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पाकिस्तानी गोलीबारी को बताया बड़ी त्रासदी, पीड़ितों को दिया मदद का भरोसा, पूंछ में राहुल गांधी ने क्या किया?

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जम्मू

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तानी गोलीबारी से प्रभावित लोगों से मिलने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के पुंछ पहुंचे। गांधी ने पीड़ित परिजनों को आश्वस्त किया कि इस मुश्किल समय में वो उनके साथ हैं। स्कूली बच्चों से भी राहुल मिले और हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वो उनसे बहुत प्यार करते हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी त्रासदी है। इसमें कई लोग मारे गए। बड़े पैमाने पर संसाधनों को भी नुकसान पहुंचा है। हमने लोगों से मुलाकात की। उनका दुख-दर्द जाना। हमने लोगों की समस्या को समझने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान लोगों ने मुझे अपनी कुछ समस्याएं बताईं और मुझसे आग्रह किया कि इसे मैं राष्ट्रीय स्तर पर उठाऊं। मैं निश्चित तौर पर इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाऊंगा और मेरी कोशिश रहेगी कि इन लोगों की समस्या का समाधान किया जाए।

किससे मिले राहुल गांधी
कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने शनिवार को पहले कहा था कि गांधी एक गुरुद्वारा, एक मंदिर, एक मदरसा और एक ईसाई मिशनरी स्कूल सहित गोलाबारी से प्रभावित संरचनाओं का दौरा किया। वह शोकसंतप्त परिवारों और नागरिक समाज के सदस्यों से भी मिले। उन्होंने कहा कि गांधी पहले ऐसे राष्ट्रीय नेता हैं जो प्रभावित आबादी के प्रति एकजुटता व्यक्त करने और उनका दर्द साझा करने के लिए उनके पास पहुंचे हैं। गांधी ने पिछले महीने जम्मू-कश्मीर के अपने दौरे में कहा था कि आतंकवादी हमले के पीछे की अवधारणा देश के लोगों को विभाजित करने की थी और यह जरूरी है कि भारत एकजुट होकर आतंकवाद को हमेशा के लिए हरा दे।

राहुल गांधी का पुंछ दौरा
दरअसल लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पुंछ का दौरा किया और प्रभावित लोगों से एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। इनमें सात मई से 10 मई के बीच हुई गोलाबारी में अपने सदस्यों को खोने वाले परिवार भी शामिल थे। राहुल गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि यह एक बड़ी त्रासदी है। कई लोगों की जान चली गई। उन्होंने (पाकिस्तानी सेना ने) आम नागरिकों के स्थानों पर हमला किया है। मैंने लोगों से बात की और उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की। उन्होंने मुझसे उनके मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने को कहा है, जो मैं करूंगा।

पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा हूं-राहुल
उन्होंने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि पुंछ में पाकिस्तान की गोलाबारी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से आज मिला। टूटे मकान, बिखरा सामान, नम आंखें और हर कोने में अपनों को खोने की दर्द भरी दास्तान – ये देशभक्त परिवार हर बार जंग का सबसे बड़ा बोझ साहस और गरिमा के साथ उठाते हैं। उनके हौसले को सलाम है। गांधी ने कहा कि पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा हूं – उनकी मांगें और मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर जरूर उठाऊंगा। उनके साथ पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव जी ए मीर भी थे।

पूंछ में स्कूली बच्चों से क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने पुंछ में स्कूली बच्चों से भी मुलाकात की। उनसे कहा कि आप लोग घबराइए मत। इस मुश्किल वक्त में मैं आपके साथ खड़ा हूं। मैं आप लोगों से बहुत प्यार करता हूं। आप लोगों को टेंशन लेने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। कांग्रेस नेता ने स्कूली बच्चों से कहा कि आप लोग इस मुश्किल घड़ी से बाहर निकलने के लिए मन लगाकर पढ़ें और खूब दोस्त बनाएं। मैं आप सभी लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा।

पहलगाम अटैक के बाद भी गए थे राहुल
लोकसभा में विपक्ष के नेता का पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए नृशंस आतंकवादी हमले के बाद से केंद्र शासित प्रदेश का यह दूसरा दौरा है। उस आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी जिनमें से अधिकतर पर्यटक थे। गांधी ने आतंकवादी हमले में घायल हुए लोगों से मिलने के लिए 25 अप्रैल को श्रीनगर का दौरा किया था। उन्होंने उस दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई अन्य लोगों से मुलाकात की थी।

शनिवार सुबह जम्मू पहुंचे राहुल
कांग्रेस के एक नेता ने शनिवार सुबह बताया कि गांधी शनिवार सुबह जम्मू हवाई अड्डा पहुंचे और सीमा पार से की गई गोलाबारी से प्रभावित इलाकों का दौरा करने और शोकसंतप्त परिवारों से मिलने के लिए हेलीकॉप्टर से पुंछ रवाना हुए। पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर छह मई की देर रात सटीक हमले किए थे। इसके बाद से पुंछ सेक्टर में गोलाबारी बढ़ गई थी।

पाकिस्तानी गोलाबारी में 13 लोग अकेले पुंछ जिले में मारे गए
पाकिस्तान की ओर से सात से 10 मई के बीच जम्मू-कश्मीर में तोप से गोले दागे जाने और मिसाइल एवं ड्रोन हमले किए जाने के कारण 28 लोग मारे गए, जिनमें से 13 अकेले पुंछ जिले में मारे गए और 70 से अधिक घायल हो गए। नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों के पास के इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों ने अपने घर छोड़कर सरकारी राहत शिविरों में शरण ली। चार दिन तक सीमा पार ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रहने के बाद 10 मई को सैन्य टकराव समाप्त करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति बनी थी।

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