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Monday, April 27, 2026
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भगवंत मान सरकार के चार शानदार वर्ष पूरे होने पर खेल विभाग ने ‘भगवंत मान दे नाल’ कार्यक्रम के तहत प्रस्तुत किया रिपोर्ट कार्ड

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चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज ‘शानदार चार साल, भगवंत मान दे नाल’ कार्यक्रम के तहत खेल विभाग का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। इस दौरान उन्होंने ‘आप’ सरकार की खेल क्रांति से खेल क्षेत्र की तस्वीर बदलने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सिंचाई विभाग, स्वास्थ्य विभाग और कानून-व्यवस्था पर रिपोर्ट कार्ड पेश करने के बाद मुख्यमंत्री ने खेलों में बड़े सुधारों की अगली योजना का उल्लेख किया। इस योजना के तहत खेल बजट 350 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1791 करोड़ रुपये किया गया, कोचों की संख्या 500 से बढ़ाकर 2458 की गई और ओलंपिक की तैयारी के लिए 15 लाख रुपये तथा एशियाई खेलों के खिलाड़ियों के लिए 8 लाख रुपये की वित्तीय सहायता शामिल है।

इसका विवरण देते हुए मुख्यमंत्री ने 3100 खेल मैदानों के विकास, 3000 जिम, 17000 खेल किटों के वितरण और ‘खेडां वतन पंजाब दीयां’ के तेज़ी से विस्तार का उल्लेख किया। इस योजना में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या डेढ़ लाख से बढ़कर पांच लाख तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के चलते पंजाब ने इतिहास में पहली बार हॉकी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और 40 वर्षों बाद राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप अंडर-13 की मेजबानी प्राप्त की है, जिससे राज्य देश में खेलों के केंद्र के रूप में उभरा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एशियाई खेल 3-4 अक्टूबर को समाप्त होंगे और शीर्ष छह हॉकी टीमें इसमें हिस्सा लेंगी। पहली बार पंजाब को यह अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित करने का अवसर मिला है और यह खेल क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।” उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा राज्य के लिए चार-देशीय टूर्नामेंट के रूप में एक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता को मंजूरी दी गई है, जो राज्य में हॉकी को बढ़ावा देगी।”

इस टूर्नामेंट के महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हॉकी में पंजाबियों की सरदारी/ श्रेष्ठा होने के बावजूद राज्य ने अब तक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं की थी। पहली बार पंजाब अक्टूबर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा, जो एशिया का सबसे प्रतिष्ठित हॉकी टूर्नामेंट है।” उन्होंने बताया कि हॉकी मैच मोहाली के बलबीर सिंह सीनियर हॉकी स्टेडियम और जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बैडमिंटन चैंपियनशिप की वापसी की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, “40 वर्षों बाद राज्य को जालंधर में राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप (अंडर-13) की मेजबानी मिली है। यह टूर्नामेंट अंडर-13 वर्ग के लिए होगा और यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य में समग्र विकास और खेलों को बढ़ावा मिले।” उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार युवाओं की अपार ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने के लिए खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

पंजाब की महान खेल विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब ने कई महान खिलाड़ी पैदा किए हैं और राज्य का खेलों से सदियों पुराना संबंध है।” उन्होंने कहा, “हमारे सिख गुरुओं ने खेलों के माध्यम से न केवल आध्यात्मिकता बल्कि शारीरिक फिटनेस को भी बढ़ावा दिया। श्री गुरु अंगद देव जी ने खडूर साहिब में शारीरिक फिटनेस के लिए मल्ल अखाड़ा स्थापित किया और उनकी देखरेख में कुश्ती व व्यायाम होते थे। श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने युवाओं को घुड़सवारी और तीरंदाजी में निपुण बनाया। गुरु गोबिंद सिंह जी उस समय की सभी प्रकार की खेलों और युद्ध-कला में पारंगत थे। आज भी खालसे की जन्म भूमि आनंदपुर साहिब में हर साल होला मोहल्ला के अवसर पर पारंपरिक खेलों का शानदार प्रदर्शन होता है।”

आधुनिक खेलों में पंजाब के योगदान को दर्शाते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह, भारत की ऑस्ट्रेलिया टूर टीम के कप्तान हार्दिक सिंह, भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, भारतीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान पलप्रीत सिंह बराड़, भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान रह चुके गुरप्रीत सिंह संधू और हाल ही में टी-20 विश्व कप जीतने वाले अभिषेक शर्मा और अर्शदीप सिंह सभी पंजाब से हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये सभी खिलाड़ी राज्य और देश के लिए नाम कमा चुके हैं और युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पिछले वर्ष हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में एकदिवसीय विश्व कप जीता था, जिसमें अमनजोत कौर और हरलीन देओल जैसी खिलाड़ी शामिल थीं।” उन्होंने कहा, “हॉकी और पंजाब को एक ही सिक्के के दो पहलू माना जाता है और पंजाबी खिलाड़ियों के बिना भारतीय हॉकी की कल्पना करना असंभव है।” उन्होंने बताया, “50 से अधिक पंजाबी हॉकी खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं और 10 पंजाबी खिलाड़ियों ने ओलंपिक हॉकी में भारत की कप्तानी की है।” ऐतिहासिक उपलब्धियों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “बलबीर सिंह सीनियर और ऊधम सिंह ने तीन-तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते और अजीत पाल सिंह एकमात्र खिलाड़ी हैं जिनकी कप्तानी में 1975 में भारत ने हॉकी विश्व कप जीता।” उन्होंने आगे कहा, “प्रिथीपाल सिंह, सुरजीत सिंह, हरचरण सिंह और सुरिंदर सिंह सोढ़ी जैसे महान खिलाड़ी पंजाब के हैं।” उन्होंने बताया कि संसारपुर, खुसरोपुर और मिठापुर जैसे गांवों ने 20 से अधिक ओलंपियन पैदा किए हैं।

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