पटना
बाबा साहब भीम राव अंबेडकर किसी न किसी बहाने आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। उनकी तारीफ और स्मरण कर सियासी दल कई बार सत्ता तक पहुंचने में कगामयाब हो जाते हैं। कामयाब नहीं भी हुए तो दूसरे का खेल तो बिगाड़ ही देते हैं। देश में जब-जब संविधान और आरक्षण पर बहस छिड़ती है, अंबेडकर अनायास चर्चा के केंद्र में होते हैं। इन दिनों संसद में संविधान पर चर्चा को लेकर अंबेडकर केंद्र में आ गए हैं।
अमित शाह को देनी पड़ी सफाई
अंबेडकर को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिस अंदाज में टिप्पणी की, उसे विपक्ष ने उनका अपमान मान लिया। विपक्ष की ओर से भाजपा को आरक्षण विरोधी ठहराने की कोशिश शुरू हो गई। बात संसद से निकल कर सड़क पर आ गई है। अमित शाह को प्रेस कान्फ्रेंस कर अपनी बात स्पष्ट करनी पड़ी। उन्होंने बताने की कोशिश की कि कांग्रेस जिस आंडेकर के नाम को फैशन की तरह रट रही है, उसने सत्ता में रहते कभी उनका सम्मान नहीं किया। गांधी परिवार ने अपने लिए जीते जी भारत रत्न तो ले लिया, लेकिन संविधान निर्मात अंबेडकर के लिए यह उचित नहीं समझा। आज वही कांग्रेस अंबेडकर का नाम रट रही है और संविधान की दुहाई दे रही है।
शाह के साथ चिराग और मांझी
अमित शाह के सुर में अब बिहार के दो दलित नेता भी आ गए हैं। सीधे कहें तो वे शाह का बचाव कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी कहते हैं कि बाबा साहेब को कांग्रेस ने चुनाव हरवाकर सदन से बाहर करवा दिया था। अपने परिवार में तो कांग्रेस नेताओं ने भारत रत्न की झड़ी लगा दी, पर बाबा साहब को भारत रत्न मानने से इनकार कर दिया। आज जब हमारी सरकार ने बाबा साहेब को सम्मान दिया तो वह भी कांग्स नेताओं को नहीं पच रहा है। मांझी ने सदन में यह बात कही। साथ ही शाह के बचाव में यह भी कहा कि अंबेडकर साहब का भारत अमित भाई के साथ है।
चिराग को नहीं लगता अपमान
बिहार के दूसरे दलित नेता और लोक जनशक्ति पार्टी (आर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान भी अमित शाह के साथ खड़े दिखते हैं। उनका कहना है कि देश पर लंबे समय तक शासन करने के बावजूद कांग्रेस ने बाबा साहब का कभी सम्मान नहीं किया। कांग्रेस को बाबा साहब के सम्मान की इतनी ही चिंता थी, तो लंबे समय तक शासन के बावजूद क्यों नहीं सम्मान दिया? आज जब आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में बाबा साहब के जीवन से जुड़े अलग-अलग स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है तो प्रतिस्पर्धा में कांग्रेस बाबा साहब का नाम ले रही है।
असेंबली चुनाव में बनेगा मुद्दा
दिल्ली और बिहार में अगले साल ही विधानसभा का चुनाव होना है। चुनाव से पहले जिस तरह अमित शाह के बयान पर विपक्ष ने बवाल खडा किया है, उससे लगता है कि यह मुद्दा चुनाव तक जिंदा रहेगा। विपक्ष की पूरी कोशिश इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की होगी। बिहार के लिए इस तरह का मुद्दा पहले भी काफी संवेदनशील रहा है। लालू प्रसाद यादव ने 2015 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण की समीक्षा संबंधी बयान पर भाजपा को भारी शकस्त दी थी। भारतीय जनमानस आरक्षण, संविधान और बाबा साहब केल प्रसंगों को अलग-अलग नहीं देखता है। उसे तीनों एक दूसरे के पर्याय लगते हैं।
पासवान-मांझी के लिए संकट
बिहार में अपने को दलित मुदाय का प्रतिनिधि मानने वाले चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अंबेडकर के मुद्दे पर अमित शाह के साथ खड़े हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी शाह का बचाव किया है। पर, बिहार में जातीय आधार पर होते रहे विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग और मांझी को दलित समुदाय के लोगों को विश्वास में लेना आसान नहीं होगा। इसलिए कि पहले से ही आरक्षण और संविधान के मुद्दे पर भाजपा को कठघरे में खड़ा करने वाले विपक्षी नेता भी इसे अंबेडकर का अपमान बता कर भुनाने से पीछे नहीं रहेंगे। इसका नुकसान भाजपा के साथ चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे दलित नेताओं को उठाना पड़ सकता है।
