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मैं पूरे दिन इंतजार करता रहा लेकिन… संजय राउत ने आर्थर रोड जेल में बिताए दिन को याद किया

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मुंबई

शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत की किताब ‘हेवन इन हेल’ का आज विमोचन हुआ। संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय ने फरवरी 2022 में कथित पात्रा चॉल घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। उन्हें नवंबर में रिहा कर दिया गया। जेल के दिनों के अनुभवों पर आधारित पुस्तक का विमोचन समारोह रवींद्र नाट्य मंदिर में हुआ। इस किताब में गृह मंत्री अमित शाह के बारे में कई विस्फोटक दावे किए गए हैं।

आर्थर रोड जेल में बिताए दिन को किया याद
पुस्तक के विमोचन से पहले दिए गए एक इंटरव्यू में संजय राउत ने आर्थर रोड जेल में बिताए अपने दिनों पर टिप्पणी की। राउत से पूछा गया कि क्या जेल में रहते हुए उन्हें कभी असहज महसूस हुआ और क्या उन्होंने कभी राजनीति छोड़कर रिटायरमेंट होने के बारे में सोचा। इस पर राउत ने जवाब दिया कि यह विचार मेरे मन में कभी नहीं आया। क्योंकि मुझे यकीन था कि मुझे फंसाने के लिए सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है।

राउत को इस बात का था विश्वास
राउत ने कहा कि मैं जानता था कि यह पूरी बात झूठी है। मनगढ़ंत है। मुझे यकीन था कि यह मुझे गिरफ्तार करने की साजिश थी। मेरे मन में कोई संदेह नहीं था कि मैं किसी दिन इससे बाहर निकल जाऊंगा। मैंने सोचा था कि मैं दो साल में रिहा हो जाऊंगा। लेकिन अदालत ने मुझे जल्दी रिहा कर दिया। राउत ने बताया कि जब दस्तावेज अदालत के सामने आए तो वे हैरान रह गए।

जेल में कब हुई घबराहट?
राउत ने इस सवाल का भी जवाब दिया कि जेल में रहते हुए उन्हें कब असहज महसूस हुआ। राउत ने कहा कि हर आठ दिन में एक बार घर से कोई न कोई मुझसे जेल में मिलने आता था। मेरा भाई सुनील राउत, मेरी दो बेटियां विधिता और पूर्वाश्री और मेरा दामाद मुझसे जेल में मिलने आते थे। वे एक बार भी नहीं आए। मैं सुबह से अपने लोगों का इंतजार कर रहा था। लेकिन सुनील नहीं आया। ये सभी परिवार के सदस्य उसके साथ आते थे। वे नहीं आये। तब मैं परेशान हो गया। सवाल यह उठा कि ये क्यों नहीं आए? जब हम जेल में होते हैं तो हमें बाहर की कोई बात समझ में नहीं आती, हम कुछ भी नहीं जानते। सवाल यह उठा कि उन्हें क्यों नहीं आना चाहिए था। क्या बाहर कोई समस्या हुई है? क्या घर पर कुछ हुआ है? राउत ने बताया कि उस दिन मैं ऐसे विचारों से बहुत परेशान था।

परिवार की सूचना पर मन हुआ शांत
राउत ने कहा कि वह गुरुवार था। सभी कैदियों के परिवार उनसे मिलने आए, लेकिन मेरा कोई परिवार नहीं आया। मैं इस बात से असहज था। लेकिन शाम को मुझे संदेश मिला कि सुनील कानूनी काम से दिल्ली गए हैं। इसीलिए वह नहीं आया। राउत ने जेल की अपनी यादें इन शब्दों में बयां कीं। मुझे शाम को संदेश मिला कि परिवार से कोई भी नहीं आ सकता, और मुझे राहत महसूस हुई।

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