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भ्रष्टाचार का महाकांड: एसोसिएटेड अल्कोहल पर करोड़ों की अवैध शराब तस्करी का आरोप, पूर्व कर्मचारी ने खोली पोल— आबकारी विभाग की मिलीभगत से बनते थे फर्जी परमिट, सरकार को हुआ करोड़ों का नुकसान

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बड़वाह से सचिन शर्मा

देश की नामी शराब कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार किसी ब्रांड लॉन्च को लेकर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, अवैध शराब तस्करी और सरकारी राजस्व की चोरी जैसे गंभीर आरोपों को लेकर। कंपनी के पूर्व कर्मचारी सत्यनारायण शर्मा ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए पुलिस महानिदेशक भोपाल को एक लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें आबकारी विभाग से मिलीभगत कर फर्जी परमिट के जरिए शराब की अवैध सप्लाई का आरोप लगाया गया है।

फर्जी परमिट बनाकर करोड़ों की शराब गायब

दिनांक 01 अप्रैल 2025 को दर्ज शिकायत में श्री शर्मा ने साफ कहा है कि कंपनी ने आबकारी अधिकारियों से साठगांठ कर फर्जी परमिटों के सहारे करोड़ों की शराब दूसरी जगहों पर उतार दी, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।

उनके मुताबिक परमिट क्रमांक 16/नल/05-06 दिनांक 06/02/2006 के तहत दीमापुर के लिए रवाना की गई शराब को गंतव्य तक पहुंचाए बिना कहीं और उतार दिया गया। यह खेप कुल 7128 बल्क लीटर और 5346 प्रूफ लीटर थी, जो 800 कार्टूनों में पैक थी और ट्रक नंबर HR 37 B 5321 द्वारा भेजी गई थी।

एक और परमिट 07/AP/07-08 दिनांक 03/08/2007 के तहत अरुणाचल प्रदेश के लिए रवाना शराब की 825 कार्टूनों में भरी सुपरमैन व्हिस्की को भी गंतव्य तक पहुंचाने की बजाय अवैध रूप से कहीं और उतार दिया गया।
गोवा और दीमापुर की खेपें भी सवालों के घेरे में शिकायत में यह भी बताया गया है कि दीमापुर की एक अन्य खेप और गोवा से संबंधित तीन अन्य परमिटों में भी इसी तरह की हेराफेरी की गई। माल भेजा जरूर गया लेकिन उतरा कहीं और।

गैस टैंकर में भरी थी ईएनए, पुलिस ने पकड़ा लेकिन कार्रवाई ठप

सबसे चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब एक गैस टैंकर (HR 38 E 5817) में 33000 बल्क लीटर ENA (Extra Neutral Alcohol) को रात के अंधेरे में भरकर रवाना किया गया, जिसे सिमरोल थाना प्रभारी श्री विवेक गुप्ता ने 17/09/2000 को पकड़ा था। यह टैंकर आज भी सिमरोल थाने में खड़ा है, लेकिन एसोसिएटेड अल्कोहल की पहुंच और प्रशासन में गहरी पकड़ के चलते अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

क्या आबकारी विभाग भी तस्करी के खेल में शामिल?

सबसे गंभीर सवाल यह उठता है कि क्या आबकारी विभाग इस पूरे तस्करी तंत्र में शामिल है? अगर ऐसा है तो यह मात्र एक कंपनी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का भ्रष्टाचार है। इस पर गंभीर जांच और कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।
“उत्पादन का आधा हिस्सा अवैध रूप से बेचा जाता था” – सत्यनारायण शर्मा
पूर्व कर्मचारी सत्यनारायण शर्मा का दावा है कि कंपनी रोज़ लगभग 5 लाख लीटर शराब का उत्पादन करती थी, लेकिन प्रशासन को केवल 2 लाख लीटर की रिपोर्ट दी जाती थी। बाकी शराब को आबकारी विभाग की मिलीभगत से अवैध रूप से बेचा जाता था।

यह भी पढ़िए: जागृत तीर्थ स्थल दादाजी धाम मंदिर में इको फ्रेंडली माटी गणेश की कार्यशाला — बच्चों महिलाओं और पुरुषों ने प्रतिमा निर्माण किया

द इंडिया स्पीक्स की पड़ताल जारी, आगे आएंगे और भी खुलासे

The India Speaks ने इस मामले में सत्यनारायण शर्मा से विशेष बातचीत की है, जिसमें उन्होंने और भी कई गंभीर खुलासे किए हैं। यह पड़ताल अब आगे और भी सच्चाइयों को सामने लाएगी। जल्द ही हम आपके सामने पेश करेंगे अगला हिस्सा, जिसमें नाम, तारीख, परमिट और अफसरों की भूमिका उजागर की जाएगी।

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