुख्यमंत्री भजनलाला शर्मा : शिक्षा और सशक्तीकरण सरकार की प्राथमिकता

जयपुर भजनलाल शर्मा ने कहा कि विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु समुदाय भारतीय संस्कृति का...

जबलपुर  ओवरब्रिज  हादसा: ठेकेदार ब्लैकलिस्ट, लोक निर्माण मंत्री ने दिए एफआईआर के निर्देश

भोपाल जबलपुर में तीन साल पहले बने रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का एक हिस्सा ढहने के...

उपभोक्ताओं को झटका: मध्यप्रदेश में महंगी हो सकती है बिजली

भोपाल मध्यप्रदेश के एक करोड़ से अधिक घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला समय...

राजधानी में ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ असुरक्षित तीन लाख का माल साफ

भोपाल राजधानी की पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवाएं बदमाशों के कारण असुरक्षित होती जा रही हैं। शहर...

More like this

गोविंदपुरा को विकास की नई सौगात: राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने किया 5.65 करोड़ के सड़क कार्यों का भूमिपूजन

भोपाल राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र में आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में...

विश्वास का प्रतीक होती हैं सहकारिता संस्थाएं: राज्यमंत्री श्रीमती गौर

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि...

ग्राम उत्थान शिविर’ से संवर रहा ग्रामीण राजस्थान

भोपाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की 'जनसेवा ही सर्वोपरि' की अवधारणा को साकार करते हुए प्रदेश...