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सियासी संकट के बीच विधायकों संग हेमंत की पिकनिक, अब राजभवन से फैसले का इंतजार

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रांची,

झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी खतरे में हैं. राज्य में सियासी हलचल भी तेज है. इस बीच, झामुमो गठबंधन सरकार के विधायक शनिवार को पिकनिक मनाने के लिए रांची से खूंटी जिले के लतरातू डैम पर पहुंचे. इन विधायकों के साथ खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी थे. सभी लोग दोपहर 2.30 बजे तीन लग्जरी बसों से निकले थे और शाम को 8.30 बजे वापस रांची लौट आए हैं.

माना जा रहा है कि सियासी तनाव को दूर करने के लिए हेमंत ने विधायकों के साथ ये ट्रिप बनाई थी. रांची से करीब 40 किमी दूर इस डैम पर विधायकों के साथ हेमंत ने 4 घंटे से ज्यादा वक्त बिताया. यहां तक पहुंचने में करीब 1 घंटे का समय लगता है. कुल 6 घंटे विधायक पिकनिक मोड पर रहे. डैम पर विधायकों के मस्ती करने की भी तस्वीरें सामने आई हैं.

EC ने विधायक पद से अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की
दरअसल, झारखंड में पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ने की चर्चाएं जोर पकड़े हुए हैं. हेमंत पर आरोप है कि उन्होंने विधायक रहते हुए अपने नाम खनन लीज का पट्टा लिया है. इस संबंध में शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने जांच की और हेमंत का पक्ष सुनने के बाद अपनी रिपोर्ट झारखंड के राज्यपाल रमेश बैंस को भेज दी है. कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग ने हेमंत की विधायक पद से अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की है.

सत्ता संकट से निपटने की तैयारी में लगा JMM गठबंधन
हालांकि, अभी राज्यपाल का इस फैसले पर निर्णय आना बाकी है. अगर राज्यपाल चुनाव आयोग के फैसले पर मुहर लगाते हैं तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा. ऐसे में राज्यपाल में नए सीएम के नाम पर गठबंधन को चेहरा तय करना होगा. इसी कवायद में झामुमो समेत सहयोगी गठबंधन का दल कांग्रेस भी लगा है. इसी संबंध में हेमंत गठबंधन के विधायकों की एकजुटता पर जोर दे रहे हैं और लगातार मीटिंग कर रहे हैं.

आज पहले विधायकों के साथ बैठक, फिर पिकनिक का प्रोग्राम
शनिवार को एक बार फिर सभी दलों के विधायकों की बैठक बुलाई गई. इसमें एकजुटता पर बल दिया गया. उसके बाद हेमंत इन विधायकों के साथ तीन बसों से खूंटी जिले के लतरातू डैम पहुंचे. विधायकों के साथ हेमंत ने नाव की सवारी की. डैम पर घूमते भी देखे गए. शाम करीब 8.30 बजे से रांची में कांग्रेस विधायकों की बैठक थी. इसलिए हेमंत के साथ सभी विधायक वापस लौट आए. खास बात ये है कि बस में पहली सीट पर हेमंत खुद बैठे थे. उन्होंने विधायकों के साथ सेल्फी भी ली. विधायकों का फोटो सेशन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

कांग्रेस बोली- हम मसले पर चर्चा करेंगे
झारखंड में सियासी हलचल के बीच कांग्रेस आलाकमान भी अलर्ट देखा जा रहा है. पार्टी के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे भी रांची पहुंच गए हैं. उन्होंने कहा कि सभी विधायक और मंत्री सिर्फ उन राजनीतिक गतिविधियों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं जो पिछले कुछ दिनों में घटी हैं. हम यहां इस मामले पर चर्चा करने और उस पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बात कर रहे हैं. पांडे ने आगे कहा- झारखंड में युवा मुख्यमंत्री की सरकार चल रही है लोग अफवाह पर ध्यान ना दें. हमारी गठबंधन की सरकार को किसी तरह का खतरा नहीं है. वहीं, नए सीएम चेहरे के सवाल पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि ये निर्णय सभी विधायक लेंगे. गठबंधन के विधायकों का निर्णय ही मान्य होगा.

गठबंधन बना रहा है फुल प्रूफ प्लान
बताते चलें कि हेमंत सोरेन की सीएम की कुर्सी जाने की संभावना के बीच विधायकों को बचाने की तैयारी की जा रही है. इन विधायकों को बड़े ही कूटनीतिक तरीके से संभालने की रणनीति है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर फ्लोर टेस्ट की स्थिति बनती है तो उससे निपटने का गठबंधन के पास एक फुल प्रूफ प्लान होना जरूरी है. यही वजह है कि ऐसे हालात में पहले गठबंधन के विधायकों को व्हिप जारी किया जाएगा, उसके बाद बहुमत साबित करने की तैयारी की जाएगी. कांग्रेस ने भी राज्य में किसी भी तरह की होर्स ट्रेडिंग से बचने के लिए अपने तीन विधायकों को सस्पेंड कर दिया था. एक सितंबर तक उन सभी विधायकों को जवाब देने के लिए कहा गया था. अगर उन तीनों विधायकों ने फ्लोर टेस्ट में महागठबंधन के पक्ष में वोट नहीं दिया तो उनकी विधायकी चली जाएगी.

क्या है पूरा मामला?
हेमंत सोरेन को रांची जिले के अनगड़ा ब्लॉक में 0.88 एकड़ ज़मीन का खनन पट्टा मिला था. दस्तावेजों के मुताबिक 28 मई 2021 को हेमंत सोरेन ने आवेदन दिया और उन्हें 15 जून 2021 को मंजूरी मिल गई थी. इसके बाद 9 सितंबर को पर्यावरण विभाग से मंजूरी मांगी गई जो 22 सितंबर को मिल गई. 11 फरवरी 2022 को बीजेपी ने राज्यपाल से मिलकर शिकायत की कि ये लाभ के पद का मामला बनता है और सीएम खुद के नाम से खनन पट्टा नहीं ले सकते. इसके बाद हेमंत सोरेन ने 11 फरवरी 2022 को लीज सरेंडर करके खुद को अलग कर लिया.

खनन के धंधे में हेमंत सोरेन सरकार के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ तब होना शुरू हुआ जब झारखंड की खनन सचिव रह चुकी पूजा सिंघल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी शुरू की. ईडी को पूजा सिंघल के सीए सुमन कुमार के एक ही ठिकाने से साढ़े सत्रह करोड़ रुपये नकद मिले थे. ये रकम इतनी ज्यादा थी कि गिनने में 14 घंटे का वक्त लग गया था. ईडी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि पूजा सिंघल और उनके करीबियों के करीब 150 करोड़ रुपये के निवेश का खुलासा हुआ और कई अहम दस्तावेज भी मिले.

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