नई दिल्ली
असम और तमिलनाडु की सरकारों के बीच लीज पर लिए गए हाथियों को लेकर विवाद अब अदालतों में पहुंच गया है। तमिलनाडु द्वारा हाथियों को वापस करने से इनकार करने के बाद असम सरकार ने आज गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। हाथियों में भी विशेष रूप से मंदिर की हथिनी जॉयमाला को लेकर विवाद है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अलावा इन हाथियों का मामला मद्रास हाईकोर्ट में भी चल रहा है। गुरुवार को तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय से कहा कि वह असम सरकार से लिए गए हाथियों को वापस नहीं लौटाएगी। असम का दावा है कि उसने तमिलनाडु को जॉयमाला सहित नौ हाथियों को लीज पर दिया था।
असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने गुरुवार को कहा कि इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट में होगी। उन्होंने कहा, “हाथी हमारे हैं। हमारे मामले की सुनवाई कल गुवाहाटी हाईकोर्ट में होगी, अगर हमें अच्छा ऑर्डर मिलता है, तो ठीक है क्योंकि हाथी हमारे हैं। अगर मद्रास हाईकोर्ट भी अच्छा फैसला देता है, तो भी ठीक है। हम न्यायपालिका पर निर्भर हैं क्योंकि यह एक विवाद की तरह हो गया है।”
हाथियों को लेकर क्यों मचा है विवाद?
पशु अधिकार समूह पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) द्वारा एक वीडियो जारी करने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। वीडियो में दावा किया गया कि तमिलनाडु के एक मंदिर में जॉयमाला हथिनी के साथ क्रूरता की जा रही है। वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए, तमिलनाडु सरकार ने कहा कि जॉयमाला “बहुत अच्छी तरह से रह रही है” और पेटा के वीडियो के खिलाफ खुद से हथिनी का एक वीडियो ट्वीट किया।
ट्वीट पेटा इंडिया को टैग करते हुए कहा तमिलनाडु सरकार ने लिखा, “श्रीविल्लीपुथुर अंदल मंदिर में हथिनी जॉयमाला बिल्कुल अच्छी तरह से रह रही है। वर्तमान टीम द्वारा अच्छी देखभाल की गई है। स्नान की सुविधा भी बनाई गई है। सोशल मीडिया में कुछ नकली वीडियो प्रसारित हो रहे हैं। यह वीडियो आज (5.9.22) लिया गया है।”
