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चुनाव में अखिलेश और चंद्रा बाबू तो चमक गए, मगर लोकसभा से गायब हुए चार क्षेत्रीय दल

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भुवनेश्वर:

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम चौंकाने वाले रहे। मोदी मैजिक, मुफ्त राशन और राम मंदिर के बदौलत पूर्ण बहुमत का दावा करने वाली बीजेपी 240 सीटों पर अटक गई। कांग्रेस का नंबर भी 99 पर अटक गया। 10 साल बाद एक बार फिर देश में गठबंधन की सरकार का दौर लौट आया। चुनाव में कई क्षेत्रीय दलों को पुनर्जन्म मिला तो कई पार्टियों के सामने अस्तित्व का संकट आ गया। इनमें अधिकतर ऐसे दल थे, जो चुनावों में किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं रहे। यूपी समेत पूरे देश में फुटप्रिंट रखने वाली बीएसपी का नामोनिशान मिट गया। ओडिशा में 25 साल तक एकछत्र राज्य करने वाला बीजू जनता दल का एक उम्मीदवार भी संसद नहीं पहुंच सका। तमिलनाडु की एआईएडीएमके भी अपनी इकलौती सीट खोकर शून्य पर पहुंच गई। सबसे अधिक आश्चर्यजनक परिणाम तेलंगाना में रहे, जहां जनता ने राज्य की 17 सीटें बीजेपी और कांग्रेस के बीच आधी-आधी बांट दी। तेलंगाना के हीरो रहे केसीआर की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) का खाता नहीं खुला।

10 से शून्य पर पहुंची मायावती की बहुजन समाज पार्टी
18वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में कई क्षेत्रीय दल ताकतवर बनकर उभरे। 2019 में पांच सीटों पर सिमटी समाजवादी पार्टी ने तो कमाल कर दिया। अखिलेश यादव ने 37 सीटें जीतकर न सिर्फ सपा को राजनीति के सेंटर में ला दिया बल्कि बीजेपी को पूर्ण बहुमत से पीछे धकेल दिया। यूपी में बीजेपी को 29 सीटों का नुकसान हुआ। यूपी का दूसरा क्षेत्रीय दल बसपा का बुरा हश्र हुआ। 2019 में 10 सीटें जीतने वाली मायावती की बहुजन समाज पार्टी का खाता भी नहीं खुला। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीएसपी सिर्फ एक सीट पर जीतने में कामयाब हुई थी। उसका वोट प्रतिशत भी 9.39 फीसदी पर सिमट गया। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के कोर वोटर समाजवादी पार्टी की ओर शिफ्ट कर गए। बीएसपी चुनाव में किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं रही। पार्टी प्रमुख मायावती ने इंडिया गठबंधन में शामिल होने के निमंत्रण को ठुकरा दिया था।

लोकसभा में नजर नहीं आएंगे बीजू जनता दल के सांसद
लोकसभा चुनाव में दूसरा अप्रत्याशित परिणाम ओडिशा में रहा। ओडिशा में विधानसभा और लोकसभा चुनाव साथ-साथ हुए। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा की 20 और विधानसभा की 78 सीट जीतकर क्षेत्रीय पार्टी रही बीजेडी को बड़ा झटका दिया। नवीन पटनायक साल 1998 से बीजू जनता दल को केंद्र और राज्य में कायम रखा, मगर 2024 के चुनाव में 37.53 प्रतिशत हासिल करने के बाद भी पार्टी एक सीट भी नहीं जीत सकी। बीजेडी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब लोकसभा में उसके प्रतिनिधि नहीं होंगे। विधानसभा चुनाव में बीजेडी को 40 फीसदी वोट मिले और पार्टी 51 सीटें जीतकर विधानसभा में विपक्ष बन गई। बीजू जनता दल भी एनडीए या इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं रही।

तमिलनाडु में एआईडीएमके के हाथ खाली
क्षेत्रीय दलों में शामिल तमिलनाडु की एआईडीएमके को भी लोकसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा। इस चुनाव में वह अपनी एकमात्र सीट भी खो बैठी। उसे सिर्फ 20.46 फीसदी वोट मिले। चुनाव से पहले एआईएडीएमके ने बीजेपी के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया था। डीएमके के कारण वह इंडिया गठबंधन से भी दूर रही। 2024 के लोकसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाली इंडिया गठबंधन ने राज्य की सभी 39 सीटों पर कब्जा कर लिया। इंडिया गठबंधन में कुल सात पार्टियां शामिल रहीं। इसके अलावा तमिलनाडु की एस. रामदास की पीएमके को भी निराशा ही मिली।

तेलंगाना में केसीआर के बीआरएस को लगा झटका
लोकसभा चुनाव में तेलंगाना के नतीजे ने सबसे ताकतवर रहे क्षेत्रीय दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को सबसे तगड़ा नुकसान हुआ। विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव में केसीआर की ताकत खत्म हो गई। उसे 16.68 प्रतिशत वोट मिले मगर लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीआरएस को कुल 9 सीटें जीती थीं। इस बार राज्य की 17 सीटों में 8 पर बीजेपी और 8 पर कांग्रेस कांग्रेस को जीत मिली। एक सीट एआईएआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कब्जा किया। बीजेपी ने 35.08 प्रतिशत वोट हासिल कर बीआरएस के लिए तगड़ी चुनौती खड़ी कर दी।

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