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आशा ताई की दुआ, प्रफुल्ल पटेल का शरद प्रेम, 2025 में क्या एक होगी पवार फैमिली? संकेतों से समझिए

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बारामती

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मां आशा पवार ने नए साल के मौके पर पंढरपुर के विख्यात विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पूजा-अर्चना की। पूजा-पाठ के बाद आशा ताई ने कहा कि अब सारे विवाद खत्म होने चाहिए। शरद पवार और अजित पवार को फिर से एक होना चाहिए। इसके थोड़ी देर बाद एनसीपी के राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल का शरद पवार के प्रति श्रद्धा जताते हुए बयान आया। उन्होंने कहा कि शरद पवार हमारे देवता हैं। हम उनके लिए बहुत सम्मान रखते हैं। अगर पवार परिवार एक साथ आता है, तो हमें बहुत खुशी होगी। मैं खुद को पवार परिवार का सदस्य मानता हूं। इसके अलावा दोनों तरफ से कई नेताओं ने संकेत दिए कि 2025 में पवार फैमिली एक बार फिर एकजुट हो सकती है।

महाराष्ट्र की राजनीति में नए मोड़ की तैयारी
आशा पवार की मन्नत और प्रफुल्ल पटेल की बड़े पवार के प्रति श्रद्धा उस समय आई है, जब अजित पवार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मजबूत स्थिति में हैं। विधानसभा चुनाव में अजित पवार की एनसीपी को 41 सीटों पर जीत हासिल हुई, जबकि शरद पवार की एनसीपी-एसपी सिर्फ 10 पर सिमट गई। चाचा-भतीजे के बीच 36 सीटों पर आमने-सामने की टक्कर हुई, जिसमें अजित पवार ने 29 पर जीत हासिल की। अब अजित फिर से प्रदेश के डिप्टी सीएम हैं। शरद पवार के जन्मदिन पर अजित सपरिवार चाचा के घर पहुंचे और 45 मिनट तक गुप्त चर्चा की। इसके बाद से ही दोनों के एक होने के कयास लगने लगे। अब एनसीपी के नेताओं के बयान से इस चर्चा को हवा मिली है। अब माना जा रहा है कि आशा पवार की प्रार्थना महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है।

जितेंद्र आह्वाड और रोहित पवार नहीं चाहते मेल!
इसके अलावा एनसीपी विधायक नरहरि जिरवाल का बयान भी पवार परिवार के बीच की दूरियों को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। जिरवाल ने कहा कि जून 2023 में शरद पवार साहेब को छोड़कर आना अजीब लगा। पार्टी के कई लोग भी ऐसा ही महसूस करते हैं। अब मैं उनके पास जाऊंगा और उनसे अजित पवार के साथ आने का आग्रह करूंगा। एनसीपी प्रवक्ता अमोल मिटकरी ने कहा कि अगर दोनों पक्ष प्रयास करें तो चाचा-भतीजे एक साथ आ सकते हैं। मिटकरी ने बताया कि शरद के करीबी जितेंद्र आव्हाड और रोहित पवार इस एकजुटता में बाधा बन सकते हैं। वे दोनों को कभी एक साथ आते हुए नहीं देखना चाहेंगे। आशा ताई की प्रार्थना दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं की इच्छा शामिल है। सभी को लगता है कि हमें एक साथ आना चाहिए।

बीजेपी को भी नहीं है एकजुटता पर आपत्ति
इस संभावित मेलमिलाप पर जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि इस बारे में कोई भी फैसला लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। एकजुटता के बारे में पवार परिवार को खुद ही फैसला करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर आशा पवार कह रही हैं कि पवारों को एक साथ आना चाहिए, तो मैं क्या कह सकता हूँ? यह उनका पारिवारिक मामला है। उन्हें ही फैसला लेना होगा। मैं क्या सोचता हूं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। अजित पवार के सहयोगी बीजेपी को भी एनसीपी की एकजुटता पर आपत्ति नहीं है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि अगर दोनों पवार एक साथ आ रहे हैं, तो बीजेपी के लिए इसके विरोध करने का कोई कारण नहीं है। उन्हें फैसला करना है।

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