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हाथ-पैर बांधे… मुंह में ठूंसा कपड़ा… गे पार्टनर्स ने यूं किया था अपने साथी का मर्डर

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नई दिल्ली,

जुर्म की दुनिया में कई बार ऐसे मामले भी सामने आते हैं, जो होते कुछ हैं और दिखाई कुछ और देते हैं. मगर सही तफ्तीश और मजबूत तहकीकात हर मामले की सच्चाई को उजागर कर देती है. ऐसा ही एक मामला कुछ माह पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आया था, जहां शिकायत तो अपहरण की थी. जांच में मामला हत्या का निकला और जब आरोपियों से पूछताछ की गई तो पूरी कहानी ही पलट गई.

26 जून 2022, सेक्टर-6, जागृति विहार, मेरठ
मेरठ के जागृति विहार का रहनेवाला 21 का नौजवान यश रस्तोगी 26 जून की शाम को स्कूटी लेकर अपने घर से निकला था. घर से निकलते वक्त उसने थोड़ी ही देर में वापस लौट आने की बात कही थी. लेकिन शाम से रात हुई और रात से सुबह हो गई, लेकिन ना तो यश घर लौटा और ना ही घरवालों से उसकी कोई बात ही हुई. असल में उसके घर से बाहर जाने के कुछ ही देर बाद उसका मोबाइल फ़ोन भी ऑफ हो चुका था. ऐसे में घरवाले चाह कर भी उससे बात नहीं कर पा रहे थे और तब हार कर घरवालों ने पुलिस से शिकायत की.

पुलिस ने दर्ज की रहस्यमयी गुमशुदगी
मेरठ के मेडिकल थाने की पुलिस ने एक लड़के की इस रहस्यमयी गुमशुदगी पर किडनैपिंग यानी अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की और मामले की छानबीन शुरू कर दी गई. चूंकि मामला एक नौजवान के अपहरण का था, पुलिस ने मामले को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए कई टीमें बनाई. और तो और एसओजी यानी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को भी इनवेस्टिगेशन का हिस्सा बनाया गया और एक साथ पुलिस ने कई पहलुओं से मामले की तफ्तीश शुरू कर दी.

सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग
इनमें यश के घरवालों, दोस्तों और रिश्तेदारों से पूछताछ शामिल थी. साथ ही उसके मोबाइल नंबर की लोकेशन और उस पर हुई आखिरी बातचीत का ब्यौरा तलाशना भी मकसद था. इसी तरह से उसकी किसी सीसीटीवी कैमरे में कैद तस्वीरों पर भी पुलिस का फोकस था. पुलिस सब कुछ देख रही थी, एक्सप्लोर कर रही थी. लेकिन करीब ढाई सौ सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और सैकड़ों मोबाइल नंबरों से यश के अपहरण के लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान कर पाना इतना आसान नहीं था.

स्कूटी पर अकेले ही सवार था यश
उधर, पुलिस पर लड़के को जल्द से जल्द ढूंढने का दबाव लगातार बढ़ रहा था. लेकिन सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की स्कैनिंग से पुलिस को इस मामले का पहला सुराग मिला. वो ये कि 26 जून की शाम को यश अपनी स्कूटी से अकेले ही शहर के लिसाडी गेट इलाके की तरफ जाता हुआ दिखाई दिया और उसकी ऐसी तस्वीरें सिर्फ एक नहीं कई सीसीटीवी कैमरों में कैद हुईं थी. यानी शुरुआती तफ्तीश से एक बात तो साफ था कि उसे कोई जबरन उसके घर के पास से या फिर आस-पास के किसी ठिकाने से उठा कर नहीं ले गया. ये और बात है कि आगे उसके साथ शायद कोई ज़्यादती हुई थी.

ऐसे निकल गए 3 से 4 दिन
इन्हीं सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में पुलिस को यश की गुमशुदगी को लेकर एक और सुराग मिला. पुलिस ने नोटिस किया कि यश अपनी स्कूटी पर लिसाडी गेट की तरफ जाता हुआ तो दिखा, लेकिन वहां से वापस लौटने की उसकी कोई भी तस्वीर कैमरों में कैद नहीं हुई थी. यानी शक इस बात का था कि उसके साथ जो भी ज्यादती हुई या फिर उसे जिसने भी गायब किया, उसने उसे लिसाढी गेट के इलाके में ही कैद करके रखा. इस स्कैनिंग में पुलिस के तीन से चार दिन निकल गए.

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