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अयोध्या राम मंदिर के आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा को मिला पद्मश्री सम्मान, जानें किसने सौंपा था काम?

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अहमदाबाद

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के शिल्पकार आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा को केंद्र सरकार ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाले चंद्रकांत सोमपुरा को विश्व हिंदू परिषद् (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल ने राम मंदिर का नक्शा बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। राम मंदिर आंदोलन के लंबा खिंचने के बाद एक बार सोमपुरा यह उम्मीद छोड़ दी कि उनके जीते हुए यह मंदिर बन पाएगा। पिछले साल जब अयोध्या में राम मंदिर में पीएम मोदी ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की थी तब चंद्रकांत सोमपुरा ने उसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा पल करार दिया था।

कौन हैं चंद्रकांत सोमपुरा?
चंद्रकांत सोमपुरा देश के जाने-माने मंदिर आर्किटेक्ट हैं। वह पूर्व में अक्षरधाम मंदिर का भी नक्शा बना चुके हैं। उनके द्वारा बनाए गए राम मंदिर का मॉडल अयोध्या में कार्यसेवकपुरम में रखा गया था। उन्हीं के मॉडल के अनुरूप ही राम मंदिर का निर्माण हुआ है। अहमदाबाद के चंद्रकांत भाई का संबंध एक ऐसे परिवार से है। जिन्हें पारंपरिक भारतीय नागर शैली के मंदिरों के डिजाइन बनाने में महारत हासिल है। गुजरात के विख्यात सोमनाथ मंदिर के आर्किटेक्ट उनके दादा प्रभाशंकर सोमपुरा थे। चंद्रकांत भाई के पिता भी देश के जाने माने आर्किटेक्ट रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर के मरम्मत का कार्य किया था। चंद्रकांत भाई के परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी देश के प्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण में अपना योगदान दे रही है।

अब तक 131 मंदिर की नक्शे बनाए
चंद्रकांत सोमपुरा अब तक अपने बेटे आशीष के साथ मिलकर देश के 131 मंदिर के नक्शे बना चुके हैं। इनमें स्वामी नारायण मंदिर गांधीनगर, अंबाजी टेंपल पालनपुर भी शामिल हैं। पिछले साल जनवरी में उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि यह हमारा परिवार ही था जिसने मथुरा, पालनपुर आदि जैसे अन्य मंदिरों के अलावा सोमनाथ मंदिर का डिज़ाइन तैयार किया था। हमारे लिए यह बहुत बड़ी बात है कि वही परिवार राम मंदिर का डिज़ाइन तैयार कर रहा है। यह हमारे लिए गर्व की बात है।

गिनीज बुक दर्ज हुआ था काम
चंद्रकांत सोमपुरा को 1997 में सर्वश्रेष्ठ आर्किटेक्ट घोषित किया गया था। उनके द्वारा लंदन में निर्मित अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण मंदिर को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया जा चुका है।आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई ने वास्तुकला में कोई व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है। इंटरमीडिएट के बाद उनके पिता ने उनकी पढ़ाई बंद करवा दी थी। इसका खुलासा उन्होंने खुद एक बातचीत में किया था। चंद्रकांत सोमपुरा ने मंदिर निर्माण की कला अपने दादा प्रभाशंकर सोमपुरा से सीखी है

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