नई दिल्ली,
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए हैं और शुरुआती रुझानों में यूपी के नतीजे सबसे ज्यादा चौंकाने वाले हैं. यूपी में बीजेपी के सारे दावों को पछाड़ते हुए सपा 30 से ज्यादा सीटें जीतती नजर आ रही है. दूसरी और अगर बिहार की बात करें तो वहां बीजेपी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक रहा है. बिहार में एनडीए को करीब 33 सीटें मिलती दिख रही हैं. लेकिन इन रुझानों में चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) को बंपर फायदा पहुंचा है और उनका स्ट्राइक रेट 100 फीसदी दिख रहा है.
चाचा से किनारा, चिराग का सहारा
बिहार में एनडीए में बीजेपी 17 सीट के अलावा जेडीयू 16, एलजेपी 5 और जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाह की RLSP एक-एक सीट पर चुनाव लड़ी है. इनमें रुझानों के मुताबिक एलजेपी का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा नजर आ रहा है और चिराग की पार्टी अपनी 5 की 5 सीटें जीतती दिख रही है. चिराग खुद भी अपने पिता रामविलास पासवान की पारंपरिक सीट हाजीपुर से बढ़त बनाए हुए हैं. रुझानों में बीजेपी को 12 तो जेडीयू को 15 सीटों पर बढ़त हासिल है.
चुनाव के रुझान अगर नतीजों में तब्दील होते हैं तो साफ है कि चिराग ही लोक जनशक्ति पार्टी के असली वारिस हैं. बीच चुनाव में चाचा पशुपति पारस ने मंत्री पद त्याग कर एनडीए से अलग होने का फैसला लिया था क्योंकि बिहार में उन्हें एक भी सीट नहीं मिली थी. चाचा-भतीजे के बीच मुख्य तौर पर हाजीपुर सीट को लेकर लड़ाई थी जिसे चिराग किसी भी सूरत में छोड़ना नहीं चाहते थे.
हाजीपुर सीट पर हक की लड़ाई
एनडीए के कोटे में पशुपति पारस अपने लिए हाजीपुर सीट मांग रहे थे, जबकि चिराग पासवान पहले से ही इस सीट पर अपनी दावेदारी ठोक चुके थे. हाजीपुर वही सीट है, जहां से चिराग के पिता रामविलास पासवान 9 बार लोकसभा सांसद रहे थे. 2019 में पशुपति पारस यहां से पहली बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे और यही वजह थी कि पारस फिर इसी सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन एनडीए ने चाचा से किनारा कर भतीजे को चुना और ये फैसला नतीजों में सही साबित होता दिख रहा है.
चिराग की पार्टी वैशाली, हाजीपुर, समस्तीपुर, खगड़िया और जमुई में चुनाव लड़ी है. जमुई से चिराग खुद भी सांसद रह चुके हैं जबकि इस बार वह हाजीपुर से ताल ठोक रहे हैं. बिहार में एलजीपी अगर अपनी पांचों सीटें जीत लेती है तो बिहार में चिराग का कद और बढ़ जाएगा साथ ही वह सूबे में एनडीए के सबसे मजबूत साथी बनकर उभरेंगे. इसके अलावा नतीजों से यह भी साफ होगा कि रामविलास पासवान के असली उत्तराधिकार उनके बेटे चिराग ही हैं. इससे पार्टी पर पशुपति पारस का दावा खारिज होना तय है
