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बनने आया था डॉक्टर, बन गया साइबर फ्रॉड गैंग का सरगना… STF ने सरगना समेत गिरोह के 6 सदस्यों को किया गिरफ्तार

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लखनऊ

डिजिटल अरेस्ट, ट्रेडिंग, पेड टास्क, गेमिंग और अन्य तरीकों से लोगों से साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह के सरगना समेत 6 लोगों को एसटीएफ ने विभूतिखंड स्थित गॉडफादर कैफे के पास से गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना 12वीं पास है। नीट नहीं निकाल पाने के बाद साइबर फ्रॉड का शिकार हुआ। इसके बाद खुद ही साइबर फ्रॉड के गोरखधंधे में कूद गया।

एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक बीटेक कर रहे अर्पित मालवीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उनकी एटेक्श इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड आईटी सॉल्यूशन कंपनी है। उन्होंने कंपनी के विस्तार और वार्षिक टर्नओवर बढ़ाने के लिए आयुष मिश्रा के माध्यम से मलिक अंसारी (टेलिग्राम आईडी- @malik_ansari_0) से संपर्क किया था। उसने झांसा दिया था कि उसकी कंपनी के पास पेमेंट आउटसोर्सिंग के वैध दस्तावेज और प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं। उसके बाद अब्दुल मलिक ने पीड़ित की कंपनी के बैंक खाते की जानकारी मांगी।

कंपनी के बैंक खाते से लिंक मोबाइल नंबर पर एपीके फाइल के माध्यम से एक सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर दिया। इसके बाद बैंक खाते में करीब 48 लाख रुपये के लगभग 3200 अवैध ट्रांजेक्शन किए गए। अवैध ट्रांजेक्शन होने के कारण बैंक ने कंपनी का खाता फ्रीज कर दिया था। तब पीड़ित ने बैंक में जाकर पड़ताल की थी। पीड़िता को पता चला था कि उसकी कंपनी के बैंक अकाउंट में साइबर ठगी के रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया है।

गिरोह में 12वीं पास से लेकर पीएचडी धारक तक
एसटीएफ ने पड़ताल के दौरान विभूतिखंड स्थित गॉडफादर कैफे के पास से गिरोह के सरगना लालबाग निवासी अब्दुल मलिक, गोमतीनगर विस्तार निवासी आयुष मिश्रा, गुडंबा निवासी यासीन अहमद, लुधियाना निवासी सैयद आलिम हुसैन, चिनहट निवासी पुष्पेंद्र सिंह और आलमबाग निवासी विजय कुमार पाठक को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ के मुताबिक अब्दुल मलिक 12वीं पास है। वह संतकबीरनगर का रहने वाला है। आरोपित आयुष ने बीटेक, यासीन ने 10वीं, सैयद आलिम ने बीबीए, पुष्पेंद्र ने एमबीए और विजय ने पीएचडी कर रखी है।

आरोपित सरगना अब्दुल मलिक ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2017 में संतकबीर नगर से इंटरमीडिएट करने के बाद लखनऊ में नीट की तैयारी करने के लिए आया था। 3 वर्षों तक प्रयास करने पर भी वह नीट में सफल नहीं हुआ। इसी बीच उसकी लखनऊ में कई लोगों से मित्रता हो गई। वर्ष 2022 में उसकी मुलाकात शुभम ठाकुर से हुई। वह खुद को शेयर मार्केट का बड़ा ट्रेडर बताता था। शुभम ने मलिक को बताया कि उसके साथ काम करने और इन्वेस्टमेंट करने पर वह एक लाख रुपये पर 12 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से फायदा होगा।

सरगना ने खुद से लोन लेकर 10 लाख रुपये और अपने जानने वालों के करीब 50 लाख रुपये शुभम को ट्रेडिंग करने के लिए दिए थे। कुछ महीने मुनाफा देने के बाद वह रुपये लेकर भाग गया था। कर्ज चुकाने के लिए सरगना ने साइबर फ्रॉड करना शुरू कर दिया। वर्ष 2024 में थाना छितवापुर में अब्दुल मलिक पर केस दर्ज हुआ था। मलिक व उसके गिरोह द्वारा एनजीओ के माध्यम से लगभग 15 लाख रुपये की ठगी की थी।

नेपाल में हैं गिरोह के कुछ सदस्य
सितंबर-2024 में मलिक की दोस्ती लखनऊ निवासी फरहान से हुई। उसने काठमांडू में रहने वाले जैकी पूना और डेनियल से परिचय करवाया। कम समय में साइबर क्राइम कर रुपये कमाने के लिए गिरोह ने कॉरपोरेट बैंक खातों को ट्रैक करना शुरू किया। वह लोगों से कॉरपोरेट खाता मुनाफा देने का झांसा देकर लेने लगे।

इसके बाद मलिक, आयुष मिश्रा, यासीन अहमद, सैयद आलिम, पुष्पेंद्र सिंह और अन्य लोगों ने बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड शुरू कर दिया। आरोपित जिन लोगों से कॉरपोरेट खाता लेते थे, उनसे एटीएम कार्ड, चेक बुक, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सिम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग का यूजर आईडी पासवर्ड, कॉरपोरेट आईडी, क्यूआर कोड और अन्य जानकारी भी ले लेते थे।

गिरोह के सदस्य खाताधारकों के साथ होटल में रुकते थे। उनके मोबाइल में एपीके फाइल के माध्यम से मेसेज फारवर्ड करने का साफ्टवेयर डाउनलोड कर देते थे। आरोपितों ने बताया कि उन लोगों ने जनवरी 2025 में टेलीग्राम पर निलेश यादव बिहार के नाम की आईडी पर सम्पर्क कर इंडियन ओवरसीज बैंक का कार्पोरेट बैंक खाता किराए पर लिया था। इसके बाद डेनियल ने उस बैंक खाते को संचालित कर लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये की साइबर ठगी की थी।

एसटीएफ को छानबीन के दौरान गिरोह के सदस्यों से 10 कॉरपोरेट खातों की जानकारी मिली है। एसटीएफ के मुताबिक गिरोह के खिलाफ देश में साइबर क्राइम की 25 अन्य शिकायतें भी दर्ज हैं। आरोपितों ने बताया कि वह साइबर फ्रॉड की रकम बांटने के लिए एकत्र हुए थे। उसी बीच एसटीएफ ने पकड़ लिया।

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